'मैं एक गौरवशाली ब्रिटिश हिंदू हूं', गीता पर हाथ रखकर शपथ लेने वाले ऋषि सुनक का सनातन प्रेम जानिए
ब्रिटेन में प्रधानमंत्री पद के लिए वोटिंग चल रही है। अब तक हुए चार राउंड की गिनती के बाद अब महज 3 प्रत्याशी स्पर्धा में बाकी रह गए हैं। बीते लगातार चारों राउंड में ऋषि सुनक ने अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करायी है।
लंदन, 20 जुलाईः ब्रिटेन में प्रधानमंत्री पद के लिए वोटिंग चल रही है। अब तक हुए चार राउंड की गिनती के बाद अब महज 3 प्रत्याशी स्पर्धा में बाकी रह गए हैं। बीते लगातार चारों राउंड में ऋषि सुनक ने अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करायी है। ब्रिटेन में हो रहे इस चुनाव पर भारतीय लोगों की भी नजरें लगी हैं। एक भारतवंशी ब्रिटेन का पीएम हो सकता है इसे लेकर भारतीय लोग बेहद उत्साहित नजर आ रहे हैं।
तस्वीर- पीटीआई

सोशल मीडिया पर खूब हुआ चर्चित
जिन अंग्रेजों ने हम पर दो सौ सालों तक शासन किया, हमें गुलाम बनाकर रखा, आज उसी देश में गुलाम रहे देश से जुड़ा कोई व्यक्ति लोकतांत्रिक प्रक्रिया द्वारा शासक बनने के कगार पर खड़ा है। यह बेहद असाधारण बात है। ऐसे में हर कोई ऋषि सुनक के बारे में जानने को उत्सुक है। फिलहाल सुनक का एक बयान इस समय सोशल मीडिया पर फिर से वायरल हो रहा है। इस बयान के मुताबिक सुनक ने खुद को गौरवशाली हिन्दू बताया है।

गीता पर हाथ रखकर ली थी शपथ
गोल्डमैन सैक्स के पूर्व बैंकर रह चुके ऋषि सुनक को जब 2020 में ट्रेजरी का मुख्य सचिव बनाया गया, तब एक सांसद के रूप में अपनी शपथ के दौरान सुनक ने भगवत गीता पर हाथ रखकर शपथ ली थी। इस दौरान उन्होंने साबित किया वह अपनी विरासत को अपनाने से कतराते नहीं हैं। इस पर एक ब्रिटिश अखबार ने उनसे भगवत गीता पर हाथ रख शपथ लेने का कारण पूछा तो उन्होंने अपने ही अंदाज में इसका जवाब दिया।

ब्रिटिश नागरिक हूं मगर धर्म हिन्दू
ऋषि ने कहा, 'मैं अब ब्रिटेन का नागरिक हूं लेकिन मेरा धर्म हिंदू है। भारत मेरी धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत है। मैं गर्व से कह सकता हूं कि मैं एक हिंदू हूं और हिंदू होना ही मेरी पहचान है।' अपनी डेस्क पर भगवान गणेश की प्रतिमा रखने वाले सुनक धार्मिक आधार पर बीफ त्यागने की अपील भी कर चुके हैं। वो खुद भी बीफ नहीं खाते हैं।

गोल्डमैन शैक्स में कर चुके काम
ऋषि सुनक की पढ़ाई ब्रिटेन के विंचेस्टर कॉलेज से स्कूल से हुई है। यह देश के सबसे प्रतिष्ठित स्कूलों में शामिल है। इसके बाद ऋषि ऑक्सफोर्ड और अमेरिका की स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी पहुंचे और यहां से आगे की पढ़ाई पूरी की। राजनीति में आने से पहले उन्होंने गोल्डमैन शैक्स जैसी कुछ बहुचर्चित कंपनियों में काम किया था।

गुंजरावाला में हैं ऋषि की जड़ें
ऋषि सुनक का परिवार पंजाबी खत्री समुदाय से संबंध रखता है। ऋषि के दादा रामदास सुनक गुंजरावाला में रहते थे जो अभी पाकिस्तान का हिस्सा है। गुंजरावाला हिंदू-मुस्लिम के बीच संघर्ष चरम पर था ऐसे में रामदास ने सन् 1935 में गुंजरावाला छोड़ दिया और वो बेहतर जीवन की तलाश में केन्या की वर्तमान राजधानी नैरोबी आ गए। वहीं उनकी पत्नी सुहाग रानी सुनक, गुंजरावाला से दिल्ली आ गई थीं और उनके साथ उनकी सास भी थी। रामदास जब नैरोबी में कुछ जम गए तो उन्होंने अपने परिवार को वहां बुला लिया।

नैरोबी छोड़ पिता जा बसे लिवरपूल
रामदास नैरोबी में क्लर्क का काम करते थे। अपनी प्रतिभा के बलबूते वह वहां एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफिसर के पद पर भी पहुंचे। रामदास और सुहाग रानी के छह बच्चे थे जिसमें तीन बेटे और तीन बेटियां थीं। ऋषि के पिता यशवीर सुनक इनमें से ही एक थे। यशवीर सुनक का जन्म नैरोबी में सन् 1949 में हुआ था। साल 1966 में यशवीर नैरोबी से लिवरपूल आ गए। उन्होंने यहां लिवरपूल यूनिवर्सिटी से मेडिसिन की पढ़ाई की। फिलहाल वो साउथ हैंपटन में रहते हैं। वहीं रामदास सुनक की तीनों बेटियों ने भारत में ही पढ़ाई की है।












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