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Diplomacy: भारत-रूस कच्चा तेल कारोबार पर अमेरिका का नया वार, बाइडेन के नये पैंतरे से दिल्ली को होगा नुकसान?

Russia-India Crude Oil: यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद भारत और चीन, रिकॉर्ड मात्रा में रूसी तेल खरीद रहे हैं, जिसने राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को यूक्रेन के खिलाफ युद्ध को लगातार जारी रखने में मदद की है। वहीं, पश्चिमी देशों ने भारत के रूसी तेल खरीदने पर हमेशा से विरोध किया है, लेकिन भारत, लगातार रूसी तेल खरीदता रहा है।

वहीं एक बार फिर से, अमेरिका ने शुक्रवार को रूस के ऊर्जा उद्योग पर अभूतपूर्व प्रतिबंधों की घोषणा की है, ताकि रूस के खजाने पर गंभीर असर पड़े और वो यूक्रेन में युद्ध लड़ने के लिए फंड नहीं जुटा सके। अमेरिका ने रूस के खिलाफ नये प्रतिबंधों की उस वक्त घोषणा की है, जब उसने यूक्रेन को 500 मिलियन डॉलर का नया मिलिट्री पैकेज दिया है।

Russia-India Crude Oil

इस 500 मिलियन डॉलर के मिलिट्री पैकेज में यूक्रेन, अमेरिका से एयर डिफेंस सिस्टम मिसाइलें, हवा से जमीन पर मार करने वाले हथियार और एफ-16 लड़ाकू जेट के लिए सहायक उपकरण खरीद सकता है।

रूसी तेल कंपनियों के खिलाफ अमेरिका के नये प्रतिबंध (US impose oil sanctions on russia)

रिपोर्ट के मुताबिक, रूस के दो सबसे महत्वपूर्ण तेल उत्पादक और निर्यातक कंपनियां गजप्रोम नेफ्ट और सर्गुटनेफ्टेगास के अलावा, उनकी सहयोगी कंपनियों को अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के प्रतिबंध रोल में शामिल किया गया है। यानि, इन कंपनियों को ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है, जो रूस के लिए बहुत बड़ा झटका है।

इसके अलावा, अमेरिका ने रूस के साथ कारोबार करने वाले कई कारोबारियों को भी ब्लैकलिस्ट में डाल दिया है। जिनमें हांगकांग के दो व्यापारी, 34 रूस स्थित तेल क्षेत्र सेवाएं और 13 रूसी ऊर्जा अधिकारी शामिल हैं। गजप्रोम नेफ्ट के अध्यक्ष अलेक्सांद्र द्युकोव को भी ब्लैकलिस्ट किया गया है। अमेरिकी कोषागार विभाग के एक बयान के अनुसार, इन उपायों से रूसी तेल उत्पादन और वितरण श्रृंखला के हर चरण से जुड़े प्रतिबंधों के जोखिम में काफी वृद्धि होने की उम्मीद है।

अमेरिकी वित्ती मंत्री जेनेट येलेन ने कहा, कि "यूक्रेन के खिलाफ अपने क्रूर और अवैध युद्ध को वित्तपोषित करने के लिए रूस के राजस्व के प्रमुख स्रोत के खिलाफ संयुक्त राज्य अमेरिका व्यापक कार्रवाई कर रहा है।" उन्होंने कहा, कि "आज की कार्रवाइयों के साथ, हम रूस के तेल व्यापार से जुड़े प्रतिबंधों को बढ़ा रहे हैं, जिसमें रूस के तेल निर्यात के समर्थन में शिपिंग और वित्तीय सुविधा शामिल है।"

रूस को अरबों डॉलर का होगा नुकसान?

अमेरिका ने जो प्रतिबंध लगाए हैं, उसके बाद पेट्रोलियम उत्पादन में जरूरी एक्सपर्ट्स की सुविधाएं भी रूस हासिल नहीं कर सकता है। कच्चे तेल को रूस के लिए सबसे बड़ा फंड जुटाने का स्रोत माना जाता है और व्हाइट हाउस ये मान रहा है, कि नये प्रतिबंध लगने के बाद रूस के लिए कच्चे तेल का निर्यात और भी ज्यादा मुश्किल होगा, जिससे रूबल और कमजोर हो जाएगा और रूस की अर्थव्यवस्था पर दबाव पड़ेगा।

साउथ चायना मॉर्निंग पोस्ट के मुताबिक, एक अमेरिकी अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा है, कि अगर प्रतिबंधों को ठीक से लागू किया जाता है, तो इससे रूस के राजस्व में कमी आ सकती है और हर महीने रूस को अरबों डॉलर का नुकसान हो सकता है।

अमेरिकी अधिकारी ने कहा, कि "इसका मकसद, एक निरर्थक युद्ध को जारी रखने की लागत के बारे में पुतिन के गणित को बदलना है, लेकिन साथ ही यूक्रेन को और ज्यादा लाभ देना है। वह लाभ जिसकी उसे न्यायपूर्ण और स्थायी शांति के लिए बातचीत करने की आवश्यकता है।"

शुक्रवार को प्रतिबंधों का पैकेज नवंबर में अंतरराष्ट्रीय संबंधों वाले रूसी बैंकों पर कठोर वित्तीय प्रतिबंध लगाने के बाद आया और डोनाल्ड ट्रम्प के शपथ ग्रहण से 10 दिन पहले आया है, जिन्होंने यूक्रेन में संघर्ष को जल्दी खत्म करने की कसम खाई है। बाइडेन प्रशासन के अधिकारियों ने कहा है, कि यह नए ट्रंप प्रशासन पर निर्भर करेगा, कि वह नए प्रतिबंधों को बनाए रखे या खत्म करे।

प्रतिबंधों का क्रूड ऑयल बाजार में क्या हुआ असर?

अमेरिका के प्रतिबंध लगाने से पहले, जहां वैश्विक तेल की कीमतों में 3 प्रतिशत से ज्यादा का इजाफा हो हुआ था, वहीं यूरोप और एशिया के व्यापारियों के बीच संभावित प्रतिबंधों की खबर फैलने के फौरन बाद, 7 अक्टूबर के बाद पहली बार ब्रेंट क्रूड 80 डॉलर प्रति बैरल से नीचे चला गया।

हालांकि, पश्चिमी देशों की तरफ से लगाए गए प्रतिबंधों के बावजूद, रूस की अर्थव्यवस्था पिछले साल से मजबूत दिख रही थी। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है, कि नवीनतम प्रतिबंध रूसी तेल के सबसे बड़े खरीदारों को किस हद तक रोकेंगे, जिनमें चीन, भारत, तुर्की और ब्राजील जैसे देश शामिल हैं, जो रिकॉर्ड मात्रा में खरीद रहे हैं।

मॉस्को के आंकड़ों के अनुसार, रूस ने 2023 में चीन को 107 मिलियन टन तेल निर्यात किया, जिससे यह एशियाई दिग्गज का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता बन गया।

इसके अलावा, चीन अपने रूसी गैस और तेल के लिए युआन में भुगतान करता है। मई में बीजिंग की अपनी यात्रा के दौरान, पुतिन ने कहा था, कि दोनों देशों के बीच सभी लेन-देन का 90 प्रतिशत रूबल और युआन में किया गया था।

वहीं, भारत, जो अब रूसी कच्चे तेल का सबसे बड़ा आयातक है, उसने भी रुपये या अन्य मुद्राओं में भुगतान करना शुरू कर दिया है, जो अमेरिकी डॉलर के विपरीत, रूस पर लगाए गए पश्चिमी प्रतिबंधों को दरकिनार करते हैं। नई दिल्ली और मॉस्को कथित तौर पर रुपया-रूबल मुद्रा व्यवस्था की संभावना तलाश रहे हैं जो ऊर्जा और अन्य मौजूदा व्यापार के लिए भुगतान की सुविधा प्रदान करेगी।

हालांकि, अमेरिकी अधिकारी ने इस बात से इनकार किया है, कि शुक्रवार को जिन प्रतिबंधों की घोषणा की गई है, वो किसी देश को निशाना बनाकर किए गये हैं, लेकिन उन्होंने कहा, कि वे रूस के ऊर्जा ग्राहकों को बेहतर कीमतों पर बातचीत करने या अमेरिका, कनाडा या मध्य पूर्व जैसे अन्य उत्पादकों से विकल्प तलाशने की अनुमति दे सकते हैं।

मॉस्को ने कहा है, कि पश्चिमी प्रतिबंधों और कम वैश्विक कीमतों के बावजूद, उसके तेल और गैस राजस्व में वृद्धि जारी रही है, जिससे 2024 के पहले 11 महीनों में संघीय बजट में 10.34 ट्रिलियन रूबल (102.8 बिलियन अमेरिकी डॉलर) आए हैं, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 25.7 प्रतिशत ज्यादा है।

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