Netanyahu Trump Clash: टूट रही है ट्रंप-नेतन्याहू की जोड़ी? ईरान-लेबनान विवाद पर बढ़ी दरार, अब क्या आया सामने?
Netanyahu Trump Clash: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू लंबे समय से कई बड़े अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर एक-दूसरे के करीबी सहयोगी माने जाते रहे हैं। खासतौर पर ईरान को लेकर दोनों नेताओं के बीच लगातार गठजोड़ देखा गया है। लेकिन अब हाल में हुई कहा-सुनी इशारा कर रही है कि दोनों नेताओं के बीच मतभेद होने लगे हैं। खासकर लेबनान और ईरान से जुड़े मामलों ने दोनों के रिश्तों को नई परीक्षा के दौर में ला खड़ा किया है।
लेबनान विवाद ने बाहर लाए मतभेद
हाल के दिनों में लेबनान को लेकर ट्रंप और नेतन्याहू के बीच तनाव की खबरें सामने आई हैं। भले ही दोनों नेता ईरान के मुद्दे पर लगातार बातचीत करते रहे हों और लगभग रोज संपर्क में रहते हों, लेकिन दोनों पक्षों के अधिकारियों को पहले से अंदेशा था कि एक समय ऐसा आ सकता है जब उनके रणनीतिक हित और राजनीतिक लक्ष्य अलग-अलग दिशा में जा सकते हैं।

अब इजरायली राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि शायद वह समय आ चुका है। खुद नेतन्याहू ने माना कि ईरान के साथ जारी युद्ध का अंत किस तरह होगा, इस मुद्दे पर वह और ट्रंप पूरी तरह एकमत हैं या नहीं, यह अभी भी एक खुला सवाल बना हुआ है।
चुनावी दबाव में हैं नेतन्याहू
इजरायल में संभावित चुनाव अक्टूबर तक हो सकते हैं। ऐसे में नेतन्याहू पर राजनीतिक दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। वह अभी तक हमास को पूरी तरह खत्म करने या ईरान में सत्ता परिवर्तन से जुड़े अपने बड़े वादों को पूरा नहीं कर पाए हैं। इसके अलावा हिजबुल्लाह की ओर से लगातार होने वाले हमलों को लेकर भी उन्हें घरेलू आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है। जब भी सीमा क्षेत्रों में ड्रोन या मिसाइल हमलों की चेतावनी देने वाले सायरन बजते हैं, तब नेतन्याहू पर जवाबी कार्रवाई करने का राजनीतिक दबाव और अधिक बढ़ जाता है।
बेरूत पर बड़े हमले की योजना पर ट्रंप ने लगाई रोक
इसी माहौल में नेतन्याहू ने लेबनान की राजधानी बेरूत में हिजबुल्लाह के ठिकानों पर बड़े सैन्य हमले करने की बात कही थी। लेकिन रिपोर्ट्स के मुताबिक ट्रंप ने इस योजना का समर्थन नहीं किया।
बताया जा रहा है कि ट्रंप फिलहाल लेबनान में तनाव बढ़ाने के बजाय ईरान के साथ किसी संभावित समझौते को ज्यादा प्राथमिकता दे रहे हैं। सोमवार को दोनों नेताओं के बीच हुई फोन बातचीत के दौरान ट्रंप ने नेतन्याहू से कड़ी नाराजगी जताई और कथित तौर पर बेरूत पर हमले की योजना को रोकने के लिए कहा। इस खबर के सामने आने के बाद इजरायल की राजनीति में भी नई बहस शुरू हो गई।
विपक्ष और सहयोगियों ने भी साधा निशाना
इस घटनाक्रम के बाद नेतन्याहू के राजनीतिक विरोधियों के साथ-साथ उनके कुछ कट्टरपंथी सहयोगियों ने भी उन पर निशाना साधा। आलोचकों का आरोप है कि नेतन्याहू ने इजरायल को अमेरिका का "पिछलग्गू" बना दिया है या फिर ट्रंप के दबाव में इजरायल की रणनीतिक स्वतंत्रता से समझौता किया है। इन आरोपों ने नेतन्याहू की राजनीतिक मुश्किलों को और बढ़ा दिया है, खासकर ऐसे समय में जब वह पहले से कई मोर्चों पर दबाव झेल रहे हैं।
फोन कॉल को बताया गया बेहद तनावपूर्ण
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप और नेतन्याहू के बीच यह बातचीत ऐसे समय हुई जब ईरान ने चेतावनी दी थी कि यदि लेबनान में इजरायली कार्रवाई जारी रहती है तो वह अमेरिका के साथ चल रही बातचीत छोड़ सकता है और इजरायल पर मिसाइल हमले भी कर सकता है।
एक इजरायली सूत्र के मुताबिक यह फोन कॉल बेहद तनावपूर्ण थी। सूत्र ने दावा किया कि ट्रंप ने नेतन्याहू को कड़ी फटकार लगाई और कहा कि वह तुरंत बेरूत पर हमले की योजना से पीछे हटें ताकि क्षेत्रीय तनाव और अधिक न बढ़े तथा ईरान के साथ बातचीत की संभावना बनी रहे।
ट्रंप के साथ रिश्तों पर क्या बोले नेतन्याहू?
नेतन्याहू ने उन रिपोर्टों का सीधा खंडन नहीं किया जिनमें कहा गया था कि ट्रंप ने उन्हें "पागल" कहा या यह टिप्पणी की कि ट्रंप के समर्थन के बिना वह जेल में होते।
हालांकि, उन्होंने अमेरिकी मीडिया से बातचीत में कहा कि उनके और ट्रंप के बीच पहले भी कई मुद्दों पर बहस होती रही है, लेकिन इससे उनकी साझेदारी पर कोई असर नहीं पड़ा। दूसरी ओर ट्रंप ने भी मीडिया से बातचीत में कहा कि वह नेतन्याहू को पसंद करते हैं और दोनों ने लंबे समय तक साथ काम किया है।
ईरान युद्ध को लेकर सबसे बड़ा मतभेद
विश्लेषकों का मानना है कि असली विवाद सिर्फ लेबनान तक सीमित नहीं है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप और नेतन्याहू के बीच सबसे बड़ा मतभेद ईरान से जुड़े युद्ध और उसके भविष्य को लेकर है।
अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक ट्रंप संघर्ष को समाप्त करना चाहते हैं, जबकि नेतन्याहू का रुख अधिक आक्रामक माना जा रहा है। एक अमेरिकी अधिकारी ने यहां तक कहा कि "कभी-कभी बिबी (नेतन्याहू) यह नहीं जानते कि कब रुकना है।"
क्यों बढ़ रही हैं नेतन्याहू की चिंताएं?
विश्लेषकों का कहना है कि नेतन्याहू ने जिस तेजी से बेरूत हमले की योजना को छोड़ा और ट्रंप के साथ किसी भी तरह की दरार की खबरों को कम करने की कोशिश की, उससे साफ संकेत मिलता है कि अमेरिकी समर्थन उनके लिए कितना महत्वपूर्ण है।
इजरायली राजनीतिक सूत्रों का दावा है कि नेतन्याहू को चिंता है कि अमेरिका भविष्य में लेबनान में इजरायल की सैन्य कार्रवाई पर और अधिक सख्त शर्तें लगा सकता है। यदि ऐसा होता है तो इजरायल की सैन्य रणनीति पर सीधा असर पड़ सकता है।
युद्धविराम की नई कोशिश
इस बीच वाशिंगटन में इजरायल और लेबनान के प्रतिनिधियों के बीच दो दिन तक चली बातचीत के बाद एक संभावित युद्धविराम योजना की घोषणा की गई है। यह योजना हिजबुल्लाह द्वारा कुछ शर्तें मानने पर आधारित बताई जा रही है।
हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि हिजबुल्लाह इन नई शर्तों को स्वीकार करेगा या नहीं। यदि युद्धविराम सफल नहीं होता और हमले जारी रहते हैं, तो भविष्य में हालात फिर से बिगड़ सकते हैं।
क्या ट्रंप को मना पाएंगे नेतन्याहू?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हिजबुल्लाह की ओर से इजरायल पर हमले जारी रहते हैं, तो नेतन्याहू भविष्य में ट्रंप को बेरूत पर बड़े हमलों की अनुमति देने के लिए मनाने की कोशिश कर सकते हैं।
हालांकि फिलहाल ट्रंप का ध्यान ईरान के साथ किसी संभावित समझौते पर है। उन्होंने संकेत दिया है कि वह इजरायल-हिजबुल्लाह संघर्ष को ईरान से जुड़े व्यापक मुद्दे से अलग रखने की कोशिश कर रहे हैं और उन्हें उम्मीद है कि ईरान के साथ समझौते की दिशा में जल्द प्रगति हो सकती है।
नेतन्याहू के सामने दोहरी चुनौती
यह पूरी घटना दिखाती कि नेतन्याहू एक मुश्किल राजनीतिक और रणनीतिक स्थिति में फंसे हुए हैं। एक तरफ उन्हें देश के भीतर सुरक्षा को लेकर सख्त रुख दिखाना है, जबकि दूसरी ओर उन्हें अपने सबसे महत्वपूर्ण सहयोगी अमेरिका और ट्रंप प्रशासन के साथ भी तालमेल बनाए रखना है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि लेबनान और ईरान को लेकर दोनों नेताओं के बीच मतभेद आगे चलकर मिडिल ईस्ट की राजनीति पर बड़ा असर डाल सकते हैं। लेकिन चुनावों से कुछ महीने पहले नेतन्याहू के लिए ट्रंप से खुला टकराव मोल लेना बेहद मुश्किल दिखाई देता है।
इस खबर पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट में बताएं।
















Click it and Unblock the Notifications