चंद्रमा की धूल और 3 तीन तिलचट्टों के शव की कीमत लगी 3,13,20,600 रुपए, NASA ने कहा ये सरकारी संपत्ति
'हमें हमारे चंद्रमा की धूल और तिलचट्टे वापस दें': नासा
नई दिल्ली, 24 जून। अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा ने साफ कर दिया है कि चंद्रमा पर जीवन की तलाश में एकत्र किए नमूनों को लेकर स्थिति स्पष्ट कर दी है। नासा ने मून के नमूनों की नीलामी करने वाली कंपनी से स्पष्ट शब्दों में कहा कि चंद्रमा से लाई गई सामग्री अभी भी संघीय सरकार की संपत्ति है।

55 साल पहले चंद्रमा पर एकत्र किए गए थे नमूने
1969 के अपोलो 11 मिशन के दौरान एकत्रित चंद्रमा की धूल को एक प्रयोग के दौरान तिलचट्टे को खिलाया गया था। इससे यह पता लगाया कि चंद्रमा की सतह पर मिट्टी में जीवन के लिए कोई हानिकारक तत्व तो नहीं हैं।

चंद्रमा पर एकत्र किए गए नमूने सरकार संपत्ति: NASA
इन नमूनों को अब एक ऑक्शन कंपनी आरआर के हाथों के नीलाम किया जा रहा था। लेकिन नासा ने इससे इनकार दिया और कहा कि ये सरकार की संपत्ति है। नासा ने आगे कहा कि सभी अपोलो मिशन के दौरान एकत्र किए गए सभी नमूने नासा के हैं। इसमें किसी भी व्यक्ति, विश्वविद्यालय या अन्य संस्था को उपयोग के बाद उन्हें रखने की अनुमति नहीं दी गई है।

ऑक्शन कंपनी ने कही ये बात
नासा ने नीलामी प्रक्रिया को तुरंत रोकने की बात कही और अपोलो 11 मिशन के सभी नमूनों पर अपना दावा जताया। इसके बा ऑक्शन कंपनी की ओर से एक बयान जारी किया गया। जिसमें कहा गया कि लगभग 40 मिलीग्राम चंद्रमा की धूल और तीन तिलचट्टे के शवों से युक्त एक शीशी को कम से कम कम से कम 3,13 20,600 रुपए मिलने की उम्मीद थी। लेकिन अब नीलामी रोक दी गई है।

चंद्रमा की मिट्टी में कोई संक्रामक एजेंट नहीं
चंद्रमा की धूल से खिलाए गए तिलचट्टे का अध्ययन मिनेसोटा विश्वविद्यालय में देर से कीटविज्ञानी मैरियन ब्रूक्स द्वारा किया गया था। अक्टूबर 1969 में एक स्थानीय समाचार पत्र से बात करते हुए, ब्रूक्स ने कहा कि उन्हें संक्रामक एजेंटों का कोई सबूत नहीं मिला।












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