चीन बना रहा 6th जेनरेशन जेट, भारत के पास खत्म हो रहे लड़ाकू विमान, 1962 युद्ध के 62 साल बाद क्यों पिछड़े हम?
6th-Gen Fighter Jet: चीन ने अपने 6वीं पीढ़ी के फाइटप जेट का प्रोटोटाइप दिखाकर दुनिया के सामने अपनी नई ताकत को पेश किया है, जबकि भारत के पास 4.5 पीढ़ी के लड़ाकू विमानों की भी कमी है, इसलिए 1962 के युद्ध के 62 साल बाद इस बात की तहकीकात करने का वक्त आ गया है, कि आखिर चीन, भारतीय वायुसेना से मीलों आगे कैसे निकल गया है।
1962 में चीन से लड़ी गई लड़ाई, आज भी आम भारतीयों को कचोटता है, जिसमें 2000 से ज्यादा भारतीय जवानों ने अपनी शहादत दी थी और 4000 से ज्यादा जवानों को युद्धबंदी बना लिया गया था।

फाइटर जेट की रेस में काफी पिछड़ा भारत (Indian Air Force Vs Chinese Air Force)
फाइटर जेट्स, जो युद्ध के दौरान निर्णायक साबित होते हैं, उसमें चीन ने छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमान का प्रोटोटाइप पेश कर अपनी खतरनाक ताकत दिखाई है और इससे पता चलता है, कि भारत के पास सीमित विकल्प बचे हैं। जबकि, पाकिस्तान ने चीन से पांचवी पीढ़ी के लड़ाकू विमान खरीदने की घोषणा की है, जो पश्चिम में भारत के खिलाफ एक और मोर्चा खोलता है, जो भारत के लिए एक कठोर चेतावनी है।
डिफेंस एक्सपर्ट्स के आकलनों के मुताबिक, पीपुल्स लिबरेशन आर्मी-एयर फोर्स, यानि चीन की वायुसेना के पास 2030 तक 4वीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों, 5वीं पीढ़ी के J-20 श्रेणी के विमानों के लगभग 10 स्क्वाड्रन, और PL-15 बियॉन्ड विज़ुअल रेंज मिसाइलों से लैस J-35 के शुरुआती संस्करण, और H-6 लंबी दूरी के बमवर्षक विमानों के पांच से छह स्क्वाड्रन शामिल होने की उम्मीद है। जाहिर तौर पर, ये भारत के लिए बहुत बड़ा खतरा है।
एक्सपर्ट्स ने इस बात की उम्मीद नहीं की थी, कि चीन अचानक से छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमान पेश कर दुनिया को चौंका देगा।
जबकि इसकी तुलना में, भारतीय वायु सेना (IAF) के लड़ाकू स्क्वाड्रन काफी कम हो गये हैं। भारतीय वायुसेना के पास बचे स्क्वाड्रन में अब पुराने हो चुके मिग-21 विमान बचे हैं, जिन्हें चरणबद्ध तरीके से हटाया जा रहा है, ताकि लड़ाकू विमानों की घटती ताकत को रोका जा सके। सबसे अच्छी स्थिति में भी, 2030 तक IAF के पास सिर्फ 32-34 लड़ाकू स्क्वाड्रन होने की उम्मीद है। 1962 के युद्ध के 62 साल बाद, 2024 में, इंडियन एयरफोर्स 31 स्क्वाड्रन संचालित कर रही है, जो 1965 के बाद सबसे कम है।
IAF प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह ने भी चीन के साथ बढ़ते अंतर को माना है। उन्होंने पिछले दिनों कहा था, कि "हमारे बीच एक अंतर है। फिलहाल, हमें लड़ाकू विमानों के तत्काल अधिग्रहण के माध्यम से इस अंतर को पाटने की जरूरत है। इसके लिए, हम 'मेक इन इंडिया' प्लेटफॉर्म पर विचार कर रहे हैं।"
वायुसेना प्रमुख ने चीन के आक्रमण की स्थिति में अपनी पूरी ताकत से लड़ने की कसम खाई और कहा, कि यह आत्मविश्वास किसी दिखावे की वजह से नहीं बल्कि अपने बेहतरीन प्रशिक्षण और अनुभव की वजह से है।
चीन की वायुसेना बनाम भारतीय वायुसेना
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीन की पीएलए वायु सेना (PLAAF) की कुल ताकत लगभग 3,210 मानी जाती है, जिसमें 1,232 लड़ाकू विमान, 371 समर्पित हमलावर विमान, 224 परिवहन विमान, 314 प्रशिक्षक विमान, 281 हमलावर हेलीकॉप्टर, 911 हेलीकॉप्टर और विशेष मिशन के लिए रखे गए 112 विमान शामिल हैं।
इसकी तुलना में, भारतीय वायुसेना के पास 2,123 की ताकत है, जिसमें 538 लड़ाकू विमान, 172 समर्पित हमलावर विमान, 250 परिवहन विमान, 359 प्रशिक्षक विमान, 23 हमलावर हेलीकॉप्टर, 722 हेलीकॉप्टर और विशेष मिशन के लिए रखे गए 77 विमान शामिल हैं।
इसके अलावा, दूसरे क्षेत्र में भी चीन के मुकाबले भारत काफी पीछे नजर आ रहा है। चीन के पास 730 नौसैनिक बेड़े हैं, जिसमें 61 पनडुब्बियां और तीन हेलिकॉप्टर कैरियर शामिल हैं। जबकि भारत के पास 294 बेड़े हैं, जिसमें 18 पनडुब्बियां हैं और कोई हेलिकॉप्टर कैरियर नहीं है।
चीन का रक्षा बजट भारत के बजट से तीन गुना ज्यादा है। इसके अलावा, चीन अपने लगभग सभी हथियार और उपकरण स्वदेशी रूप से बनाता है। जिससे उसे डिफेंस सेक्टर से भारी मुनाफा कमाने में मदद मिलती है।
MRFA को कब मंजूरी देगी भारत सरकार?
फिलहाल, भारतीय वायुसेना (Indian Air Force) के मौजूदा चौथी पीढ़ी के लड़ाकू विमान, जिनमें 36 राफेल, लगभग 260 Su-30MKI, एडवांस मिराज 2000 और मिग-29, और LCA Mk1s का बढ़ता बेड़ा शामिल है, किसी "स्थानीय संघर्ष" के लिए पर्याप्त हो सकते हैं।
लेकिन, डिफेंस एक्सपर्ट्स का मानना है, कि अगर संघर्ष चीन के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) से आगे बढ़ता है, तो IAF को अपनी महत्वपूर्ण आक्रामक भूमिकाएं निभाने में मुश्किल होगी।
एयर मार्शल अर्जुन सुब्रमण्यम (सेवानिवृत्त) और भारतीय वायु शक्ति पर कई पुस्तकों के लेखक ने अपने आकलन में लिखा है, कि "सच में, IAF के पास इस तरह के अभियान को व्यापक रूप से चलाने के लिए पर्याप्त आक्रामक संपत्ति नहीं है, जबकि भारत को पश्चिमी मोर्चे (पाकिस्तान के साथ सीमा पर) पर निगरानी बनाए रखना होगा, यहां तक कि अगर पाकिस्तान, भारत के खिलाफ मोर्चा नहीं खोलता है, फिर भी। लेकिन, अगर पाकिस्तान, चीन के जागीरदार की तरह भारत के खिलाफ मोर्चा खोल देता है, तो भारत के लिए स्थिति चुनौतीपूर्ण हो सकती है।"
उन्होंने लिखा है, कि "उच्च-स्तरीय चौथी पीढ़ी की क्षमता और AWACS, हवाई ईंधन भरने वाले और खुफिया, निगरानी और लक्ष्यीकरण क्षमताओं जैसे लड़ाकू सक्षमताओं के साथ 114 MRFA (मल्टी रोल फाइटर एयरक्राफ्ट) विमानों का अधिग्रहण, इंडियन एयरफोर्स के लिए दो-मोर्चे की लड़ाई में चीनी वायुसेना पर अपनी लड़ाकू बढ़त बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।"
भारत सरकार ने बनाई उच्च स्तरीय कमेटी
चीनी छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमान के प्रोटोटाइप के सोशल मीडिया पर छा जाने से कुछ दिन पहले ही भारतीय रक्षा मंत्रालय ने स्थिति की जांच के लिए एक उच्चस्तरीय समिति गठित की थी। स्वदेशी उत्पादन में देरी को देखते हुए, विशेषज्ञों ने इस कमी को पूरा करने के लिए जल्द से जल्द MRFA को मैदान में उतारने की वकालत की है।
LCA फाइटर जेट की डिलीवरी 2016 में शुरू हुई, लेकिन 2024 तक इंडियन एयरफोर्स के बेड़े में सिर्फ 38 विमान ही हैं।
लेकिन, साल 2017 में चीन वायुसेना में पांचवी पीढ़ी के स्टील्थ लड़ाकू विमान J-20 माइटी ड्रैगन्स को शामिल किया गया था और आज उसके पास 200 से ज्यादा J-20 माइटी ड्रैगन्स फाइटर जेट हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, साल 2027 तक चीन का लक्ष्य J-20 माइटी ड्रैगन्स की संख्या एक हजार तक ले जाने का लक्ष्य रखा हुआ है।
जाहिर तौर पर, चीन भारत से काफी आगे निकल गया है और एक्सपर्ट्स का मानना है, कि भारत सरकार को तत्काल इंडियन एयरफोर्स में विमानों की कमी को सुधारने की जरूरत है, अन्यथा मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं।
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