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असफलता से निराश होकर विदेश चले गए थे पंकज उधास, टोरंटो रेडियो में मिला काम, फिर गाया चिट्ठी आई है...

अपनी मखमली आवाज से दुनिया भर के संगीत प्रेमियों के दिलों पर राज करने वाले गजल गायक पंकज उधास का आज निधन हो गया है। वह 72 साल के थे। पंकज की बेटी नायाब उधास ने ये जानकारी दी।

नायाब ने पिता की मौत की जानकारी देते हुए सोशल मीडिया पर लिखा कि बहुत दुख के साथ हमें ये आपको बताना पड़ रहा है कि पद्मश्री पंकज उधास का 26 फरवरी 2024 को निधन हो गया है। वो लंबे समय से बीमार थे। वो उम्र संबंधी बीमारियों से जूझ रहे थे।

Pankaj Udhas Passes Away,

गजल की दुनिया में बेशुमार नाम कमाने वाले पंकज उधास के दौर में एक वक्त ऐसा भी आया था जब वे असफलता से निराश होकर बेहतर अवसर की तलाश में विदेश चले गए थे।

पंकज उधास के लिए म्यूजिक का सफर महज 7 साल की उम्र से शुरू हो गया था। पंकज उधास ने गाने की शुरुआत यूं तो शौकिया तौर पर की थी मगर एक दिन वो उनका प्रोफेशन बन गया।

संगीत में रुचि होने के कारण पंकज ने उस्ताद नवरंग से शिक्षा ली। पंकज के बड़े भाई मनहर एक स्टेज आर्टिस्ट थे। पहली बार पंकज को स्टेज पर गाने का मौका उनके भाई ने ही दिया था।

'कामना' से शुरू किया सफर

साल 1972 में फिल्म कामना से पंकज ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की। लेकिन दुर्भाग्य से ये फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह से पिट गई। फिल्म के फ्लॉप होने के बाद नोटिस के अभाव में पंकज ने गजलों की तरफ अपना रुख किया। इसके लिए उन्होंने ऊर्दू की तालीम भी हासिल की।

1976 में चले गए कनाडा

पंकज ने खुद की गजलें बनाईं और अमेरिका जाकर कई गजल शो किए जो कि बेहद हिट भी रहे। साल 1976 में पंकज को कनाडा जाने का अवसर मिला। इस दौरान वह अपने मित्र के यहां टोरंटो में रह रहे थे।

टोरंटो रेडियो में गायन

अपने दोस्त के जन्मदिन समारोह में उन्होंने एक गजल गई जिसे टोरंटो रेडियो में हिन्दी कार्यक्रम पेश करने वाले एक सज्जन ने भी सुना। उन्होंने पंकज उधास की प्रतिभा को पहचान लिया और उन्हें टोरंटो रेडियो में गाने का मौका दिया।

पंकज उधास ने लगभग दस महीने तक टोरंटो रेडियो और दूरदर्शन में गाना गाया। लेकिन उनका मन तो फिल्मों में गाने का था। वे सबकुछ छोड़ फिर से मुबंई लौट आए। इस बीच कैसेट कंपनी के मालिक मीरचंदानी से उनकी मुलाकात हुई और उन्हें अपनी नई एलबम आहट में पार्श्वगायन का अवसर दिया। यह अलबम श्रोताओं के बीच काफी लोकप्रिय हुआ।

आहत से मिला 'रिस्टार्ट'

भारत आने के बाद साल 1980 में 'आहत' नाम के गजल एलबम से पंकज का करियर शुरू हुआ। इसके बाद उनके 'मुकर्रर', 'तरन्नुम' और 'महफिल' जैसे एलबम आए। जल्द ही गजल जगत में वो छा गए। उनकी प्रसिद्धि महेश भट्ट तक पहुंची जिन्होंने उन्हें 'चिट्ठी आई है' गाने का मौका दिया।

चिट्ठी आई है से मिली शोहरत

ये गाना महेश भट्ट की फिल्म 'नाम' का है। ये साल 1986 में प्रदर्शित हुई थी। इसे पंकज उधास के सिने करियर की महत्वपूर्ण फिल्मों में एक माना जाता है। यूं तो इस फिल्म के लगभग सभी गीत सुपरहिट साबित हुए लेकिन 'चिट्ठी आई है' गाने से उन्हें अपार लोकप्रियता हासिल हुई। ये गाना आज भी श्रोताओं की आंखों को नम कर देता है।

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