India Bangladesh Trains: फिर चलेंगी भारत-बांग्लादेश की ट्रेनें? 2024 से हैं बंद, तारिक के आने से जगी उम्मीद!
India Bangladesh Trains: भारत और बांग्लादेश के रिश्ते सिर्फ पड़ोसी देशों वाले नहीं हैं, बल्कि इतिहास, संस्कृति, भाषा और पारिवारिक संबंधों से गहराई से जुड़े हुए हैं। हालांकि ये रिश्ते आवामी लीग के दौर में हमेशा अच्छे रहे जबकि BNP के दौर में इनमें खटास भी देखी गई। इन रिश्तों को मजबूत बनाने में तीन खास ट्रेनों की बड़ी भूमिका रही है- मैत्री एक्सप्रेस, बंधन एक्सप्रेस और मिताली एक्सप्रेस। ये ट्रेनें सिर्फ यातायात का साधन नहीं, बल्कि दोनों देशों के नागरिकों के लिए दोस्ती और भरोसे की प्रतीक हैं।
मैत्री एक्सप्रेस: दोस्ती की पहली बड़ी पहल
मैत्री एक्सप्रेस को कोलकाता और ढाका के बीच सीधी रेल सेवा के रूप में शुरू किया गया। इसका मकसदे था- विभाजन के बाद बिछड़े परिवारों को जोड़ना, व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा देना और लोगों के बीच संपर्क आसान बनाना।

यह ट्रेन सप्ताह में पांच दिन चलती थी और सालों से दोनों देशों के बीच सबसे लोकप्रिय अंतरराष्ट्रीय रेल सेवा थी। कोविड-19 महामारी के दौरान इसे अस्थायी रूप से रोक दिया गया था, लेकिन 29 मई 2022 से सेवाएं फिर से शुरू कर दी गईं। वहीं जब अगस्त 2024 में शेख हसीना को सत्ता से बेदखल किया गया तो सुरक्षा कारणों से इनके संचालन को लाल झंडी दिखाते हुए सस्पेंड कर दिया गया था।
बंधन एक्सप्रेस: क्षेत्रीय जुड़ाव की कड़ी
कोलकाता और खुलना को जोड़ने वाली बंधन एक्सप्रेस सप्ताह में दो दिन संचालित होती है। इस ट्रेन ने दक्षिण-पश्चिम बांग्लादेश और पश्चिम बंगाल के बीच संपर्क को आसान बनाया। यह सेवा खास तौर पर व्यापारियों, छात्रों और पारिवारिक यात्रियों के लिए बहुत कामगार रही है, पर अगस्त 2024 से इसे भी सस्पेंड कर दिया है।
मिताली एक्सप्रेस: उत्तर बंगाल से ढाका तक नई राह
1 जून 2022 को भारत और बांग्लादेश ने मिलकर मिताली एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाई। इस अवसर पर भारत के रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और बांग्लादेश के रेल मंत्री मो. नूरुल इस्लाम सुजान ने वर्चुअल रूप से सेवा की शुरुआत की।
हालांकि इसका उद्घाटन 27 मार्च 2021 को दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों द्वारा किया गया था, लेकिन कोविड-19 प्रतिबंधों के कारण संचालन में देरी हुई। मिताली एक्सप्रेस ढाका और न्यू जलपाईगुड़ी को हाल ही में बहाल हुए हल्दीबाड़ी-चिलहाटी रेल लिंक के माध्यम से जोड़ती थी, पर अभी यह भी सस्पेंड चल रही है।
नेपाल तक हुआ असर
यह ट्रेन बांग्लादेश को उत्तर बंगाल और पूर्वोत्तर भारत से जोड़ती है। साथ ही बांग्लादेशी नागरिकों को भारत के रास्ते रेल द्वारा नेपाल तक यात्रा की सुविधा भी देती थी, जिससे क्षेत्रीय कनेक्टिविटी मजबूत होती है। लिहाजा इसके बंद होने का असर नेपाल तक हुआ
राजनीतिक अशांति और सेवाओं का निलंबन
बांग्लादेश में राजनीतिक अस्थिरता और पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के इस्तीफे और देश छोड़ने के बाद हालात बदल गए। 5 अगस्त को भारतीय रेलवे ने बांग्लादेश के लिए सभी यात्री ट्रेन सेवाएं निलंबित कर दी गईं। जिसमें मैत्री एक्सप्रेस, बंधन एक्सप्रेस और मिताली एक्सप्रेस तीनों ट्रेनें निलंबित चल रही हैं।
व्यापार पर भी असर
यात्री सेवाओं के साथ-साथ मालगाड़ियों पर भी प्रभाव पड़ा। इन ट्रेनों से रोजाना कई टन सामान दोनों देशों के बीच आता-जाता था, लेकिन अब उसके लिए सड़क मार्ग और जल मार्ग का इस्तेमाल किया जा रहा है, जो तुलनात्मक रूप से महंगा विकल्प है।
नई सरकार और फिर से शुरू होने की उम्मीद
हालिया बांग्लादेश चुनाव में तारिक रहमान के नेतृत्व वाली बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की जीत के बाद नई राजनीतिक परिस्थिति बनी है। नई सरकार के गठन के साथ यह उम्मीद जताई जा रही है कि भारत-बांग्लादेश संबंधों में स्थिरता आएगी और रेल सेवाएं दोबारा शुरू की जा सकती हैं। भारत ने स्पष्ट किया है कि सकारात्मक प्रतिक्रिया मिलने के बाद ही सेवाएं बहाल होंगी।
ट्रेनें नहीं साझा विरासत हैं
मैत्री, बंधन और मिताली एक्सप्रेस सिर्फ ट्रेनें नहीं हैं- ये दोनों देशों की साझा विरासत और भविष्य की उम्मीद का प्रतीक हैं। अगर राजनीतिक हालात सामान्य होते हैं, तो इन सेवाओं का फिर से शुरू होना न सिर्फ यात्रियों के लिए राहत होगी, बल्कि यह भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में नई मजबूती का संकेत भी होगा। दोनों देशों के करोड़ों नागरिक अब उस दिन का इंतजार कर रहे हैं, जब ये ट्रेनें फिर से सीमाओं को पार करते हुए दोस्ती की पटरी पर दौड़ती नजर आएंगी।
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