रूसी S-57 या अमेरिकी F-35, क्या स्टील्थ फाइटर जेट खरीदेगा भारत? 6th जेनरेशन लड़ाकू विमान पर मिले दो-दो ऑफर
6th-generation fighter jets: चीन ने छठी पीढ़ी के दो लड़ाकू विमानों (6th-generation fighter jets) का परीक्षण करके दुनिया भर की डिफेंस इंडस्ट्री और डिफेंस एक्सपर्ट्स की आंखें चौंधिया दी हैं। इन विमानों के आने से भारत के लिए भी तनाव बढ़ गया है, जिसके पास अभी पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान (5th-generation fighter jets) भी नहीं हैं।
हालांकि, भारत ने फ्रांस से 4.5 पीढ़ी के राफेल फाइटर जेट (Rafale Fighter Jets) खरीदे हैं, लेकिन भारतीय डिफेंस एक्सपर्ट्स इस बात को लेकर टेंशन दिखा रहे हैं, कि चीनी छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमानों को काउंटर करने के लिए भारत अपनी रणनीति में क्या बदलाव करेगा और पांचवी पीढ़ी के लड़ाकू विमान को अपने बेड़े में शामिल करने के लिए भारत क्या कदम उठाएगा?

दुनिया में इस वक्त पांचवी पीढ़ी के लड़ाकू विमान वाले चार देश हैं, अमेरिका, चीन, रूस और तुर्की।
जिनमें से भारत चीन और तुर्की से किसी भी हाल में डिफेंस समझौता नहीं कर सकता है। ऐसे में भारत के पास दो विकल्प अमेरिका और रूस बचते हैं। रूस ने कई बार भारत को अपने पांचवी पीढ़ी के लड़ाकू विमान S-57 Fighter Jet को लेकर ऑफर दिए हैं, लेकिन डिफेंस एक्सपर्ट्स का मानना है, कि बहुत कम उम्मीद है, कि भारत, रूस से एसयू-57 खरीदेगा। वहीं, अमेरिकी फाइटर जेट खरीदना भी मुश्किल माना जा रहा है, क्योंकि अमेरिकी डिफेंस समझौता कई शर्तों के साथ होता है। लिहाजा, सवाल उठते हैं, कि भारत के सामने फाइटर जेट्स को लेकर क्या विकल्प हो सकते हैं?
क्या किसी देश के साथ मिलकर फाइटर जेट बनाएगा भारत? (6th-generation fighter jets)
बल्गेरियाई मीडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जर्मनी, फ्रांस और स्पेन ने भारत को फ्यूचर कॉम्बैट एयर सिस्टम (FCAS) कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है, जिसका मकसद छठी पीढ़ी का लड़ाकू जेट विकसित करना है। इसी तरह, यूनाइटेड किंगडम, जापान और इटली ने भी नई दिल्ली को अपने ग्लोबल कॉम्बैट एयर प्रोग्राम (GCAP) में शामिल होने की पेशकश की है।
सबसे महत्वपूर्ण बात ये है, कि ये दोनों प्रमुख परियोजनाएं, वायु रक्षा में अत्याधुनिक तकनीक का आश्वासन देती हैं और इन देशों के साथ साझेदारी को मजबूत करती हैं। दूसरी महत्वपूर्ण बात ये है, कि ये सभी भारत के मित्र देश हैं। और यह प्रस्ताव, एक प्रमुख रक्षा सहयोगी के रूप में भारत की बढ़ती प्रतिष्ठा को भी दर्शाता है।
भारत के AMCA लड़ाकू विमान प्रोजेक्ट का क्या है हाल?
भारत ने पांचवी पीढ़ी के लड़ाकू विमान बनाने की अपनी स्वदेशी एडवांस मीडियम फाइटर एयरक्राफ्ट (AMCA) प्रोजेक्ट में भारी-भरकम निवेश किया है। एडवांस एवियोनिक्स और सुपरसोनिक मिसाइल क्षमताओं के साथ पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ विमान के रूप में डिजाइन किए गए AMCA का मकसद, डिफेंस टेक्नोलॉजी में भारत की आत्मनिर्भरता को मजबूत करना है।
वहीं, FCAS या GCAP कार्यक्रमों में शामिल होने से भारत को एडवांस टेक्नोलॉजी तक पहुंच मिल सकती है, लेकिन अगर भारत ऐसे किसी प्रोजेक्ट में शामिल होता है, तो इसका सीधा असर AMCA प्रोजेक्ट पर होगा, क्योंकि फिर भारत को अपना खर्च दूसरी तरफ करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। रिपोर्ट्स बताती हैं, कि नई दिल्ली AMCA को प्राथमिकता देने के दोनों प्रस्तावों को अस्वीकार कर सकती है।
AMCA लड़ाकू विमान प्रोजेक्ट पर भारत का दांव (Indian AMCA Project)
एएमसीए भारत की सबसे महत्वाकांक्षी डिफेंस प्रोजेक्ट है, जिसे डीआरडीओ (DRDO) और इंडियन एयरफोर्स की तरफ सेसंयुक्त रूप से विकसित किया गया है। इसका लक्ष्य सुखोई-57 और एफ-35 जैसे पांचवीं पीढ़ी के जेट विमानों को मात देना है। यह पांचवीं और छठी पीढ़ी की क्षमताओं के बीच अंतर पैदा कर सकता है, क्योंकि इसमें स्टील्थ तकनीक, एडवांस सेंसर, एआई-सक्षम निर्णय लेने और लेजर हथियारों के इस्तेमाल करने के विकल्प होंगे।
भारत की योजना 2035 तक पहला एएमसीए प्रोटोटाइप पूरा करने और 2040 तक छठी पीढ़ी की क्षमताओं को इसमें शामिल करने की है। लेकिन भारत के साथ दिक्कत ये है, की चीन ने पहले ही छठी पीढ़ी के फाइटर जेट का प्रोटोटाइप तैयार कर लिया है और वो दो अलग अलग तरह के पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट्स को अपने बेड़े में शामिल कर चुका है और इस हिसाब से भारतीय AMCA प्रोजेक्ट काफी लेट हो चुका है।
ऐसे में सवाल उठते हैं, कि क्या भारत रूसी SU-57 या अमेरिकी F-35 जैसे फाइटर जेट में निवेश करने का फैसला लेगा?












Click it and Unblock the Notifications