G20 summit: भारत को होगा कितना फायदा? इसपर आने वाली लागत जानिए
G20 summit 2023 India benefit: दिल्ली अबतक के अपने सबसे बड़े वैश्विक कार्यक्रम करने के लिए तैयार हो चुकी है। देश में अबतक वैश्विक स्तर पर इतना विशाल कार्यक्रम आयोजित नहीं हुआ है। अभी भारत जी20 की अध्यक्षता कर रहा है, लिहाजा हमारे लिए यह समझना बहुत जरूरी है कि इससे देश को क्या फायदा मिलने वाला है और इसपर लागत कितनी आने वाली है।
दिल्ली में हो रहे जी20 शिखर सम्मेलन (G20 summi) में दुनिया की 85% जीडीपी वाले देशों के नेताओं की जमघट लग रही है। ये देश विश्व की दो-तिहाई आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं। विश्व व्यापार (global trade) में इन देशों की 75% हिस्सेदारी है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC)के 5 स्थाई सदस्यों की भी इसमें मौजूदगी रहेगी।

भारत निभा रहा है वैश्विक जिम्मेदारी
जी 20 या ग्रुप ऑफ 20 अंतरराष्ट्रीय आर्थिक सहयोग का एक प्रमुख मंच है। सभी महत्वपूर्ण आर्थिक मसलों पर यह समूह वैश्विक स्तर पर प्रमुख भूमिका निभाता है। पिछले साल 1 दिसंबर से इस साल 30 नवंबर तक इसकी प्रेसिडेंसी भारत के पास है। यानी इसकी अध्यक्षता करते हुए भारत पर सदस्य देशों के सहयोग से वैश्विक अर्थव्यस्था के विकास को बढ़ावा देने की जिम्मेदारी है।
'अमृतकाल' में आरंभ
भारत के नजरिए से देखें तो इसकी जी20 प्रेसिडेंसी की शुरुआत 'अमृतकाल' के आरंभ के साथ हुई है, जो कि आजादी की 100वीं वर्षगांठ तक देश को मानव केंद्रित दृष्टिकोण पर आधारित भविष्य के लिए इसे एक समृद्ध, समावेशी और विकसित समाज की ओर ले जाने के इरादे के साथ शुरू की गई है।
दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने में मदद
पिछले एक दशक में भारत दुनिया की 10वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था से 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है। लेकिन, अभी भी वैश्विक राजनीति में इसका उतना दखल नहीं बढ़ पाया है। आने वाले कुछ वर्षों में भारत दुनिया की तीसरी सबसे विशाल अर्थव्यवस्था बनने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रहा है, और जानकार मानते हैं कि जी20 शिखर सम्मेलन से इसमें काफी सहायता मिलने की उम्मीद है।
वैश्विक प्रभाव बढ़ाने का रास्ता तैयार
भारत आज ऐसे समय में दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यस्था है, जब विश्व भयानक ध्रुवीकरण के दौर से गुजर रहा है। कई देश कर्ज के बोझ से दब चुके हैं। कोविड के बाद विकास की रफ्तार धीमी पड़ी है और अनिश्चितता बढ़ रही है। लेकिन, तमाम बाधाओं को छोड़कर भारत आज वैश्विक पटल पर नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर पहुंचने वाला विश्व का पहला देश बना है। इससे आर्थिक क्षेत्र के साथ-साथ सामाजिक, पर्यावरण संबंधी और डिजिटल क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर भारत के प्रभाव बढ़ाने की असीम संभावनाएं उपलब्ध हुई हैं।
सभी प्रमुख वैश्विक विषयों में संभावनाओं का विस्तार
पिछले कई महीनों से देश में जो जी20 की बैठकें चल रही हैं, उससे दुनिया भर के नीति-निर्माताओं को भारत की सरकार, अधिकारी और व्यापार जगत के लोगों के काम करने के तरीकों से रूबरू होने का मौका मिला है। इससे वैश्विक वित्तीय जगत और विकास में भारत के प्रभाव बढ़ने का रास्ता खुला है। इन सबका फायदा भारत में निवेश की संभावनाएं बढ़ाने और भारतीय व्यापार के वैश्विक विस्तार में मिलने की उम्मीद है। इससे भारतीय उद्योगों की वैश्विक अहमियत भी बढ़ी है और इसके रास्ते देशी कंपनियों को जलवायु परिवर्तन (climate change) जैसे विषयों में भी दुनिया के सामने अपनी बात रखने के ज्यादा मौके भी मिलने वाले हैं।
चीन के लिए चुनौती बनने की उम्मीद बढ़ेगी
जहां तक डिजिटल दुनिया की बात है तो इसके विकास में भारत आज ऐसे दिलस्प मोड़ पर है, जहां वह चीन समेत अधिकतर देशों से अच्छी स्थिति में है। भारत की डिजिटल टेक्नोलॉजी और डिजिटल टेक्नोक्रेट दुनिया में अपना दबदबा बढ़ाने में सफल हो रहे हैं। ऐसे में जी20 शिखर सम्मेलन इस क्षेत्र में तरक्की की रफ्तार को चार चांद लगाने की क्षमता रखता है। सिर्फ डिजिटल दुनिया में ही नहीं, मैन्युफैक्चरिंग समेत उद्योग के अन्य क्षेत्रों में भी आज भारत चीन के लिए चुनौती बनता जा रहा है और ऐसे समय में यह सम्मेलन होना भारत के लिए बहुत ही फायदेमंद साबित होने जा रहा है।
वैश्विक समस्याओं के खिलाफ एकजुटता से फायदा
इसी तरह से भारत इसके माध्यम से आतंकवाद, साइबर अपराध जैसे अन्य वैश्विक समस्याओं को लेकर दुनिया को जगाने में सफल हो रहा है। भारत जलवायु परिवर्तन, ग्लोबल वार्मिंग की समस्या से निपटने के लिए जितना सक्रिय है, वह विश्व को इसके माध्यम इन मुद्दों पर एकजुट करने के लिए तैयार है।
भारत ने जी20 प्रेसिडेंसी का थीम 'वसुधैव कुटुंबकम' रखा है। रूस-यूक्रेन युद्ध से लेकर पिछले कुछ समय में ऐसी तमाम वैश्विक घटनाएं हुई हैं, जब दुनिया पर भारत की सोच का प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखा है। अब भारत जो कहता है, उसपर विश्व के देश गंभीरता से विचार करते हैं। पीएम मोदी के हाल के एक इंटरव्यू में भारत के प्रति इस बदले नजरिए की झलक भी दिखी है। उन्होंने कहा, विश्व को 'जीडीपी-केंद्रित दृष्टिकोण' से 'मानव-केंद्रित दृष्टिकोण' की ओर बढ़ना पड़ेगा, जिसमें 'सबका साथ सबका विकास' वाला मॉडल दिशा दिखाने का काम कर सकता है।
जी20 पर खर्च
चालू वित्त वर्ष में जी20 प्रेसिडेंसी के लिए केंद्र सरकार ने 990 करोड़ रुपए आवंटित किए हैं। इसके अलावा विदेश मामलों के मंत्रालय के बजट में भी बढ़ोतरी हुई है। जिसका संबंध भारत के जी20 प्रेसिडेंसी से जोड़ा जा सकता है। 2023-24 के बजट में विदेश मंत्रालय के लिए 18,050 करोड़ रुपए का बजट आवंटित किया गया। यह पिछले वित्त वर्ष में आवंटित बजट मुकाबले 17,250 करोड़ रुपए से 800 करोड़ रुपए अधिक है।












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