वामपंथ के खूनी इतिहास को धोने की कोशिश, 'तियानमेन स्टैच्यू' हटाने से सच नहीं बदलेगा शी जिनपिंग
चीन की कम्युनिस्ट पार्टी ने हांगकांग के विश्वविद्यालयों से तियानमेन स्क्वायर की याद में बनाई गई प्रतिमाओं को हटा दिया है।
बीजिंग, दिसंबर 27: इन दिनों चीन में वामपंथ के रक्तरंजित इतिहास को धोने की कोशिश की जा रही है और इसके अगुआ है चीन के तानाशाह वामपंथी राष्ट्रपति शी जिनपिंग। भारत जैसे देश में लोकतंत्र की बात करने वाले वामपंथ का ये चीनी चेहरा है, जहां बोलने की आजादी की बात भी करने वालों की जीभ खींच ली जाती है और हांगकांग में शी जिनपिंग ऐसा ही कर रहे हैं। तियानमेन स्क्वायर में कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा किए गये नरसंहार की याद में बने उन मूर्तियों को हटाया जा रहा है, जो वामपंथी सरकार के खूनी हाथों की तस्दीक करते हैं।

तियानमेन की यादों को मिटाने की कोशिश
हांगकांग पर अब जबकि, चीन ने कब्जा कर लिया है, तो अब चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की सरकार हर उस खूनी इतिहास को मिटाने की कोशिश कर रही है, जो उसके माथे पर कलंक जैसा है। कम्युनिस्ट पार्टी ने दो और हांगकांग के विश्वविद्यालयों से तियानमेन स्क्वायर नरसंहार की याद में स्मारकों को हटवा दिया है और वजह साफ है, चीन नहीं चाहता कि, हांगकांग में राजनीतिक असंतोष को फैलने दिया जाए, लिहाजा वो नकेल और कसता जा रहा है। हांगकांग के चीनी विश्वविद्यालय ने लोकतंत्र की देवी की प्रतिमा को भी तोड़ दिया है, और पास के लिंगन विश्वविद्यालय से भी लोकतंत्र की निशानी वाली प्रतिमा को तोड़कर हटा दिया गया है।

नरसंहार की हर याद को हटाएगा चीन
पिछले हफ्ते हांगकांग विश्वविद्यालय ने बीजिंग में छात्रों के 1989 के नरसंहार को चिह्नित करते हुए 'शर्म के स्तंभ' को हटा दिया था। लोकतंत्र की देवी की प्रतिमा को तियानमेन स्क्वायर के आसपास, जहां हजारों छात्रों को चीन की कम्युनिस्ट पार्टी ने एक रात में मारकर गिरा दिया था, उसकी याद में बनाए गई मूर्ति को तोड़कर हटा दिया गया है। वो जगह जहां चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के सैनिकों ने 10 हजार से ज्यादा प्रदर्शनकारी छात्रों को मौत के घाट उतार दिया था, उस जगह पर उन छात्रों की याद में जो भी निशानियां तैयार की गईं थीं, उन्हें हटा दिया गया है।

जोखिम में सुरक्षा
अब जबकि हांगकांग पर चीन का प्रशासन पूरी तरह से सख्ती बरत चुका है, तो तियानमेन स्क्वायर नरसंहार की याद में बनाए गये प्रतिमा को हटाने के बाद हांगकांग में चीनी विश्वविद्यालय ने कहा कि, उसने प्रतिमा लगाने का अधिकार कभी नहीं दिया था। वहीं, लिंगन विश्वविद्यालय ने कहा कि, ''वो विश्वविद्यालय परिसर में मौजूद हर उन वस्तु का आंकलन कर रहा है, जो कानून के खिलाफ है और जिससे विश्वविद्यालय की सुरक्षा के लिए जोखिम बन रहा है।'' उसके पास 'परिसर में उन वस्तुओं का आकलन किया गया है जो कानूनी और सुरक्षा जोखिम पैदा कर सकती हैं''। लिंगन विश्वविद्यालय ने कहा कि, 'विश्वविद्यालय के सर्वोत्तम हित' के लिए प्रतिमाओं को हटा दिया गया है। आपको बता दें कि, बीजिंग ने पिछले साल हांगकांग में चीन विरोधी और लोकतंत्र समर्थक प्रदर्शनकारियों को खत्म करने के लिए नया सुरक्षा कानून पेश किया था, जिसके तहत हजारों प्रदर्शनकारियों को जेल में ठूंस दिया गया है।

तियानमेन पर चीनी सरकार का डंडा
पिछले साल तियानमेन नरसंहार की बरसी पर चीन के अधिकारियों ने कोरोना वायरस प्रतिबंधों का हवाला देते हुए वहां मोमबत्ती जलाने पर प्रतिबंध लगा दिया था। हर साल तियानमेन नरसंहार की बरसी पर हजारों छात्र तियानमेन स्क्वायर जाते थे और वहां मोमबत्ती जलाते थे, जिसे अब बंद कर दिया गया है। जिसके बाद हांगकांग के हजारों लोगों ने चीन का भारी विरोध किया था, लेकिन चीन की कम्युनिस्ट पार्टी लगातार सुरक्षा का हवाला देकर सख्ती को और बढ़ाती जा रही है। अक्टूबर में, नौ लोकतंत्र समर्थक हांगकांग कार्यकर्ताओं को चीन के खिलाफ प्रदर्शन में शामिल होने के लिए छह से 10 महीने के बीच जेल की सजा सुनाई गई थी।
क्या था तियानमेन नरसंहार कांड?
चीन में माओ ने कम्युनिस्ट पार्टी की स्थापना की और लोकतंत्र समर्थक लाखों लोगों की गोली मारकर हत्या करवा दी थी और फिर देश में क्रूर वामपंथी शासन की स्थापना की गई थी। लेकिन, चीन का एक हिस्सा अभी भी देश में लोकतंत्र की स्थापना चाहता है और साल 1989 में चीन में हजारों लोकतंत्र समर्थकों ने लोकतंत्र की बहाली के लिए आंदोलन करना शुरू किया था और लोकतंत्र समर्थकों का हुजूम बढ़ता चला गया। ऐसा लगने लगा कि, ये आंदोलन पूरी तरह से देश में फैल जाएगा, लिहाजा कम्युनिस्ट पार्टी अंदर तक दहल गई। लोकतंत्र समर्थक एक लाख से ज्यादा छात्र चीन की राजधानी बीजिंग में स्थिति तियानमेन चौक पर जमा हुए थे और सरकार से देश में लोकतंत्र बहाल करने की मांग करने लगे।

लोकतंत्र समर्थकों का नरसंहार
4 जून 1989 को तियानमेन चौक पर एक लाख से ज्यादा लोकतंत्र समर्थक जमा हो गये, जिन्हें तितर-बितर करने के लिए क्रूर कम्युनिस्ट शासन ने पूरे देश में मॉर्शल लॉ लगा दिया और सैनिकों को आंदोलनकारियों को कुचलने का आदेश दे दिया और फिर पूरी दुनिया ने पहली बार देखा, जब निहत्थे छात्रों को हटाने के लिए चीन के सैनिक सैकड़ों तोप के साथ पहुंचे थे और फिर निहत्थे छात्रों को मारना शुरू किया। ऐसा अनुमान है कि, तियानमेन चौक पर कम से कम 10 हजार छात्रों को टैंक से कुचल कर मार दिया गया, जबकि कम्युनिस्ट पार्टी ने ये आंकड़ा सिर्फ 300 दिखाया।

कम्युनिस्ट शासन की असली तस्वीर
अगली सुबह तियानमेन चौक पूरी तरह से खाली था। घटना को कवर करने गये विदेशी पत्रकारों से कैमरे छीन लिए गये, ताकि तस्वीरें बाहर नहीं आ सके और तियानमेन नरसंहार की सिर्फ एक तस्वीर बाहर आई, जिसमें एक छात्र को एक टैंक के सामने खड़ा देखा जा रहा है...ये तस्वीर कम्युनिस्ट शासन की क्रूरता की कहानी बयां करता है। उन कम्युनिस्टों की, जो शासन में पारदर्शिता की बात करते हैं, जो हर देश में आजादी का नारा इंकलाब लगाते नजर आते हैं, लेकिन ये कम्युनिस्ट नेता, तियानमेन चौक के जिक्र पर खामोश हो जाते हैं।












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