Mamata की TMC में भूकंप! 20 बागी सांसद NDA में जाने को एकजुट, ओम बिरला को पत्र लिखा, लिस्ट में कौन-कौन दिग्गज?
Mamata Banerjee TMC Bagawat: तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में आंतरिक विद्रोह अब चरम पर पहुंच गया है। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में भारी हार के बाद पार्टी के करीब 20 लोकसभा सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) में शामिल होने की इच्छा जताई है। इन सांसदों ने अभिषेक बनर्जी को संसदीय दल का नेता स्वीकार करने से इनकार कर दिया है। यह घटनाक्रम ममता बनर्जी के नेतृत्व के लिए अब तक की सबसे बड़ी चुनौती बन गया है।
सोमवार (8 जून) को केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के दिल्ली आवास पर हुई बैठक में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंद्र अधिकारी भी मौजूद रहे। इसी बैठक में टीएमसी संसदीय दल तोड़ने की रणनीति को अंतिम रूप दिया गया माना जा रहा है। अगर यह विद्रोह सफल हुआ तो टीएमसी की लोकसभा ताकत आधी से भी कम रह जाएगी और बंगाल की राजनीति पूरी तरह बदल सकती है।

चुनाव हारीं, अब दल बचाने में भी ममता की हार
2026 के विधानसभा चुनावों में टीएमसी को करारी हार मिली। भाजपा ने भारी बहुमत से सरकार बनाई और सुवेंद्र अधिकारी मुख्यमंत्री बने। ममता बनर्जी खुद अपनी सीट भबानीपुर से हार गईं। इस हार के बाद पार्टी में असंतोष फूट पड़ा। पुराने और वरिष्ठ नेताओं को किनारे किए जाने, परिवारवाद, भ्रष्टाचार के आरोप और चुनावी रणनीति की नाकामी को लेकर नाराजगी बढ़ गई।
इसी बीच, टीएमसी के 20 सांसदों ने एकजुट होकर लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र सौंपा। पत्र में उन्होंने अलग ग्रुपिंग (Separate Grouping) की मांग की और एनडीए में शामिल होने की इच्छा जताई। सूत्रों के अनुसार, काकोली घोष दस्तीदार इस विद्रोही गुट का नेतृत्व कर रही हैं।
बैठक में कौन-कौन शामिल? विद्रोही सांसदों की लिस्ट
भूपेंद्र यादव के आवास पर हुई बैठक में शामिल प्रमुख सांसद:
- काकोली घोष दस्तीदार (बारासात) - विद्रोह का चेहरा, हाल ही में चीफ व्हिप पद से हटाई गईं। लेकिन, बागी गुट ने उन्हें यह पद वापस दिया।
- प्रसून बनर्जी (हावड़ा)
- शताब्दी रॉय (बीरभूम)
- असित माल (बोलपुर)
- बापी हलदार (मथुरापुर)
- जून मालिया (मेदिनीपुर)
- जगदीश चंद्र बसुनिया (कूच बिहार)
- कालीपद सोरेन (झाड़ग्राम)
- अरूप चक्रवर्ती (बांकुरा)
- पार्थ भौमिक (बैरकपुर)
- शर्मिला सरकार (बर्धमान पूर्व)
- सुखेंदु शेखर रॉय - हाल ही में राज्यसभा से इस्तीफा दिया।
ये सांसद उत्तर बंगाल, जंगल महल और दक्षिण बंगाल के विभिन्न क्षेत्रों से आते हैं, जहां भाजपा ने अच्छी बढ़त बनाई थी। सूत्र बताते हैं कि और भी सांसद इस गुट से संपर्क में हैं।
विद्रोह का बेस क्या है?
- विधानसभा चुनाव 2026: भाजपा को 208 सीटें, टीएमसी को मात्र 80 सीटें। यह टीएमसी के 15 साल के शासन का अंत था।
- पार्टी में परिवारवाद: अभिषेक बनर्जी पर एकाधिकार और वरिष्ठ नेताओं की उपेक्षा के आरोप।
- काकोली घोष का असंतोष: चीफ व्हिप पद से हटाए जाने और पार्टी की चुनावी रणनीति (I-PAC) पर खुला हमला।
- सुखेंदु शेखर रॉय का इस्तीफा: राज्यसभा से इस्तीफा देकर विद्रोह को बल मिला।
- भूपेंद्र यादव आवास बैठक: सुवेंद्र अधिकारी की मौजूदगी ने एनडीए कनेक्शन को मजबूत किया।
ममता बनर्जी INDIA ब्लॉक की बैठक के लिए दिल्ली पहुंची थीं, उसी दौरान विद्रोही सांसदों ने अपना मोर्चा खोल दिया।
क्या सांसद एनडीए में शामिल होंगे?
विद्रोही सांसद अभी अलग संसदीय दल का दर्जा चाहते हैं। लेकिन कई सांसद भाजपा और सुवेंद्र अधिकारी से संपर्क में हैं। अगर दो-तिहाई बहुमत (करीब 19 सांसद) जुट गया तो वे बिना अयोग्य ठहरे नया दल बना सकते हैं। भविष्य में भाजपा या एनडीए में विलय की संभावना प्रबल है। पश्चिम बंगाल में भाजपा सरकार होने से क्रॉस-वोटिंग और समर्थन आसान हो जाएगा। राजनीतिक विश्लेषक इसे 'ऑपरेशन लोटस 2.0' बता रहे हैं।
आगे क्या होगा? क्या होगी संसदीय प्रक्रिया?
लोकसभा नियमों के तहत स्पीकर ओम बिरला पत्र पर विचार करेंगे। अगर अलग ग्रुपिंग मंजूर हुई तो विद्रोही सांसदों को नया लीडर चुनने का अधिकार मिल जाएगा। बड़े पैमाने पर इस्तीफे की स्थिति में उपचुनाव होंगे, जो टीएमसी के लिए और घातक साबित हो सकते हैं।
Bengal Political Crisis: टीएमसी का सबसे गंभीर संकट
20 बागी सांसदों द्वारा ओम बिरला को पत्र लिखना टीएमसी के लिए टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है। यह सिर्फ सीटों की लड़ाई नहीं, बल्कि पार्टी के भविष्य, नेतृत्व और संगठनात्मक ढांचे की लड़ाई है। ममता बनर्जी अगर इस विद्रोह को कुशलता से संभाल लेती हैं तो उनका राजनीतिक करिश्मा एक बार फिर साबित होगा। लेकिन अगर विद्रोह बढ़ता गया तो पश्चिम बंगाल में टीएमसी का अस्तित्व स्वयं खतरे में पड़ सकता है। पूरी नजर अब ओम बिरला के फैसले, ममता की रणनीति और विद्रोही सांसदों के अगले कदम पर है। बंगाल की राजनीति में एक नया अध्याय शुरू हो चुका है।













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