‘अब मुझे पापा कौन कहेगा…’, गाजा के इस बदनसीब शख्स ने इजराइली हमलों में 103 रिश्तेदारों को खोया
अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन ने उम्मीद जताई है कि इजराइल-हमास के बीच जंग अगले सोमवार यानी कि 4 मार्च तक युद्धविराम हो सकता है। युद्ध समाप्त होने के बाद ऐसी उम्मीद की जा रही है कि गाजावासी कई महीनों के बाद अपने घर लौट पाएंगे। हालांकि अहमद-अल-गुफरी को अब अपने घर वापस जाने में कोई दिलचस्पी नहीं है।
गाजा जंग में अहमद ने अपने 103 रिश्तेदारों को खो दिया है। इसमें उनकी मां, बीवी, बेटी सहित परिवार के अन्य सदस्य भी शामिल थे। अहमद अल-गुफरी ने कहा कि वो उस बम से चूक गए जिसने उनके परिवार को खत्म कर दिया।

जब गाजा शहर में उनके पारिवारिक घर पर हमले में 103 रिश्तेदार मारे गए, तो वह 50 मील (80 किमी) दूर, जेरिको के कब्जे वाले वेस्ट बैंक शहर में फंस गए थे। अहमद तेल अवीव निर्माण स्थल पर काम कर रहे थे। अहमद कहते हैं कि, "गाजा में मेरा सपना टूट गया, मुझे किसके लिए वापस जाना चाहिए? मुझे पापा कौन कहेगा?"
7 अक्टूबर के बाद अहमद कभी अपने घर नहीं लौट सके। युद्ध और इजराइल की सैन्य नाकाबंदी के कारण वह अपनी पत्नी और तीन युवा बेटियों को फिर से नहीं देख पाए। अहमद ने बीबीसी से बात करते हुए कहा कि वो अपनी पत्नी और बच्चियों से रोज फोन पर बात करते थे।
अहमद ने कहा कि उसकी पत्नी जानती थी कि वो मर जाएगी। उसने फोन पर बातचीत करते हुए कहा था कि यदि उनसे कोई गलती हुई हो तो उन्हें माफ कर दे। हालांकि अहमद ने उसे कहा था कि सब ठीक हो जाएगा। लेकिन 8 दिसंबर को वह आखिरी दिन था जब अहमद की अपनी पत्नी संग बात हुई थी।
इसी दिन इजराइली हमले में अहमद का परिवार मारा गया। 8 दिसंबर की शाम एक बड़े मिसाइल हमले में अहमद की पत्नी और उनकी तीन बेटियां ताला, लाना और नजला की मौत हो गई। इस हमले में अहमद की मां, उसके चार भाइयों और उनके परिवारों के साथ-साथ उसकी दर्जनों चाची, चाचा और चचेरे भाई-बहनो भी मारे गए। कुल मिलाकर 100 से अधिक रिश्तेदारों को अहमद ने खो दिया।
इतने महीनों बाद भी उनके कुछ शव मलबे में फंसे हुए हैं। अहमद ने बताया कि उनकी छोटी बेटी नजला अभी जिंदा होती तो वो पिछले हफ्ते 2 साल की हो गई होती। बीबीसी से अहमद कहते हैं कि, "मेरी बेटियां मेरे लिए छोटी चिड़िया हैं, मुझे ऐसा लग रहा है जैसे मैं सपने में हूं। मुझे अब भी यकीन नहीं हो रहा कि हमारे साथ क्या हुआ है।"
अहमद ने कहा कि उसने अपने फोन और लैपटॉप से अपने परिवार की तस्वीरें हटा दी हैं क्योंकि वो उन्हें अवसाद में चले जाते हैं। अहमद ने बताया कि सबसे पहले एक मिसाइल उनके घर के गेट के पास गिरी थी। इससे घबराकर उनकी पत्नी और बेटियां उनके चाचा के घर चली गईं।
लेकिन ठीक पंद्रह मिनट के बाद एक बड़ा मिसाइल उनके चाचा के घर गिरा जिसमें सभी लोग मारे गए।
जिस चार मंजिला इमारत में यह हमला हुआ, वह गाजा शहर के ज़िटौन इलाके में सहाबा मेडिकल सेंटर के कोने पर स्थित थी। यह अब बिखरे हुए कंक्रीट का एक टीला बन चुका है, जिसके मलबे में हरे रंग का प्लास्टिक का कप, धूल भरे कपड़ों के टुकड़े दबे हैं।
अहमद के जीवित बचे रिश्तेदारों में से एक हामिद अल-गुफरी ने बीबीसी को बताया कि जब हमले शुरू हुए, तो जो लोग पहाड़ी पर भागे वे बच गए लेकिन जिन्होंने घर में शरण ली, वे सभी मारे गए। हामिद ने कहा कि सिर्फ हमारे घर पर ही नहीं बल्कि सभी घर पर हमले हुए। इसराइली फोर्सेस हर 10 मिनट में एक घर पर हमला कर रहे थे।
जिस घर पर हमला हुआ उस घर में गुफेरी परिवार के 110 लोग थे। हमले के बाद कुछ गिनती के लोग बचे और बाकी सभी मारे गए। बचे लोगों का कहना है कि इस हमले में सबसे बड़ी 98 वर्षीय दादी की मौत हो गई वहीं सबसे छोटा बच्चा जो सिर्फ नौ दिन पहले पैदा हुआ था उसकी भी जान चली गई।
अहमद के एक दूसरे रिश्तेदार का कहना है कि इसराइली फोर्सेस बिनी किसी चेतावनी के हमला किए जा रहे थे। अगर कुछ लोगों ने पहले ही यह क्षेत्र नहीं छोड़ा होता, तो सैकड़ों लोग मारे गए होते।












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