70 साल बाद जंगलों में फर्राटे भरेंगे चीते, भारत ने इस देश के साथ किया दुनिया का सबसे बड़ा समझौता
सत्तर साल पहले भारत से गायब हो गए चीते एक बार फिर भारत के जंगलों में फर्राटे भरते दिखेंगे। भारत और नामीबिया के बीच बुधवार को चीता रिलोकेशन के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए हैं।
विंडहॉक, 21 जुलाईः सत्तर साल पहले भारत से गायब हो गए चीते एक बार फिर भारत के जंगलों में फर्राटे भरते दिखेंगे। जी हां। चीता भारत आने वाला है। भारत और नामीबिया के बीच बुधवार को चीता रिलोकेशन के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इसके तहत अब नामीबिया के चीते भारत में बसाए जाएंगे। यह इतनी बड़ी संख्या में मांसाहारी जानवरों के अंतरमहाद्वीपीय ट्रांसफर के लिए दुनिया का पहला समझौता है।
तस्वीर- पीटीआई

विशेष विमान से लाया जाएगा भारत
इन चीतों को 15 अगस्त से पहले एक विशेष विमान से भारत लाया जाएगा। इसके साथ ही इन चीतों को मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में बसाया जाएगा। पहले कूनो नेशनल पार्क में शेरों को बसाने की योजना थी लेकिन बाद में इस पार्क के लिए चीतों को वरीयता दी गई। चीता प्रोजेक्ट के तहत अगले पांच सालों में 30 से 40 चीते लाए जाएंगे। इसके लिए देश में कूनो पालपुर के अतिरिक्त भी दूसरे ठिकानों को तैयार करने का काम किया जा रहा है। इसके साथ ही चीतों के देश में आगमन के कार्यक्रम को भी भव्य बनाने की तैयारी है।

जयराम रमेश ने किया था प्रयास
लगभग 13 साल पहले भारत के तत्कालीन पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश द्वारा चीतों को भारत लाने के प्रयास शुरू किए गए थे जिसकी प्रक्रिया अब पूरी होने वाली है। नामीबिया की उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री नेटुम्बो नंदी नदैतवा ने कहा कि भारत ने चीतों के स्थानांतरण की सभी जरूरतों को पूरा कर लिया है जिसके बाद यह निर्णय लिया गया है कि अब हम चीतों को निर्यात कर सकते हैं। हम उम्मीद करते हैं कि भारतीय इन शानदार चीतों का अच्छे से ख्याल रखेंगे।

अफ्रीका के अनुकूल माहौल तैयार
फिलहाल दुनिया में चीतों की मौजूदगी दक्षिणी अफ्रीकी देश जैसे दक्षिण अफ्रीका, नामीबिया, बोत्सवाना और जिम्बाब्वे में है, जहां वे प्राकृतिक माहौल में रहते हैं। उन्हें लाते समय यह देखा गया कि ये चीते दक्षिण अफ्रीका में जिस तरह के माहौल में रहते हैं, वैसा ही माहौल उन्हें यहां दिया जाए। इसी को ध्यान में रखते पाया गया कि भारत का कूनो नेशनल पार्क उनके प्राकृतिक रिहाइश के लिए सबसे ज्यादा अनुकूल है। इसके साथ ही चीतों के लिए कई सारे अलग इंतजाम भी किए गए हैं। जंगल के अंदर इंक्लोजर बनाए गए हैं जहां शुरुआती कुछ दिनों तक चीतों को रखा जाएगा। बाद में उन्हें खुले छोड़ दिया जाएगा।

दुनिया भर की टिकी है निगाहें
चूंकि चीता को एक महाद्वीप से दूसरे महाद्वीप के वातावरण में लाया जा रहा है इसलिए दुनिया भर की निगाहें इस डील पर टिकी हुई हैं। हालांकि भारत में भी पहले चीते पाए जाते थे लेकिन अत्यधिक शिकार और जंगलों की अंधाधुंध कटाई के कारण ये 70 साल पहले विलुप्त हो गए। अब एशिया में बस इरान ऐसा देश है जहां कुछ गिनती के चीते पाए जाते हैं। नामीबिया से लाए जा रहे चीते भारतीय चीतों से भिन्न हैं। इनकी अलग नस्ल है। ऐसे में यह जानना महत्वपूर्ण होगा कि ये अफ्रीकी चीते, भारतीय कंडीशन में सर्वाइव कर पाएंगे या नहीं।

दुनिया का सबसे तेज जानवर है चीता
चीता दुनिया का सबसे तेज जानवर होता है जो 113 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ सकता है। चीतों को भारत में बसाने के पीछे मकसद सिर्फ एक लुप्त हो चुकी प्रजाति को लाना भर नहीं है, बल्कि इसके जरिए भारत सरकार की कोशिश जैव विविधता के लिहाज से पर्यावरणीय संतुलन को विकसित करना भी है।












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