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हनी ट्रैप: हुस्न के जाल में कब-कब फंसे भारतीय अधिकारी? रॉ के एक अफसर का मामला तो PM नेहरू तक पहुंच गया था

विदेश मंत्रालय में काम करने वाले युवक सत्येंद्र सिवाल की गिरफ्तारी के बाद से हनीट्रैप शब्द एक बार फिर से चर्चा में है। सिवाल रूस के भारतीय दूतावास में काम करता था। उस पर देश की जरूरी जानकारी पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI के साथ शेयर करने के आरोप हैं। सिवाल ने प्रारंभिक पूछताछ में अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को स्वीकार भी किया है।

जानकारी के मुताबिक ISI ने सतेंद्र को हनीट्रैप के जरिए ही ट्रैप किया था। आपको बता दें कि हनी ट्रैप का ये मामला कोई पहला मामला नहीं है। कुछ साल पहले पाकिस्तान में भारतीय दूतावास में काम करने वाली अधिकारी माधुरी गुप्ता का भी मामला खूब चर्चित हुआ था। वह भी एक हनी ट्रैप का शिकार हुई थी।

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हनी ट्रैप क्या है?

'हनी ट्रैप' का मतलब एक रोमांटिक या यौन-सम्बंधी रिश्ता बना कर टार्गेटेड शख्स से ख़ुफिया जानकारी निकालना है। इस जानकारी का इस्तेमाल या तो किसी बड़ी रकम के लेन-देन के लिए किया जाता है या फिर राजनीतिक कारणों के लिए ये कराया जाता है।

भारत का सबसे पहला चर्चित हनी ट्रैप केस 70 के दशक का है। कहा जाता है कि मॉस्को में पोस्टेड एक युवा भारतीय डिप्लोमैट का इश्क एक रूसी डांसर से हो गया था। जब रूस की ख़ुफिया एजेंसी, केजीबी ने उस डांसर के जरिए उस डिप्लोमैट से कुछ जानकारी लेनी चाहिए तो उन्होंने साफ-साफ इससे इनकार कर दिया।

इसके बाद केजीबी ने भारतीय अधिकारियों को वह तस्वीरें भेज दीं जिसमें वह उस लड़की के साथ दिख रहे थे। इसके बाद डिप्लोमेट को भारत बुला लिया गया। यह मामला तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू तक पहुंचा जो कि खुद विदेश मंत्रालय प्रभारी थे। मामले की जानकारी के बाद प्रधानमंत्री नेहरू मुस्कुराए और युवा डिप्लोमेट को भविष्य में और अधिक सतर्क रहने की चेतावनी देकर छोड़ दिया।

एक अन्य मामला पोलैंड की राजधानी वॉरसॉ का है जहां पर एक रॉ एजेंट को फंसाने की कोशिश हुई थी। वो अफसर एक मीटिंग में गया था, जहां उसकी ड्रिंक में बेहोशी की दवा डाल दी गई। इसके बाद एक औरत के साथ उसकी आपत्तिजनक तस्वीरें खींच ली गई। इसके बाद उसे ब्लैकमेल करने की कोशिश हुई लेकिन उस अफसर ने सीधे रॉ चीफ RN काओ से बात कर पूरी कहानी बताई। काओ ने उसे भारत वापिस बुला लिया।

इस प्रकरण के बाद रॉ का एक नियम बन गया कि सिर्फ शादीशुदा अफसरों को ही देश से बाहर तैनानी मिलेगी। इतना ही नहीं, तब से लेकर आज तक भारतीय विदेश सेवा के सभी अफसरों को दूसरे देशों में इस तरह के किसी भी प्रलोभन से दूर रहने की हिदायत दी जाती है।

कुछ और चर्चित मामले

भारत में हनीट्रैप का एक चर्चित मामला केवी उन्नीकृष्णन का है। ये मामला इसलिए इतना चर्चित है क्योंकि इसे भारत के श्रीलंका में लिट्टे मिशन की नाकामयाबी की सबसे बड़ी वजह माना जाता है। उन्नीकृष्णन रॉ के अधिकारी थे। अस्सी के दशक में उन्हें हनीट्रैप में फंसाकर श्रीलंका में भारतीय ऑपरेशन से जुड़ी जानकारी हासिल कर ली गई थी।

जिस महिला ने उन्हें इस जाल में फंसाया था उसे अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए का एजेंट बताया गया था। महिला उस वक्त पैन अम एयरलाइंस में एयर होस्टेस के तौर पर काम कर रही थी। उन्नीकृष्णन को 1987 में महिला के जरिए सूचनाएं लीक करने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया था।

उन्नीकृष्णन को एक साल तक तिहाड़ में रखा गया, लेकिन चूंकि उन पर केस चलाने के लिए पर्याप्त साक्ष्य नहीं थे। इसलिए उन्हें रिहा कर दिया गया। बाद में उन्हें सस्पेंड कर दिया गया। उन्नीकृष्णन को रॉ इतिहास में का पहला अफसर माना जाता है, जो हनी ट्रैप में फंस कर अपनी एजेंसी के लिए इतने नुकसानदेह साबित हुए थे।

इसी तरह 90 के दशक में एक नेवी अधिकारी के इस्लामाबाद में एक नर्स के जाल में फंसने का भी मामला चर्चित हुआ था। यह नर्स असल में आईएसआई एजेंट थी। बाद में अधिकारी को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया।

इसी तरह का चर्चित मामला माधुरी गुप्ता का है, जो इस्लामाबाद स्थित भारतीय उच्चायोग में प्रेस व सूचना विभाग में सेकंड सेक्रेट्री थी। वो एक 30 साल के पाकिस्तानी युवक के प्यार में पड़ गई थी। साल 2010 में माधुरी को आईएसआई एजेंट को जानकारी देने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया था।

इसी तरह एक नेवी अफसर कमांडर सुखजिंदर सिंह का केस भी आया था। उसके ऊपर साल 2005 से 2007 के बीच रूसी महिला के साथ संबंध का आरोप है। उस वक्त वह रूस में तैनात था। मई 2008 में बीजिंग में तैनान एक वरिष्ठ भारतीय दूतावास अधिकारी को नई दिल्ली बुला लिया गया था। उनके ऊपर शक था वह चीनी हनीट्रैप के जाल में फंस रहे थे।

इसी तरह मनमोहन शर्मा नाम के अधिकारी रॉ में सीनियर रिसर्च अधिकारी थे। उनके ऊपर आरोप था कि वह अपनी चीनी लैंग्वेज टीचर के साथ प्यार में हैं। भारतीय अधिकारियों को शक था कि महिला चीनी सरकार की जासूस हो सकती है।

हनी ट्रैप तो नहीं लेकिन जासूसी का एक और मामला रबिंदर सिंह का भी है जो अमेरिकी जाजूसी एजेंसी सीआईए का गुलाम बन गया था। इंडियन आर्मी में मेजर रह चुका रबिंदर 1986 में रॉ से जुड़ा था। रबिंदर सिंह पर आरोप है कि उसने कम से कम 20,000 पेंजों में खुफिया जानकारी अमेरिकी खुफिया एजेंसी को भेजी थीं।

रबिंदर सिंह के खिलाफ यह नहीं पता चल सका था कि वह किस तरह से जानकारी बाहर भेज रहे थे। हालांकि गिरफ्तार होने से पहले वह काठमांडू भागकर चला गया जहां से वह परिवार सहित अमेरिका चला गया। बाद में कहा गया कि एक हादसे में रबिंदर सिंह की मौत हो गई है।

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