Hormuz Toll System: होर्मुज से एक बार निकलने का 19 करोड़ चुका रहे शिप, शुरू हुई टोल सर्विस, भारत कितना दे रहा?
Hormuz Toll System: मिडिल ईस्ट के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक होर्मुज स्ट्रेट (Hormuz Strait) एक बार फिर चर्चा में है। तेहरान से आई एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों से टोल वसूला जा रहा है। दावा किया गया है कि हर जहाज से करीब 1.5 मिलियन डॉलर से 2 मिलियन डॉलर तक की रकम ली जा रही है। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी फार्स न्यूज (Fars News Agency) के मुताबिक, यह जानकारी ईरानी संसद सदस्य मोहसिन जंगनेह (Mohsen Zanganeh) ने दी है। हालांकि अभी तक अमेरिका या किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय संगठन ने इन दावों की पुष्टि नहीं की है। बावजूद इसके कई देशों द्वारा टोल चुकाए जाने की खबर सामने आ रही है।
किसकी निगरानी में लिया जा रहा टोल?
रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका ने इस कथित टोल व्यवस्था की पुष्टि नहीं की है। हालांकि वॉशिंगटन लंबे समय से होर्मुज स्ट्रेट पर किसी भी प्रकार के टोल या कंट्रोल का विरोध करता रहा है। बताया जा रहा है कि ईरान इस व्यवस्था को अपने अर्थव्यवस्था मंत्रालय (Ministry of Economy) के सहयोग से लागू कर रहा है। यह पूरा ढांचा ईरान की Supreme National Security Council की निगरानी में काम कर रहा है।

सिर्फ नकद नहीं, कई तरीकों से लिया जा रहा है भुगतान
रिपोर्ट में कहा गया है कि टोल की रकम सिर्फ नकद में नहीं ली जा रही। ईरान ने भुगतान के लिए कई विकल्प खुले रखे हैं ताकि अलग-अलग देशों और कंपनियों के लिए भुगतान आसान बनाया जा सके। बताए गए भुगतान के तरीकों में नकद भुगतान, वस्तुओं और सेवाओं के बदले भुगतान, टीथर (USDT) जैसी क्रिप्टोकरेंसी और वस्तु विनिमय यानी बार्टर सिस्टम शामिल हैं। इसका मतलब है कि जहाज संचालक या संबंधित कंपनियां अपनी सुविधा के मुताबिक अलग-अलग माध्यमों से भुगतान कर सकती हैं।
सरकारी खजाने में जमा हो रही है रकम
रिपोर्ट के मुताबिक, टोल से मिलने वाली पूरी रकम सरकारी खजाने में जमा की जा रही है। इसके बाद इसे बजट प्रावधानों के मुताबिक विभिन्न सरकारी योजनाओं और जरूरतों पर खर्च किया जाएगा। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की व्यवस्था का ढांचा पहले से तैयार किया गया था। इसका मकसद समुद्री सुरक्षा को मजबूत करना और पर्यावरण को बचाने से जुड़े खर्चों को पूरा करना बताया जा रहा है।
ईरान को हो सकती है अरबों डॉलर की कमाई
ईरान के सरकारी मीडिया नेटवर्क प्रेस टीवी (Press TV) के मुताबिक, यह कदम आर्थिक रूप से बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है। रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि इस व्यवस्था से ईरान को सालाना करीब 7.5 अरब डॉलर तक की आय हो सकती है। यही वजह है कि इसे तेहरान की बड़ी आर्थिक रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
होर्मुज बंद होने पर दुनिया को कितना नुकसान?
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में गिना जाता है। यदि यह रास्ता पूरी तरह बंद हो जाए तो पूरी दुनिया के तेल बाजार पर बड़ा असर पड़ सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, ऐसी स्थिति में रोजाना लगभग 1.6 करोड़ बैरल तेल वैश्विक बाजार से बाहर हो सकता है। इससे तेल की कीमतों में भारी उछाल आने और कई देशों की ऊर्जा सुरक्षा प्रभावित होने का खतरा पैदा हो सकता है।
दुनिया के 20% तेल का रास्ता है होर्मुज
होर्मुज स्ट्रेट की अहमियत इस बात से समझी जा सकती है कि दुनिया के कुल समुद्री तेल व्यापार का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता रहा है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद ईरान ने इस मार्ग को बंद कर दिया था। इसके चलते कई देशों को आर्थिक और ऊर्जा संबंधी नुकसान झेलना पड़ा।
ईरान ने बनाया नया समुद्री एसोसिएशन
रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने हाल ही में एक नया संस्थान भी बनाया है, जिसका नाम "फारसी खाड़ी स्ट्रेट एसोसिएशन" (Persian Gulf Strait Authority) रखा गया है। इस संस्था का काम जहाजों और उनके कार्गो की जांच करना बताया जा रहा है। साथ ही यह समुद्री गतिविधियों की निगरानी और सुरक्षा से जुड़े मामलों को भी संभालेगी। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि यह प्राधिकरण उन देशों के जहाजों पर विशेष नजर रख रहा है जिन्हें ईरान अपना विरोधी मानता है।
भारतीय जहाजों को लेकर क्या स्थिति है?
फिलहाल भारतीय जहाजों के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। अभी तक यह पुष्टि नहीं हुई है कि भारत के जहाज इस कथित टोल का भुगतान कर रहे हैं या नहीं। ईरानी अधिकारियों की ओर से पहले यह संकेत दिया गया था कि किसी भी देश को विशेष छूट नहीं दी जाएगी। लेकिन भारत को लेकर कोई आधिकारिक बयान सार्वजनिक नहीं किया गया है।
अमेरिका और ईरान आमने-सामने
रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिका ने उन कंपनियों और देशों को चेतावनी दी है जो इस तरह के टोल भुगतान में शामिल हो सकते हैं। दूसरी ओर, ईरान अपने रुख पर कायम दिखाई दे रहा है। तेहरान का कहना है कि यदि अमेरिका और उसके सहयोगियों की ओर से हमलों या दबाव का खतरा कम होता है और प्रतिबंधों में राहत दी जाती है, तो कुछ शर्तों पर विचार किया जा सकता है।
ईरान ने रखीं अपनी शर्तें
ईरान ने साफ संकेत दिया है कि वह अपनी सुरक्षा और रणनीतिक हितों को प्राथमिकता देगा। साथ ही उसने यह भी कहा है कि जिन देशों को वह विरोधी मानता है, उनके जहाजों के प्रति सख्त रवैया जारी रह सकता है। तेहरान का मानना है कि क्षेत्र की परिस्थितियां अब युद्ध से पहले जैसी नहीं हैं। इसलिए समुद्री सुरक्षा और आवाजाही से जुड़े नियमों में भी बदलाव स्वाभाविक हैं।
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