'तेल संकट' की दहलीज़ पर दुनिया? ईरानी संसद ने होर्मुज खाड़ी को बंद करने की मंजूरी दी, भारत पर क्‍या होगा असर?

Strait of Hormuz: मध्य-पूर्व में इज़रायल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव ने वैश्विक स्तर पर ऊर्जा सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं खड़ी कर दी हैं। अमेरिकी बी-2 बॉम्बर विमानों द्वारा ईरान के तीन परमाणु ठिकानों पर बंकर बस्टर बमों से हमलों के बाद, ईरान की संसद ने रविवार ( 22 जून, 2025) को अंतर्राष्ट्रीय कॉरिडोर हॉर्मुज को बंद करने का निर्णय लिया है। हालांकि ईरानी संसद केइस निर्णय पर आखिरी फैसला ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ही करेगी।

दरअसल, होर्मुज जलडमरूमध्य एक संकरा लेकिन रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। जिसे दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति की धड़कन माना जाता है। यह जलडमरूमध्य न सिर्फ तेल और गैस के प्रवाह का प्रमुख जरिया है, बल्कि वैश्विक बाजारों की स्थिरता से भी सीधे तौर पर जुड़ा है। ऐसे में, भारत जैसे देश जो Gulf region से अपने कच्चे तेल और एलएनजी का बड़ा हिस्सा प्राप्त करते हैं, इस स्थिति में सबसे अधिक प्रभावित हो सकते हैं। अगर वास्‍तव में ईरान ने जलडमरूमध्य बंद किया तो तेल की कीमतों में वृद्धि हो सकती है। जो भारत की आर्थिक स्थिरता, मुद्रा और औद्योगिक गतिविधियों पर गहरा असर डाल सकती है।

What Is Strait of Hormuz होर्मुज जलडमरूमध्य क्या है?

होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण और सामरिक रूप से संवेदनशील समुद्री मार्गों में से एक है। यह जलडमरूमध्य ईरान और ओमान/संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच स्थित है और पर्शियन गल्फ (फारस की खाड़ी) को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। इसकी चौड़ाई सबसे संकरे हिस्से में मात्र 55 किलोमीटर है, लेकिन यही संकरा मार्ग हर दिन करोड़ों बैरल कच्चे तेल और तरल प्राकृतिक गैस (LNG) के आवागमन का केंद्र है। इसी कारण इसे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का "सबसे अहम तेल ट्रांजिट चोकपॉइंट" माना जाता है।

Strait of Hormuz

Why is the Strait of Hormuz important? होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों है अत्यंत महत्वपूर्ण?

  • प्रति दिन लगभग 2 करोड़ बैरल कच्चे तेल का आवागमन इसी मार्ग से होता है (2024 के आंकड़ों के अनुसार)
  • यह वैश्विक तेल खपत का लगभग 25% हिस्सा है - यानी हर चौथा बैरल यहीं से गुजरता है।
  • यह तेल मुख्य रूप से सऊदी अरब, ईरान, इराक, यूएई, कुवैत और क़तर जैसे ऊर्जा-उत्पादक देशों से आता है।

इस तेल का करीब 80% हिस्सा एशियाई बाजारों विशेष रूप से भारत, चीन, जापान और दक्षिण कोरिया को भेजा जाता है।यह मार्ग तरल प्राकृतिक गैस (LNG) के लिए भी रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। खासकर क़तर, जो दुनिया का सबसे बड़ा LNG निर्यातक है, अपने ज़्यादातर शिपमेंट इसी रास्ते से भेजता है।

भारत के लिए क्यों है होर्मुज़ जलडमरूमध्य इतना अहम?

  • भारत की ऊर्जा सुरक्षा का बड़ा हिस्सा इस मार्ग पर निर्भर है
  • भारत के कुल कच्चे तेल आयात का 40% इसी जलडमरूमध्य से होकर आता है।
  • भारत की LNG आपूर्ति का 54% भी यहीं से गुजरता है।
  • भारत रोज़ाना लगभग 5.5 मिलियन बैरल तेल खपत करता है, जिसमें से 1.5 मिलियन बैरल होरमुज़ से होकर आता है।

अगर यह मार्ग बाधित होता है तो भारत पर असर

  • ईंधन की कीमतों में भारी वृद्धि हो सकती है।
  • रिफाइनिंग और औद्योगिक उत्पादन पर असर पड़ेगा।
  • भारत का करंट अकाउंट डेफिसिट और रुपये की स्थिरता प्रभावित हो सकती है।

भारत के पास सीमित विकल्प हैं

  • नाइजीरिया और अंगोला जैसे पश्चिम अफ्रीकी देशों से कुछ तेल आपूर्ति स्थानांतरित की जा सकती है।
  • अमेरिका से आयात संभव है, लेकिन उसकी शिपिंग लागत अधिक है।
  • रणनीतिक भंडार (Strategic Reserves) एक अस्थायी राहत दे सकते हैं।

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इज़रायल-ईरान युद्ध का होर्मुज जलडमरूमध्य पर क्या प्रभाव हो सकता है?

  • टैंकरों पर मिसाइल या ड्रोन हमले
  • जीपीएस जैमिंग या जहाजों का अपहरण
  • नौसैनिक बारूदी सुरंगें या सैन्य नाकाबंदी
  • व्यापारिक जहाजों की जब्ती

हालांकि ईरान ने अब तक इस जलमार्ग को पूरी तरह से बंद नहीं किया है (1980 के टैंकर युद्ध, 2011-12 का प्रतिबंध टकराव, या 2019 की US-ईरान तनातनी के समय), लेकिन आंशिक अवरोध की आशंका पूरी तरह से बनी हुई है।

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