भारत में बराबरी के हक मिलने में अभी भी पिछड़ी है महिलाएं
नई दिल्ली। महिलाओं को बराबरी स्थान दिया जाने का भले ही कितना ढि़ढोरा क्यों न पिटे, मगर वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के ग्लोबल जेंडर सर्वे-2014 की रिपोर्ट ने लोगों की मानसिकता का खुलासा कर दिया है। रिपोर्ट के अनुसार वर्कप्लेस पर महिलाओं को पुरुषों के बराबर मौके दिए जाने में काफी लंबा समय लग सकता है। महिलाओं को बराबरी देने के मामले में भारत 13 स्थान फिसलकर 114वें पायदान पर गया है। पिछले साल 136 देशों की सूची में भारत 101वें स्थान पर था।

भारतीय महिलाएं स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा और काम के मामले में दुनिया में सबसे ज्यादा विषमता की शिकार हैं। हेल्थ और एजुकेशन जैसे कई मामलों में महिलाएं इस अंतर को तेजी से कम तो कर रही हैं, लेकिन वर्कप्लेस पर लैंगिक असमानता को पूरी तरह मिटाने में साल 2095 तक का इंतजार करना पड़ सकता है। वर्ल्ड इकनॉमिक फोरम (डब्ल्यूईएफ) की रिपोर्ट में बताया गया है कि पिछले 9 वर्षों में वर्कप्लेस पर जेंडर गैप मामूली ही घटा है।
2006 से डब्ल्यूईएफ ग्लोबल जेंडर गैप रिपोर्ट जारी कर रहा है। तब से लेकर अब तक महिलाओं की इकॉनमी में हिस्सेदारी बढ़ी है और पुरुषों के मुकाबले उनके लिए मौके 56 पर्सेंट से बढ़कर 60 पर्सेंट हुए हैं। 142 देशों को कवर करने वाली इस रिपोर्ट में यह देखा गया है कि हेल्थकेयर, एजुकेशन, राजनीतिक भागीदारी, रिसोर्सेज और अवसरों को लेकर विभिन्न देश महिलाओं और पुरुषों के बीच कैसे वितरण करते हैं।
डब्ल्यूईएफ का कहना है, 'मौजूदा स्थितियों के आधार पर बाकी सभी चीजें समान रहने की स्थिति में दुनिया को यह अंतर पूरी तरह समाप्त करने में 81 वर्ष लगेंगे।'












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