आज इस्तीफे का ऐलान कर सकते हैं इमरान खान, इस्लामाबाद में शक्तिप्रदर्शन के लिए बुलाई विशालकाय रैली

पाकिस्तान के पूर्व स्विंग गेंदजाब और 1992 विश्व कप विजेता कप्तान को पाकिस्तानी डीप स्टेट और रावलपिंडी जीएचक्यू के समर्थन से और "नया पाकिस्तान" देने के वादे पर चुना गया था, लेकिन इमरान वादों को पूरा करने में नाकाम रहे...

इस्लामाबाद, मार्च 27: पाकिस्तान में इम दिनों राजनीतिक कोहराम मचा हुआ है और इमरान खान के लिए अपनी सरकार बचाना अब नामुमकिन हो चुका है। लिहाजा, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने राजधानी इस्लामाबाद में शक्ति प्रदर्शन के लिए विशालकाय रैली बुलाई है, जिसमें वो देश की विपक्षी पार्टियों को अपनी ताकत का अहसास कराते हुए इस्तीफे का ऐलान कर सकते हैं। पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इमरान खान संसद में अविश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग में जाने से पहले ही इस्तीफा देकर 'राजनीतिक शहीद' बनने की कोशिश कर सकते हैं।

इस्तीफा दे सकते हैं इमरान खान

इस्तीफा दे सकते हैं इमरान खान

पाकिस्तान के गृहमंत्री शेख रशीद ने कहा है कि, संसद में विपक्षी पार्टियों द्वारा पेश किए गये अविश्वास प्रस्ताव पर अप्रैल महीने के पहले हफ्ते में वोटिंग हो सकती है और उन्होंने ये कहकर, कि देश में समय से पहले चुनाव हो सकते हैं, ये बयान देकर अटकलें तेज कर दी हैं, कि सरकार ने संसद में अपना समर्थन खो दिया है। पाकिस्तान के राजनीतिक हलकों से आने वाली रिपोर्टों से पता चलता है कि, पीएम खान आज दोपहर विपक्ष के खिलाफ एक उग्र अंदाज में रैली को संबोधित करने के बाद इस्तीफा दे सकते हैं और उनके और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी के लिए कथित जनता की सहानुभूति हासिल करने की कोशिश कर सकते हैं। इमरान खान ने 27 मार्च को पाकिस्तान के इतिहास में एक निर्णायक दिन करार दिया है और कहा है, कि देश की जनता 'लूटेरों' के खिलाफ खड़ी होगी। वहीं, पाकिस्तान की विपक्षी पार्टियां भी विशालयाक रैली निकाल रही है, जो कल इस्लामाबाद पहुंचेगा, लिहाजा राजधानी में स्थिति काफी तनावपूर्ण है और पाकिस्तान के राजनीतिक विश्लेषकों ने कहा है कि, देश के नेताओं ने पाकिस्तान में अराजकता का माहौल बना दिया है, क्योंकि राजधानी में कम से कम 20 लाख से ज्यादा लोग... इमरान खान और विपक्षी पार्टियों की रैली में पहुंचेंगे।

भीड़ में हुंकार भरेंगे इमरान खान

भीड़ में हुंकार भरेंगे इमरान खान

इमरान खान सरकार से उनके तीन सहयोगी पार्टियों ने समर्थन वापस ले लिया है, वहीं, इमरान खान के कम से कम 30 सांसद पार्टी लाइन के खिलाफ जाते हुए, इस्लामाबाद में ही सिंध हाउस में छिपे हुए है। लिहाजा, पाकिस्तान पर नजर रखने वालों का मानना है कि पीएम खान इकट्ठी भीड़ के सामने अपने आप को महिमामंडित हो सकते हैं और नेशनल असेंबली में अविश्वास प्रस्ताव के अपमान का सामना करने से पहले ही सार्वजनिक रैली में इस्तीफे का ऐलान कर सकते हैं। पाकिस्तानी पत्रकारों का कहना है कि, इमरान खान 'घमंडी' राजनेता हैं और वो संसद में अपना अपमान बर्दाश्त करने से पहले ही इस्तीफा देकर खुद को राजनीतिक शहीद करार देते हुए जनता की सहानुभूति हासिल कर सकते हैं, क्योंकि अब पाकिस्तान में आने वाले 3 से 4 महीनों में चुनाव होना तय है। पाकिस्तान का संविधान मौजूदा पीएम को अगले चुनावों के लिए कार्यवाहक होने की अनुमति नहीं देता है। इस बात की भी प्रबल संभावना है कि विदेशी फंडिंग मामले में इमरान खान के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और उन्हें पीएम पद से इस्तीफा देने के बाद जेल भी जाना पड़े।

सेना ने छीन लिया है आशीर्वाद

सेना ने छीन लिया है आशीर्वाद

पाकिस्तान के पूर्व स्विंग गेंदजाब और 1992 विश्व कप विजेता कप्तान को पाकिस्तानी डीप स्टेट और रावलपिंडी जीएचक्यू के समर्थन से और "नया पाकिस्तान" देने के वादे पर चुना गया था, लेकिन इमरान खान ने विदेश नीति पर के साथ-साथ देश को आर्थिक रसातल में धकेल दिया है। इमरान खान ने लगातार कूटनीति को भी अपने घमंडों के आधार पर ही तोलने की कोशिश की, जिससे पाकिस्तान को भारी नुकसान हुआ। इस्लामाबाद के अड़ियल रवैये के कारण बलूचिस्तान और सिंध में अलगाववादी आंदोलनों के निर्माण के साथ एक अत्यधिक कट्टरपंथी समाज के भीतर आंतरिक कलह का जन्म हुआ। यहां तक कि काबुल में एक कथित रूप से अनुकूल तालिबान शासन भी रावलपिंडी के लिए वैचारिक सहयोगी तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) समूह के साथ शांति स्थापित नहीं कर पाया। बलूच और सिंध समूहों की तरह, टीटीपी भी पाकिस्तान सेना और सुरक्षा बलों के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय सीमा पर हमले कर रहा है। वहीं, तालिबान के समर्थन के लिए पूरे पाकिस्तान ने अपने दिल का दरवाजा खोल दिया था, फिर भी तालिबान और पाकिस्तान सरकार के बीच रिश्ते खराब हो चुके हैं और इसके लिए भी इमरान खान के घमंड को जिम्मेदार ठहराया गया है।

सेना क्यों हुई इमरान खान से नाराज?

सेना क्यों हुई इमरान खान से नाराज?

पाकिस्तान की सेना के इमरान खान से नाराज होने की कई वजहें हैं। सबसे पहली वजह ये थी, कि इमरान खान ने अपनी सत्ता को सुरक्षित रखने के लिए सेना के अंदर ही फूट डालने की कोशिश की थी और सेना के कई अधिकारियों को अपने पाले में करने के लिए 'लालच' दिया था, जो सार्वजनिक हो गया। वहीं, सेना ने भारत के साथ व्यापार बहाल करने के लिए इमरान खान को कहा था, लेकिन इमरान खान ने वोट बैंक को देखते हुए भारत से व्यापारिक रिश्ते बहाल करने से इनकार कर दिया, जबकि पाकिस्तानी सेना ने भारतीय सेना के साथ सीमा पर सीजफायर का ऐलान कर दिया। वहीं, इमरान खान ने कई बार सार्वजनिक मंचों से सेना को 'भ्रष्ट' कहना शुरू कर दिया और भारतीय सेना के भ्रष्ट नहीं होने की प्रशंसा कर दी, जिससे पाकिस्तान की आर्मी भड़क गई, लेकिन फिर भी शांत रही। लेकिन, स्थिति उस वक्त पूरी तरह से बिगड़ गई, जब आईएसआई चीफ की नियुक्ति पर इमरान खान ने अपनी अकड़ दिखा थी और करीब 3 हफ्ते तक उस फाइल पर साइन नहीं किया, जिसे आर्मी चीफ ने भेजा था। वहीं, इमरान खान की सत्ता की ताबूत पर आखिरी कील उस वक्त लगी, जब आईएसआई के पूर्व चीफ फैज हमीद, जिसे सेना ने हटाया था, उसे ही अगला आर्मी चीफ बनाने निकल पड़े, जिसके बाद सेना ने इमरान खान के सिर से हाथ खींच लिया।

सेना को ही इमरान खान ने कहा ‘जानवर’

सेना को ही इमरान खान ने कहा ‘जानवर’

इमरान खान अपने बड़बोलेपन के लिए जाने जाते हैं और क्या बोल देंगे, इसका अंदाजा किसी को नहीं है। पाकिस्तान की मौजूदा राजनीति को लेकर जब सेना की तरफ से कहा गया, कि वो देश की राजनीति से 'तटस्थ' है और सेना राजनीति में दखल नहीं देगी, तो इमरान खान ने कह दिया, कि 'सिर्फ जानवर ही तटस्थ' रहते हैं। यानि, देश के प्रधानमंत्री ने अपनी ही सेना को सार्वजनिक तौर पर जानवर कह दिया। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर इमरान खान ने चीन में अपने आकाओं को खुश करने के लिए बीजिंग से अमेरिका की आलोचना करके खुद को पश्चिम से अलग कर लिया है। जिस दिन राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने 24 फरवरी को यूक्रेन पर आक्रमण किया, उस दिन मास्को की उनकी खराब समय की यात्रा शायद उनकी डूबती सत्ता का आखिरी तिनका थी।

अपंग हो गई पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था

अपंग हो गई पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था

पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था विदेशी कर्ज के बोझ में दबकर अपंग हो चुकी है और देश में विदेशी मुद्रा के रूप में अब सिर्फ 15 अरब डॉलर ही बचे हैं, वहीं पाकिस्तान रुपया का वैल्यू गिरकर 181 रुपये को पार कर चुका है और चीन से पाकिस्तान ने 18 अरब डॉलर का कर्ज ले लिया है और अब उस कर्ज का ब्याज पाकिस्तान नहीं चुका पा रहा है। वहीं, चीन इस हफ्ते भी पाकिस्तान को 4.2 अरब अमरीकी डालर का और कर्ज देने के लिए सहमत हो गया है। लेकिन, पाकिस्तान के राजनीतिक एक्सपर्ट्स कह रहे हैं, कि इमरान खान ने अब पाकिस्तान को चीन के हाथों पूरी तरह से बेच दिया है, क्योंकि पाकिस्तान के लिए चीन का कर्ज लौटाना अब नामुमकिन है और चीन अपना पैसा किसी भी हाल में छोड़ता नहीं है, लिहाजा आने वाले वक्त में, चीन ने जिस तरह श्रीलंका से हंबनटोटा बंदरगाह छीना, उसी तरह से पाकिस्तानी इलाकों पर कब्जा करेगा।

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