रूस को भड़काने की कोशिश? अब जॉर्जिया, मोल्दोवा ने उठाया ये कदम, पुतिन अब इन देशों पर करेंगे हमला?
सोवियत संघ के दो पूर्व राज्य जॉर्जिया और मोल्दोवा ने आधिकारिक तौर पर यूरोपीय संघ की सदस्यता लेने के लिए आवेदन किया है और माना जा रहा है कि, इन देशों के इस फैसले के बाद रूस का गुस्सा भड़क सकता है।
कीव/मॉस्को/नई दिल्ली, मार्च 04: यूक्रेन पर रूसी हमले की सबसे बड़ी वजह उसका यूरोपीय देशों के साथ नजदीकी संबंध बनाने की कोशिश और नाटो में शामिल होने की ख्वाहिश थी और रूस को यूक्रेनी सरकार के इस फैसले से सख्त ऐतराज था और इसीलिए कई सालों तक चेतावनी देने और समझाने के बाद भी जब यूक्रेनी राष्ट्रपति ने पुतिन की एक नहीं सुनी, तो फिर पुतिन ने यूक्रेन पर हमले का आदेश दे दिया, लेकिन अब यही गलती जॉर्जिया और मोल्दोवा भी करने जा रहे हैं, जो पहले से ही रूस की हिट-लिस्ट में शामिल हैं।

यूरोपीयन यूनियन में शामिल होने की कोशिश
सोवियत संघ के दो पूर्व राज्य जॉर्जिया और मोल्दोवा ने आधिकारिक तौर पर यूरोपीय संघ की सदस्यता लेने के लिए आवेदन किया है और माना जा रहा है कि, इन देशों के इस फैसले के बाद रूस का गुस्सा भड़क सकता है, जो पहले ही यूक्रेन में भीषण युद्ध कर रहा है। माना जा रहा है कि, जॉर्जिया और मोल्दोवा ने यूक्रेन युद्ध के बीच आने वाले वक्त में रूसी गुस्से से बचने के लिए यूरोपीयन यूनियन की सदस्यता लेने की कोशिश की है। जॉर्जिया और मोल्दोवा का यूरोपीय यूनियन में शामिल होने का फैसला उस वक्त आया है, जब ये खबर आई है कि, अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन पोलैंड, बाल्किक्स देशों के साथ ही मोल्दावा की यात्रा करने का फैसला किया है।

जॉर्जिया और मोल्दोवा के फैसले का मतलब
इसी हफ्ते, जब यूक्रेन पर रूस ने हमला किया हुआ है और भीषण जंग चल रही है, लाखों लोग देश से पलायन कर चुके हैं, उस वक्त ही यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने यूरोपीयन यूनियन की सदस्यता लेने के लिए आवेदन किया है और यूरोपीय यूनियन में यूक्रेन की सदस्यता का आवेदन स्वीकार भी कर लिया गया है और अब जॉर्जिया और मोल्दोवा ने भी आवेदन दिया है, जिससे रूस का गुस्सा और भड़कना तय है, जबकि ये दोनों देश जानते हैं, कि यूरोपीय यूनियन की सदस्यता लेने में कई साल लग जाते हैं और उसकी कड़ी शर्तों को पूरा करना काफी मुश्किल होता है, तो फिर सवाल ये उठ रहे हैं, कि जॉर्जिया और मोल्दोवा ने इस वक्त ये फैसला क्यों लिया है?

कैसे मिलती हैं यूरोपीय संघ की सदस्यता
आपको बता दें कि, यूरोपीय संघ की सदस्यता हासिल करने की प्रक्रिया में आमतौर पर कई साल लग जाते हैं और सख्त मानदंडों को पूरा करने की आवश्यकता होती है जो आर्थिक स्थिरता, भ्रष्टाचार के स्तर और मानवाधिकारों के सम्मान जैसे मुद्दों को ध्यान में रखकर ही दिए जाते हैं। नए सदस्यों को यूरोपीय संघ में आने की इजाजत देने के लिए यूरोपीय संघ के सभी 27 सदस्यों का सहमत होना जरूरी है और इस वक्त भी, जब यूक्रेन में युद्ध जारी है, यूरोपीय संघ में शामिल सभी सदस्य रूस के खिलाफ अंदर से नहीं हैं और वो किसी ना किसी बहाने जॉर्जिया और मोव्दोवा के रास्ते में कांटे बो सकते हैं।

जॉर्जिया-मोल्दोवा ने क्या कहा?
यूरोपीय संघ की सदस्यता के लिए आवेदन करते वक्त जॉर्जिया के प्रधानमंत्री इराकली गैराबिश्विली ने 3 मार्च को देश की सरकारी वेबसाइट पर पोस्ट किए गए एक बयान में कहा कि, "यूरोपीय संघ की सदस्यता के लिए आवेदन जॉर्जिया के यूरोपीय एकीकरण के मार्ग पर एक और मील का पत्थर है। यह एक ऐसा मंच है, जो हमारे इतिहास में एक नये पृष्ठ को खोलता है और हमारे पूर्वजों के प्रयास को जारी रखता है, जिसका उद्देश्य यूरोपीय संघ में जॉर्जिया का प्रवेश करना है।'' वहीं, जॉर्जिया के यूरोपीय संघ में शामिल होने के लिए आवेदन करने के कुछ ही घंटों के बाद मोल्दोवा की राष्ट्रपति मिया संदू ने भी यूरोपीय संघ में शामिल होने के लिए आवेदन भरने का ऐलान कर दिया। उन्होंने संवाददाताओं से कहा कि, वह "यूरोपीय संघ में शामिल होने के अनुरोध पर हस्ताक्षर कर रही हैं"।

रूस की नाराजगी पड़ेगी भारी?
जॉर्जिया और मोल्दोवा के पश्चिम के साथ घनिष्ठ संबंध बनाने के प्रयासों ने लंबे समय से रूस को नाराज कर रखा है और 2 दिन पहले बेलारूस के राष्ट्रपति ने जो टीवी पर रूसी सैन्य अभियान का नक्शा दिखाया था, उसमें उन्होंने साफ तौर पर इशारा किया था, कि रूस का अगला टारगेट मोल्दोवा ही है। आपको बता दें कि, मोल्दोवा यूक्रेन के साथ लगभग 1,200 किलोमीटर की सीमा साझा करता है, जिसमें मोल्दोवा का ट्रांसडेनिएस्टर का 'टूटा' हुआ क्षेत्र भी शामिल है, जिसमें भारी रूसी भाषी आबादी है और एक्सपर्ट्स का कहना है कि, जिस तरह से यूक्रेन के 'अलगाववादियों के दोनों क्षेत्रों' को स्वतंत्र राज्य बनाकर रूस ने यूक्रेन पर हमला किया है, उसी तरह से रूस मोल्दोवा पर भी हमला कर सकता है।

रूस और जॉर्जिया में संबंध
जॉर्जिया की दक्षिणी रूस के साथ लगभग 900 किलोमीटर लंबी सीमा है, जिसमें अबकाज़िया और दक्षिण ओसेशिया के जॉर्जियाई क्षेत्र शामिल हैं और साल 2008 में रूस ने जब जॉर्जिया पर हमला किया था, तब पांच दिनों तक चले युद्ध के बाद रूस ने इन इलाकों को जॉर्जिया से छीन लिया था और उन्हें अलग राज्य होने का दर्जा दे दिया था। हालांकि, जॉर्जिया के त्बिलिसी क्षेत्र और मोल्दोवा के चिसीनाउ क्षेत्र ने यूक्रेन में युद्ध के दौरान रूस के खिलाफ जाकर यूरोपीय संघ में शामिल होने का विरोध किया है, लेकिन सत्तारूढ़ जॉर्जियाई ड्रीम पार्टी के अध्यक्ष इराकली कोबाखिद्ज़े ने 2 मार्च को एक संवाददाता सम्मेलन में "यूरोपीय संघ की सदस्यता के लिए तुरंत आवेदन करने के लिए" अपनी पार्टी के फैसले की घोषणा की है। आपको बता दें कि, जॉर्जिया 2024 में आवेदन जमा करने की योजना बना रहा था, लेकिन पार्टी ने दुनिया में बदली हुई स्थिति के कारण इसी वक्त आवेदन करने का फैसला किया है।

क्या मिल पाएगी EU की सदस्यता?
जॉर्जिया और यूक्रेन दोनों ने यूरोपीय संघ के साथ "आर्थिक एकीकरण और राजनीतिक एप्रॉक्सीमेशन" और फ्री ट्रेड के तहत एसोसिएशन समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं, जो अंतिम सदस्यता की गारंटी नहीं हैं। लेकिन, मोल्दोवा के अधिकारियों का मानना है कि, इस वक्त जब रूस ने यूक्रेन पर हमला किया हुआ है और यूक्रेन ने भी यूरोपीय संघ में शामिल होने के लिए आवेदन किया हुआ है, उस वक्त यूरोपीय संघ उनकी इच्छाओं का सम्मान कर सकता है, लेकिन एक्सपर्ट्स का मानना है कि, जॉर्जिया और मोल्दोवा का ये कदम रूस को भड़काने वाला हो सकता है और रूस इसके खिलाफ कड़ी प्रतिक्रिया जता सकता है।












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