Explainer: गाजा पट्टी में चार दिनों का युद्धविराम, क्या हथियार भंडार हो रहे खत्म? इजराइल को क्या हासिल होगा?

Israel-Hamas War Ceasefire: गाजा में चार दिनों तक युद्धविराम के लिए आधिकारिक ऐलान हो गया है और अमेरिका के साथ साथ इजराइल और हमास ने भी पुष्टि कर दी है, कि चार दिनों तक गाजा पट्टी में लड़ाई नहीं होगी। हालांकि, इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने युद्धविराम के साथ जो ऐलान किया है, उससे यही पता चलता है, कि चार दिनों के बाद गाजा पट्टी में फिर से इजराइली बमबारी शुरू हो जाएगी।

जबकि, रविवार को कतर के प्रधान मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल थानी ने दोहा में घोषणा की थी, कि हमास और इजराइल के बीच मतभेद "बहुत मामूली" बचे हैं। कतर युद्ध में मध्यस्थता प्रयासों का केंद्र रहा है, जिसमें इजरायली बंदियों की रिहाई भी शामिल है।

Israel-Hamas War Ceasefire

युद्धविराम की सबसे प्रमुख शर्त ये है, कि चार दिनों में बारी बारी से हमला, 50 इजराइली बंधकों को छोड़ेगा, जबकि इस दौरान इजराइल भी करीब 150 हमास आतंकियों को अपनी जेल से रिहा करेगा।

वहीं, युद्धविराम के मुद्दे पर हमास नेता इस्माइल हानियेह ने मंगलवार को रॉयटर्स समाचार एजेंसी को बताया था, कि पार्टियां "एक संघर्ष विराम समझौते पर पहुंचने के करीब हैं"। हमास के एक अन्य अधिकारी ने अल जज़ीरा को बताया, कि बातचीत संघर्ष विराम की अवधि, गाजा को मानवीय सहायता पहुंचाने और बंधकों और कैदियों की अदला-बदली पर केंद्रित थी।

चूंकि अधिकांश पार्टियां गाजा में बमबारी को अस्थायी रूप से रोकने की कोशिश कर रही हैं, इसलिए फिलहाल शांति की उम्मीद की जा सकती है।

लेकिन, यहां ये समझना जरूरी है, कि आखिर इस युद्धविराम से क्या हासिल होगा और सबसे बड़ा सवाल ये है, कि आखिर चार दिनों तक जंग रोकने से इजराइल को फायदे होंगे या नुकसान?

युद्धविराम से इजराइल को क्या मिलेगा?

इजरायली युद्ध मशीनरी गाजा में पिछले छह हफ्तों से हवा में और जमीन पर तीन हफ्तों से पूरी ताकत से काम कर रही है। हमास के हमलों के बाद से, इजराइल की हवाई बमबारी आश्चर्यजनक रूप से काफी ज्यादा खतरनाक तरीके से जारी है।

7 अक्टूबर को हमास के आतंकियों ने दक्षिणी इजराइल पर बेरहमी से हमला किया था और हजार से ज्यादा इजराइली नागरिकों को बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया था। हमास के आतंकियों ने जिस तरीके से बर्बरता दिखाई थी, उसे देखने के बाद ही पता चल गया था, कि इजराइल भी उतनी ही बेरहमी से जबाव देगा। 7 अक्टूबर को हमास के हमले ने इजराइली एजेंसियों की सुरक्षा व्यवस्था को बेनकाब कर दिया था।

और प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के लिए ये लड़ाई सिर्फ हमास के खिलाफ ही नहीं रही, बल्कि एक्सपर्ट्स का कहना है, ये लड़ाई राजनीतिक वर्चस्व दिखाने की भी बन गई। लिहाजा, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने हमास के समूल नाश की कसम खाई है। युद्धविराम समझौता होने के बाद भी नेतन्याहू ने कहा है, कि इजराइल का मकसद पूरा नहीं हुआ है, जिसके बाद आशंका ये है, कि चार दिनों के बाद इजराइल इस लड़ाई को फिर से आगे बढ़ा सकता है।

लेकिन, युद्धविराम सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि सैन्य जरूरत भी है।

Israel-Hamas War Ceasefire

हर पल युद्ध के लिए तैयार रहने का दावा करने वाले इजराइल को भी हथियारों और गोला-बारूद का पर्याप्त भंडार बनाए रखना पड़ता है।

सेकंड वर्ल्ड वार के दौरान अमेरिकी सेना के जनरल उमर ब्रैडली ने एक बार कहा था, कि "अनजान अधिकारी युद्ध की रणनीति पर बात करते हैं, लेकिन प्रोफेशनल अधिकारी रसद के बारे में बात करते हैं।"

इजरायली फॉरवर्ड कमांडर गाजा पर हमले जारी रखने के पक्ष में हो सकते हैं, लेकिन पीछे का गुणा गणित ये हो सकता है, कि सैनिकों तक रसद और हथियारों की लगातार सप्लाई भी जरूरी है। यूक्रेन युद्ध में रूस यहीं मात खा रहा है, कि वो अपने सैनिकों तक हथियारों और रसद की आपूर्ति काफी लेट से कर रहा है। और कुछ क्लासीफाइड रिपोर्ट में कहा गया है, कि हमास के सुरंगों को नष्ट करने के लिए इजराइली एयरफोर्स, जिस स्मार्ट बम का इस्तेमाल कर रही है, उसका स्टॉक खत्म होने वाला है, लिहाजा इन चार दिनों के युद्धविराम में उस स्टॉक को फिर से बढ़ाया जाएगा और इसके लिए सहयोगी देशों, खासकर अमेरिका की मदद ली जाएगी।

हालांकि, युद्ध के दौरान इन रिपोर्ट्स की विश्वसनीयता भी सवालों में होती है, लिहाजा इस रिपोर्ट में भी कितनी सच्चाई है, इसकी पुष्टि हम नहीं कर सकते हैं।

क्या इजराइल के पास खत्म हो रहा हथियार भंडार?

कुछ रिपोर्ट्स में दावे किए गये हैं, कि इजराइली वायुसेना ने गाजा पर 2,500 से ज्यादा ज्वाइंट डायरेक्ट अटैक म्यूनिशन (JDAM) स्मार्ट बम किट खर्च किए हैं और अब उसके पास सिर्फ 10 दिनों का स्टॉक बचा है।

दुनिया की हर सेना यह नियंत्रित करती है, कि आपात स्थिति के लिए कितना गोला-बारूद आरक्षित रखा जाना चाहिए। सटीक आंकड़े एक गुप्त रहस्य होते हैं, लेकिन सब कुछ इस बात की ओर इशारा करता है, कि इजराइल के क्वार्टरमास्टरों ने अलार्म बजा दिया है और तत्काल स्मार्ट बम की मांग की है।

1973 में जब इज़राइल, सीरिया, मिस्र और उनके अरब सहयोगियों से युद्ध लड़ रहा था और जब इजराइल के पास युद्ध भंडार खत्म होने वाला था, तो अमेरिका ने इतिहास में सबसे बड़ा सैन्य एयरलिफ्ट "ऑपरेशन निकेल ग्रास" शुरू किया था। अमेरिकी वायु सेना ने प्रति दिन लगभग 1,000 टन हथियार और गोला-बारूद, कुल मिलाकर 22,000 टन से ज्यादा हथियार और गोला-बारूद इजराइल पहुंचाए थे।

इसवक्त हथियारों की कमी को लेक सवाल इसलिए उठ रहे हैं, क्योंकि पिछले दो हफ्तों से, अमेरिकी सी-17 ट्रांसपोर्ट नियमित रूप से तेल अवीव के बेन गुरियन हवाई अड्डे और नेगेव रेगिस्तान में नेवातिम एयरबेस पर उतर रहे हैं।

अधिकांश विमान जर्मनी के रामस्टीन एयरबेस से उड़ान भरते हैं, जहां अमेरिका के पास "पूर्वनिर्धारित स्टॉक" से भरे गोदाम हैं और सैन्य आपात स्थिति के लिए सुरक्षित हथियार भंडार है।

इसके अलावा, समुद्र के रास्ते इजराइल को भारी और कम जरूरी वाली आपूर्ति भेजी जा रही है। उनमें निश्चित रूप से हाई मोबिलिटी आर्टिलरी रॉकेट सिस्टम (HIMARS), M270 मल्टीपल-लॉन्च रॉकेट सिस्टम (MLRS) के ट्रैक किए गए संस्करण के लिए पुनःपूर्ति रॉकेट होंगे, जिनका गाजा में भारी उपयोग देखा गया था।

अक्टूबर में, अमेरिका ने इजराइल के लिए आयरन डोम एयर डिफेंस सिस्टम के लिए अपनी मिसाइलें भेजी थीं। हमास के लगातार रॉकेट हमले और हिजबुल्लाह और हूतियों के हमलों को काउंटर करने के लिए इजराइल को भारी संख्या में अपने मिसाइलों का इस्तेमाल करना पड़ा है, जिसने इज़राइल के मिसाइल भंडार को इतने खतरनाक स्तर तक कम कर दिया, कि उसने उन सभी तामीर इंटरसेप्टर मिसाइलों का अनुरोध अमेरिका से किया था।

Israel-Hamas War Ceasefire

सुरंग की लड़ाई से पहले आखिरी तैयारी?

इसके अलावा, इन चार दिनों की लड़ाई में इजराइली सेना, जो गाजा पट्टी में फैल चुकी है, उसे भी सुरंग की लड़ाई शुरू करने से पहले आखिरी तैयारी करने का मौका मिलेगा। कुत्तों, रोबोटों, जमीन में घुसने वाले राडार और अन्य तकनीक के बावजूद, हमास के सुरंगों को सिर्फ तभी नष्ट किया जा सकता है, जब इजराइली सैनिक सुरंग के अंदर तक पहुंच जाएं। यह एक खूनी काम है, जैसा कि पिछले हफ्ते साबित हुआ, जब सुरंग का ढक्कन खोलने के बाद एक विस्फोट में चार इजराइली कमांडो मारे गये थे।

कुछ दिन पहले, एक अज्ञात इजरायली अधिकारी ने इज़रायली बलों से जुड़े पत्रकारों को जानकारी देते हुए स्वीकार किया था, कि "हम वहां नहीं जाना चाहते हैं। हम जानते हैं, कि उन्होंने हमारे लिए बहुत सारे साइड बम छोड़ रखे हैं।''

वहीं, लंदन स्थित साप्ताहिक द ज्यूइश क्रॉनिकल ने 16 नवंबर को रिपोर्ट दी थी, कि फिलहाल इजराइली सैनिकों को स्पष्ट आदेश दिए गये हैं, कि "किसी को भी सुरंग में जाने की इजाजत नहीं है।"

नेतन्याहू को युद्धविराम से राजनीतिक नुकसान?

हालांकि, इजराइली सेना के लिए ये युद्धविराम काफी फायदेमंद साबित हो सकता है, लेकिन प्रधानमंत्री नेतन्याहू और उनके समर्थक किसी भी युद्धविराम के सख्त खिलाफ रहे हैं, इसीलिए अब जबकि नेतन्याहू ने युद्धविराम को स्वीकार कर लिया है, तो उनके समर्थकों के बीच उनकी एक कमजोर तस्वीर बनी है।

भले ही बेंजामिन नेतन्याहू अपने समर्थकों को समझाने की कोशिश करें, कि युद्धविराम का फैसला अंतर्राष्ट्रीय प्रेशर में है, फिर भी उनके लिए समर्थकों को समझाना आसान नहीं होगा। और हकीकत ये भी है, कि अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन, जो कि इजराइल के सबसे करीबी सहयोगी हैं, उन्होंने भी युद्धविराम के लिए अपना जोर लगा दिया था, जो इजराइली प्रधानमंत्री के घावों पर नमक छिड़कने जैसा है।

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