UN रिपोर्ट में सदी की सबसे बड़ी चेतावनी, प्रचंड गर्मी से मचेगी तबाही, जीवन का होगा भारी नुकसान
रेड क्रॉस की रिपोर्ट में कहा गया है कि, हीटवेभ के प्रभाव से बड़े पैमाने पर जीवन की हानि होगी और इसकी वजह से अलग अलग जनसंख्याओं पर इसका गंभीर प्रभाव पड़ेगा
Climate change heatwaves: संयुक्त राष्ट्र और रेड क्रॉस की एक नई रिपोर्ट ने सदी की सबसे बड़ी चेतावनी दी गई है और कहा गया है, कि अगले 10 सालों के अंदर अफ्रीका और एशिया के कुछ हिस्सों में हीटवेव इतनी चरम हो जाएगी, कि वहां मानव जीवन अस्थिर हो जाएगा। एक्सट्रीम हीट: प्रिपेरिंग फॉर द हीटवेव्स ऑफ द फ्यूचर, संयुक्त प्रकाशन ने सोमवार को कहा है कि, साल 2010 से 2019 के बीच में पूरी दुनिया में 38 हीटवेभ्स आए हैं, जिनमें 70 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हुई है। हालांकि, रिपोर्ट में ये भी कहा गया है, कि मौत का ये आंकड़ा वास्तविक आंकड़े से काफी कम हो सकता है, लेकिन रिपोर्ट में स्पष्ट तौर पर कहा गया है, कि भविष्य काफी खतरनाक होने वाला है। वहीं, इस साल भी जितनी गर्मी पड़ी है, उसने आने वाले भविष्य की एक खौफनाक तस्वीर दिखा ही दी है।

यूएन की रिपोर्ट में गंभीर चेतावनी
रेड क्रॉस ने अपनी रिपोर्ट में पिछली गणनाओं का हवाला देते हुए कहा है कि, यह आंकड़ा चरम जलवायु और मौसम से जुड़ी आपदाओं से होने वाली 410,000 से अधिक मौतों में से एक-छठे से ज्यादा है। वहीं, वैज्ञानिकों ने बार-बार ग्लोबल वार्मिंग को 1.5 डिग्री सेल्सियस (2.7 डिग्री फ़ारेनहाइट) तक सीमित करने की आवश्यकता पर जोर दिया है और गंभीर चेतावनी देते हुए कहा है, कि अगर ग्लोबल वॉर्मिंग ने उस सीमा को पार कर लिया तो इंसानों के साथ साथ वन्यजीवों और पारिस्थितिक तंत्र पर गंभीर जलवायु परिवर्तन का काफी गंभीर प्रभाव पड़ेगा। जबकि, यूएन ऑफिस फॉर कोऑर्डिनेशन ऑफ ह्यूमैनिटेरियन अफेयर्स (ओसीएचए) की रिपोर्ट में कहा गया है, "2 डिग्री सेल्सियस तापमान तक का अगर इजाफा होता है, तो आज के मुकाबले 14 गुना ज्यादा गर्मी और ह्यूमिडिटी बढ़ जाएगी, जो इंसानों के लिए अत्यंत खतरनाक होगा। लिहाजा, रेडक्रास ने कहा है कि, अगर इंसानों को आने वाले वक्त में विनाशकारी गर्मी और हीटवेभ से बचना है, तो फौरन कदम उठाने होंगे।

किन क्षेत्रों में पड़ेगी विनाशकारी गर्मी
रेड क्रॉस ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि, "आज की मौजूदा ट्रेजेक्टरी के मुताबिक, आने वाले वक्त में हीटवेभ इंसानों की शारीरिक क्षमता की सीमा और सामाजिक क्षमता की सीमा को पार कर जाएगा। जिसमें साहेल और दक्षिण और दक्षिण-पश्चिम एशियाई क्षेत्र शामिल हैं।" इस साल पाकिस्तान में आई विनाशकारी बाढ़ के पीछे भी जलवायु परिवर्तन ही है, जिसमें एक तिहाई पाकिस्तान में भीषण तबाही मचाई है और लाखों लोगों की जिंदगी पर गंभीर असर डाला है। संयुक्त राष्ट्र ने खासतौर पर बांग्लादेश और विकासशील देशों का जिक्र करते हुए कहा कि, इनपर हीटवेभ का काफी खतरनाक असर पड़ेगा और औसत दिनों की तुलना में हीटवेभ की वजह से इंसानों की मृत्यु में 20 प्रतिशत का इजाफा होगा।

बड़े पैमाने पर होगी जीवन की हानि
रेड क्रॉस की रिपोर्ट में कहा गया है कि, हीटवेभ के प्रभाव से बड़े पैमाने पर जीवन की हानि होगी और इसकी वजह से अलग अलग जनसंख्याओं पर इसका गंभीर प्रभाव पड़ेगा और रिपोर्ट में कहा गया है, कि इसके रूझान भी दिखने शुरू हो गये हैं। ओसीएचए के प्रमुख मार्टिन ग्रिफिथ्स ने कहा कि, "यह घोर अन्यायपूर्ण है, कि नाजुक देशों को अत्यधिक गर्मी से घातक नुकसान और बर्बादी का सहन करना पड़ रहा है, जबकि वे स्पष्ट रूप से जलवायु परिवर्तन के लिए सबसे कम जिम्मेदार हैं।" उन्होंने कहा कि, "धनवान देशों के पास अपने लोगों को परिस्थितियों के अनुकूल बनाने में मदद करने के लिए संसाधन हैं और उन्होंने ऐसा करने के वादे भी किए हैं। जबकि, गरीब देश जो इन कष्टप्रद गर्मी के लिए ज़िम्मेदार नहीं हैं, उनके पास वे संसाधन नहीं हैं।"

रोकना ही होगा जलवायु परिवर्तन
यूएन और रेड क्रॉस ने अपनी रिपोर्ट में दुनियाभर की सरकारों से गर्मी को रोकने के लिए आक्रामक कदम उठाने का आह्वान किया गया है, ताकि भविष्य में आने वाली इस संकट को रोका जा सके। रिपोर्ट में कहा गया है कि, "कार्रवाई के लिए सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्र जलवायु परिवर्तन को धीमा करना और रोकना है।" रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया है कि, "ग्लोबल वार्मिंग को 2 डिग्री सेल्सियस के बजाय 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित करने के परिणामस्वरूप 42 करोड़ कम लोग हीटवेभ की चपेट में आएंगे, जबकि करीब साढ़े 6 करोड़ लोग असाधारण हीटवेभ के संपर्क में आने से बच पाएंगे।

आने वाला है सबसे घातक आपदा
ओसीएचए के प्रमुख मार्टिन ग्रिफिथ्स ने जिनेवा में संवाददाताओं से कहा कि, "हीटवेव्स रिकॉर्ड पर सबसे घातक आपदाओं में से कुछ के लिए जिम्मेदार हैं।" उन्होंने कहा कि, "भीषण सूखे की वजह से सोमालिया में अकाल आ गया है और लोगों को अनाज के एक एक दाने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है और इसकी वजह अत्यधिक गर्मी और हीटवेभ्स ही है और हम भविष्य में इनमें से और अधिक की उम्मीद कर सकते हैं।"
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