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फिलिस्तीन के पक्ष में भारत ने एक बार फिर से उठाई आवाज, शरणार्थियों को 2.5 मिलियन डॉलर दिया दान

भारत ने मिडिल ईस्ट में एक बार फिर से शांति और स्थिरता की शीघ्र बहाली की दिशा में सभी पक्षों को मिलकर काम करने पर जोर दिया है। भारत ने एक बार फिर से संयुक्त राष्ट्र में फिर से एक अलग संप्रभु और स्वतंत्र फिलिस्तीन के लिए सीधी बातचीत की वकालत की है।

गाजा पट्टी में मानवीय स्थिति पर ब्रीफिंग पर संयुक्त राष्ट्र महासभा में पूर्ण सत्र की अनौपचारिक बैठक में बोलते हुए संयुक्त राष्ट्र में भारत की स्थायी प्रतिनिधि रुचिरा कंबोज ने एक बार फिर से अलग फिलिस्तीन देश की मांग को दोहराया है।

India favours palestine at UN

कंबोज ने कहा कि भारतीय नेतृत्व का संदेश स्पष्ट और सुसंगत रहा है। कंबोज ने कहा, "भारत अंतरराष्ट्रीय समुदाय के उन सभी प्रयासों का स्वागत करता है जो संघर्ष को कम करने की दिशा में प्रयास करते हैं और फिलिस्तीन के लोगों को तत्काल मानवीय सहायता प्रदान करने में सक्षम बनाते हैं।"

कंबोज ने कहा कि भारत ने हमेशा इजराइल के साथ शांति से सुरक्षित और मान्यता प्राप्त सीमाओं के भीतर रहने वाले फिलिस्तीन के एक संप्रभु, स्वतंत्र और व्यवहार्य राज्य की स्थापना के लिए सीधी बातचीत फिर से शुरू करने की वकालत की है।

कंबोज ने इस बात पर प्रकाश डाला कि भारत पहले ही फिलिस्तीन के लोगों को दवाओं और चिकित्सा आपूर्ति सहित 70 टन आपदा राहत सामग्री पहुंचा चुका है। उन्होंने कहा, "हम फिलिस्तीन के लोगों को मानवीय सहायता प्रदान करने की अपनी प्रतिबद्धता पर भी दृढ़ हैं और पहले ही दो किश्तों में 17 टन दवाओं और चिकित्सा आपूर्ति सहित 70 टन आपदा राहत सामग्री वितरित कर चुके हैं और हमारा मानवीय समर्थन जारी है। इसी तरह, भारत फिलिस्तीन शरणार्थियों के लिए संयुक्त राष्ट्र राहत और कार्य एजेंसी (यूएनआरडब्ल्यूए) के सलाहकार आयोग के सदस्य के रूप में सक्रिय भूमिका निभा रहा है।"

गौरतलब कि भारत शुरू से ही इजराइल और फिलिस्तीन के बीच विवाद के हल के लिए द्वि-राष्ट्र समाधान का समर्थन करता रहा है। भारत ने इजराइल पर हमास के हमले की निंदा भी की है और बातचीत के जरिए विवाद के समाधान पर जोर दिया है।

भारत 1988 में फिलिस्तीनी राज्य को मान्यता देने वाले शुरुआती देशों में से है। इसके बाद साल 1996 में भारत ने गाजा में अपना प्रतिनिधि कार्यालय खोला, जिसे बाद में भारत के विदेश मंत्रालय के अनुसार 2003 में रामल्लाह में स्थानांतरित कर दिया गया।

इस बीच भारत ने सोमवार को फिलिस्तीनी शरणार्थियों को दी जाने वाली शिक्षा, स्वास्थ्य देखभाल, राहत और सामाजिक सेवाओं सहित एजेंसी के मुख्य कार्यक्रमों और सेवाओं के लिए 2.5 मिलियन अमेरिकी डॉलर दिया है। यह योगदान फिलिस्तीन में भारत की प्रतिनिधि (आरओआई) रेनू यादव द्वारा UNRWA के विदेश संबंध विभाग के भागीदारी निदेशक करीम आमेर को सौंपा गया।

आपको बता दें कि फिलिस्तीनी शरणार्थियों के लिए संयुक्त राष्ट्र राहत और कार्य एजेंसी (UNRWA), 1950 से कार्यरत है। यह फिलिस्तीन शरणार्थियों के लिए प्रत्यक्ष राहत कार्यक्रम चलाती है। इसे संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों के स्वैच्छिक योगदान से वित्त पोषित किया जाता है।

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