Video: खालिस्तानियों ने फिर मनाया इंदिरा गांधी की हत्या का जश्न, निकाली झांकी, क्या करेगी कार्नी सरकार?
Canada Anti India Protest: कनाडा के ब्रैम्पटन शहर में आयोजित एक परेड के दौरान एक विवादित झांकी सामने आई, जिसने एक बार फिर भारत और कनाडा से जुड़े राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों को चर्चा में ला दिया। इस झांकी में भारत की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या से जुड़ी झांकी दिखाई गई। ब्रैम्पटन कनाडा का ऐसा शहर है जहां सिख समुदाय की बड़ी आबादी रहती है। अनुमान के मुताबिक, शहर की कुल आबादी में करीब 25 प्रतिशत लोग सिख समुदाय से आते हैं। यही वजह है कि यहां आयोजित होने वाले धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों पर अक्सर लोगों की खास नजर रहती है।
इंदिरा गांधी की हत्या और खालिस्तानियों का संबंध
भारत की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या 31 अक्टूबर 1984 को हुई थी। उनकी हत्या उनके ही दो सिख सुरक्षाकर्मियों ने गोली मारकर की थी। ये दोनों सुरक्षाकर्मी सतबंत और बेयंत खालिस्तानी उग्रवादियों से इन्फ्लुएंस हो गए थे। इस घटना को जून 1984 में हुए ऑपरेशन ब्लू स्टार का बदला माना जाता है। इंदिरा गांधी ने ही उस सैन्य अभियान को मंजूरी दी थी, जिसके बाद पूरे देश में सिख विरोधी दंगे भड़क गए थे।

क्या था ऑपरेशन ब्लू स्टार?
जून 1984 में भारतीय सेना ने ऑपरेशन ब्लू स्टार चलाया था। यह सैन्य अभियान अमृतसर स्थित स्वर्ण मंदिर परिसर में किया गया था, जिसे सिख धर्म का सबसे पवित्र धार्मिक स्थल माना जाता है। इस ऑपरेशन का मुख्य उद्देश्य खालिस्तान समर्थक नेता जरनैल सिंह भिंडरावाले को पकड़ना था। उस समय भिंडरावाले और उनके समर्थक स्वर्ण मंदिर परिसर में मौजूद थे। ऑपरेशन के दौरान भारतीय सेना और उग्रवादियों के बीच संघर्ष हुआ, जिसमें 6 जून 1984 को भिंडरावाले की मौत हो गई थी।
कौन था जरनैल सिंह भिंडरावाले?
1980 के दशक की शुरुआत में जरनैल सिंह भिंडरावाले पंजाब की राजनीति और अलगाववादी आंदोलन का प्रमुख चेहरा बन चुका था। वह पंजाब में एक अलग सिख राष्ट्र 'खालिस्तान' की मांग का समर्थन कर रहा था। इसी कारण वे भारत सरकार और सुरक्षा एजेंसियों के निशाने पर थे। बाद में ऑपरेशन ब्लू स्टार के दौरान उसकी मौत हो गई, लेकिन उसका नाम आज भी खालिस्तान आंदोलन से जुड़ी चर्चाओं में प्रमुखता से लिया जाता है।
विवादित झांकियों को लेकर पहले भी उठ चुके हैं सवाल
कनाडा में पिछले कुछ सालों के दौरान ऐसी कई झांकियां और प्रदर्शन देखने को मिले हैं, जिनमें इंदिरा गांधी की हत्या को दिखाया गया या उसका महिमामंडन करने का आरोप लगाया गया। ब्रैम्पटन समेत कनाडा के कई शहरों में ऐसे कार्यक्रम आयोजित हुए हैं। इन कार्यक्रमों को लेकर अक्सर विवाद खड़ा हो जाता है और भारत में भी इनकी आलोचना होती रही है। ऐसे प्रदर्शन ऐतिहासिक घटनाओं को एकतरफा तरीके से पेश करते हैं और समाज में विभाजन को बढ़ावा दे सकते हैं।
एस जयशंकर ने भी जताई थी नाराजगी
पिछले साल भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी इस तरह की घटनाओं पर प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने कहा था कि कनाडा में कुछ राजनीतिक दल वोट बैंक की राजनीति के कारण अलगाववादी विचारधाराओं को जगह दे रहे हैं। उनके मुताबिक, ऐसे तत्वों को बढ़ावा देना न केवल गलत है बल्कि यह भारत और कनाडा के द्विपक्षीय संबंधों के लिए भी अच्छा संकेत नहीं है। जयशंकर ने साफ कहा था कि किसी भी देश को चरमपंथी और अलगाववादी गतिविधियों को प्रोत्साहन नहीं देना चाहिए।
कनाडा में कितना बड़ा है सिख समुदाय?
कनाडा में भारतीय मूल के लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है और सिख समुदाय वहां की सबसे प्रभावशाली आबादियों में से एक माना जाता है। 2021 की कनाडाई जनगणना के अनुसार, पूरे देश की आबादी में सिख समुदाय की हिस्सेदारी लगभग 2.1 प्रतिशत थी। हालांकि ब्रैम्पटन जैसे शहरों में यह प्रतिशत राष्ट्रीय औसत से काफी अधिक है। ब्रैम्पटन का सिख समुदाय स्थानीय राजनीति, सामाजिक संगठनों और सांस्कृतिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाता है। यही कारण है कि वहां होने वाले कार्यक्रम अक्सर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बन जाते हैं।
क्यों होता है यह विवाद?
ब्रैम्पटन में दिखाई गई यह झांकी सिर्फ एक स्थानीय कार्यक्रम का हिस्सा नहीं रही, बल्कि इसने एक बार फिर खालिस्तान आंदोलन, ऑपरेशन ब्लू स्टार, इंदिरा गांधी की हत्या और भारत-कनाडा संबंधों से जुड़े पुराने विवादों को चर्चा में ला दिया है। जहां कुछ लोग इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हिस्सा मानते हैं, वहीं कई लोग इसे एक संवेदनशील ऐतिहासिक घटना का महिमामंडन बताते हैं। इसके साथ ही कनाडा के पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो का इन हरकतों को मौन समर्थन हासिल था लेकिन मार्क कार्नी के प्रधानमंत्री बनने के बाद इन घटनाओं पर लगाम लगा है। इसलिए उनके कार्यकाल में ऐसी घटना होना हैरानी की बात है।
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