जानिए अफगानिस्तान सैनिकों की वह कमी जिसकी वजह से हावी हो रहे आतंकी

इसके साथ ही कहीं न कहीं खतरे के बढ़ने का भी अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। अमेरिकी और नाटो फोर्सेज की ओर से अफगान फोर्स और वहां के पुलिस जवानों को आतंकियों से निबटने की पूरी ट्रेनिंग दिए जाने के बावजूद आतंकी हावी हो जाते हैं। इसकी वजह है अफगान फोर्सेज के जवानों का अनपढ़ या असाक्षर होना।
नहीं पढ़ सकते अंग्रेजी में लिखे इंस्ट्रक्शन
अफगान फोर्स और पुलिस के आधे से ज्यादा सदस्य अमेरिका की ओर से मुहैया कराई गई 200 मिलियन डॉलर की मदद के बाद भी अनपढ़ रहेंगे। उनकी इस कमजोरी की वजह से वह उन हथियारों को ऑपरेट ही नहीं कर सकते हैं जो अमेरिकी फौजों की ओर से उन्हें दिए गए हैं क्योंकि उन हथियारों पर निर्देश अंग्रेजी भाषा में लिखे होते हैं।
पढ़े-लिखे न होने की वजह से जवान अंग्रेजी समझ नहीं सकते। उनकी इस कमजोरी पर खुद अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने चिंता जाहिर की थी।
इस वर्ष अमेरिकी की एक स्वायत्त संस्था की ओर से जारी ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका की एक ट्यटोरियल एजेंसी की ओर से अफगानिस्तान में 200 मिलियन डॉलर वहां की सेना और पुलिस के जवानों को साक्षर करने में खर्च किए जा चुके हैं।
2009 में शुरू हुआ 200 मिलियन डॉलर का कार्यक्रम
अमेरिका की अगुवाई वाली सिक्योरिटी अस्सिटेंस फोर्स की ओर से वर्ष 2009 में अफगान फोर्स के जवानों को शिक्षित करने का काम शुरू किया गया था। इस कार्यक्रम की शुरुआत इसलिए की गई थी क्योंकि भाषा की जानकारी और गणित जैसे विषय में दक्षता के बिना वहां की फौज को मिलिट्री स्किल्स या फिर कानूनी विषयों के बारे में कुछ भी बताया नहीं जा सकता था।
इस वर्ष के अंत तक अफगानिस्तान खाली कर देंगी और अमेरिकी की ओर से
फिलहाल इस तरह का कोई करार नहीं साइन किया गया है जिसमें अमेरिकी फौजों को वहां पर कुछ समय तक और रुकने के लिए कहा जाए। वर्ष 2009 में जब से साक्षरता कार्यक्रम की शुरुआत की गई है।
अफगानिस्तान में इस समय 66,000 अमेरिकी ट्रूप्स मौजूद हैं और 2014 की समाप्ति तक यह सभी अमेरिका वापस लौट जाएंगे।
सितंबर 2012 तक 23 अफगान ब्रिगेड में से सिर्फ एक ही अफगान ब्रिगेड ही इस लायक बन सकी है जहां वह बिना किसी सलाहकारों के हथियारों को अपने आप ही संचालित कर सकते हैं। दिसंबर 2013 में पेंटागन की ओर
से दाखिल एक रिपोर्ट में यह बात कही गई है। पेंटागन के वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से भी चिंता जाहिर की गई है और कहा गया है कि अफगान फोर्स के जवानों के साक्षर न हो पाने की वजह से अमेरिका का काम मुश्किल कर दिया है।












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