हिन्दी सीखते पाकिस्तान के हिन्दु
नई दिल्ली(विवेक शुक्ला) हिन्दी सीखने को लेकर आजकल पाकिस्तान के हिन्दुओं में खासा उत्साह देखा जा रहा है। ये अपने बड़े-बुजुर्गों से हिन्दी सीख रहे हैं। इनकी चाहत है कि ये कम से कम इतनी हिन्दी तो जान लें ताकि ये हिन्दू धर्म की धार्मिक पुस्तकों को पढ़ सकें।

कराची में रहने वाले चंदर कुमार एमबीए हैं। पाकिस्तान की वित्तीय राजधानी में एक एनजीओ से जुड़े हैं। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान में स्कूलों या कालेजों में हिन्दी को पढ़ने-पढ़ाने की किसी तरह की व्यवस्था नहीं है।
आगे की पीढ़ियों को पढ़ाया
पर, देश के विभाजन के बाद भी जो लोग रह गए थे हिन्दी जानने वाले, वे ही आगे की पीढ़ियों को हिन्दी पढ़ाते रहे। जिन्होंने उनसे हिन्दी जानी, वे आगे की पीढ़ियों को हिन्दीपढ़ाते रहे। चंदर कुमार ने भी उन्हीं में से एक सज्जन से हिन्दी जानी-सीखी। उन्होंने हिन्दी सिंधी भाषा के माध्यम से जानी।
सिंध के हिन्दू
जब से हम बात करते हैं पाकिस्तान के हिन्दुओं की हिन्दी सीखने के संबंध में तो बात सिंध सूबे के हिन्दुओं की ही होती है। क्योंकि पाकिस्तान के बाकी सूबों में तो हिन्दू बहुत ही कम रहते हैं। सिंध में इनकी तादाद अभी करीब 8-10 लाख के आसपास है।
उत्तर प्रदेश और बिहार के लोग
सिंध में उत्तर प्रदेश और बिहार से जाकर बसे लोग भी हिन्दी हिन्दुओं को पढ़ा देते हैं। उत्तर प्रदेश और बिहार के लोगों ने तो हिन्दी सीखी ही थी। सिंध सूबे में उत्तर प्रदेश और बिहार के लाखों लोग रहते हैं।
चंदर कुमार ने एक फेसबुक साक्षात्कार में बताया कि पाकिस्तान में कम से कम मिडिल क्लास से संबंध रखने वाले हिन्दू तो हिन्दी सीखते ही हैं। बात दें कि एकदौर में पाकिस्तान रेडियो की भी हिन्दी सर्विस होती थी। जो बाद में बंद हो गई।












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