Imran Khan: क्रिकेट का महान कप्तान, राजनीति के मैदान पर कैसे हुआ परास्त... पाकिस्तानी चक्रव्यूह की कहानी
Imran Khan Politics Analysis: इमरान खान की इस स्टोरी को लिखते वक्त मुझे वो तस्वीरें याद आ रही हैं, जब 1992 का वर्ल्ड कप जीतने के बाद पाकिस्तानी क्रिकेट टीम के खिलाड़ी एक के बाद एक मंच पर आते हैं, और मंच पर मौजूद तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ उनसे हाथ मिलाते हैं, उन्हें कुछ गिफ्ट देते हैं और वो खिलाड़ी फिर मंच से उतर जाते हैं।
उन खिलाड़ियों में इमरान खान भी थे, जिन्हें मंच पर बुलाते हुए नवाज शरीफ काफी खुश थे और इमरान खान भी मुस्कुराते हुए नवाज शरीफ से हाथ मिलाते हैं और फिर नवाज शरीफ, कप्तान इमरान खान की तारीफ में काफी कुछ कहते हैं। इमरान खान मंच से टीम की लड़ने की भावना की तारीफ करते हैं और कहते हैं, कि 'हम हार रहे थे, हमारे समर्थकों ने उम्मीद छोड़ दी थी, लेकिन हमने उम्मीद नहीं छोड़ी।'

एक समय था, जब क्या राजनेता, क्या पाकिस्तान के सैन्य शासक और क्या अवाम.. हर किसी की जुबान पर एक ही नाम था, इमरान खान। और अपनी इसी लोकप्रियता को भुनाने इमरान खान राजनीति में उतर आए।
स्टार क्रिकेटर से लोकलुभावन राजनेता बने इमरान खान ने, देश से भ्रष्टाचार की बेड़ियों को तोड़ने का वादा किया और पाकिस्तान को एक उम्मीद भरे नए युग में प्रवेश कराने की ख्वाब दिखाई।
फिर भी इमरान खान के राजनीतिक करियर के अंतिम दिन एक विपरीत कहानी बताते हैं।
भ्रष्टाचार का दोषी पाए जाने और तीन साल जेल की सजा सुनाए जाने के बाद, पूर्व पाकिस्तानी प्रधान मंत्री को शनिवार को लाहौर शहर में उनके घर से गिरफ्तार कर लिया गया। राजधानी इस्लामाबाद से करीब 80 किलोमीटर पश्चिम में, एक खचाखच भरी जेल में मक्खियों से भरी एक कोठरी में बैठे इमरान खान ने, किसी भी गलत काम में शामिल होने से इनकार किया और ऊपरी अदालत में अर्जी लगाई है।
ये वक्त वक्त की बात है, कि 1992 में इमरान खान पाकिस्तान क्रिकेट टीम के महानतम कप्तान साबित हो गये थे और नवाज शरीफ अपनी पहली सरकार चला रहे थे, लेकिन आज 2023 में नवाज शरीफ लंदन में देश का 'भगोड़ा' बने हुए हैं, तो इमरान खान जेल की कोठरी में बैठकर, जेल ट्रांसफर करने की अर्जी लगा रहे हैं।
हालांकि, नवाज शरीफ के भाई प्रधानमंत्री हैं और इमरान खान का जेल में होना बताता है, कि फिलहाल पाकिस्तान में अब नवाज शरीफ को कोई खतरा नहीं है।
मंगलवार को चुनाव अधिकारियों ने भी इमरान खान पर पांच साल के लिए चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगा दिया।
इमरान खान का आरोप है, कि पाकिस्तान की मौजूदा सरकार ने देश के सेना प्रमुख के साथ मिलकर, उन्हें सत्ता से हटाने की साजिश रची, और उनकी गिरफ्तारी और चुनाव लड़ने से अयोग्यता, राजनीति से प्रेरित है।

देश में काफी लोकप्रिय बन गये थे इमरान
पिछले साल अप्रैल महीने में अविश्वास प्रस्ताव के जरिए इमरान खान को सत्ता से बाहर किया गया था और उन्होंने जिस तरह से कैम्पेन की लीड किया, उसने उन्हें देश में काफी ज्यादा प्रसिद्ध कर दिया। पाकिस्तान के राजनीतिक विश्लेषकों का कहना था, कि इमरान खान उस स्थिति में पहुंच गये थे, कि चुनाव में उन्हें हराना नामुमिकन हो गया था, इसीलिए उन्हें चुनाव से हटाना जरूरी हो गया था।
पाकिस्तान की शक्तिशाली सेना को चुनौती देने वाले कुछ राजनेताओं में से एक, उन्होंने राष्ट्रव्यापी रैलियों में हजारों लोगों को आकर्षित किया, और वो देश को समझाने में कामयाब रहे, कि शरीफ परिवार सालों से भ्रष्टाचार में शामिल होने के बाद भी शासन को जकड़े हुआ है।
इस्लामाबाद के विश्लेषकों का कहना है, कि सेना के साथ एक साल तक चली तनातनी के बाद इमरान खान की गिरफ्तारी उन्हें और उनके समर्थकों को एक स्पष्ट संदेश भेजती है।
इस्लामाबाद स्थित प्रमुख स्तंभकार आरिफ़ा नूर ने कहा, कि "राज्य के पास लोकप्रिय विरोध और सड़क विरोध को कुचलने के तरीके और साधन हैं।" उन्होंने कहा, कि "एक बार जब राज्य सख्त कार्रवाई शुरू कर देता है, तो लोगों को अपनी जान का डर सताने लगता है।"
इमरान खान का राजनीतिक उदय
पाकिस्तान के सबसे लोकप्रिय राजनेताओं में से एक, देश की उस जेल में कैद करके रखा गया है, जो जेल खूंखार आतंकवादियों को रखने के लिए अपनी कठोर सुरक्षा के लिए जाना जाता है।
22 करोड़ की आबादी वाला देश पाकिस्तान, 1947 में भारत से अलग होने के बाद से लगातार, अपनी राजनीतिक और सामाजिक अस्थिरता से जूझ रहा है। इस्लाम के नाम पर जल्दबाजी में बना ये देश, कभी संभल ही नहीं सका और वक्त के साथ यहां कट्टरपंथी ताकतें हावी होती चली गईं।
यह एक ऐसा देश बन गया है, जहां आतंकवादी हमले होते रहते हैं, जहां हर तरफ गरीबी पसरा हुआ है और महिलाओं के खिलाफ हिंसा के लिए कुख्यात है।
आजादी के बाद से किसी भी लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित नेता ने कभी भी पूरे पांच साल का कार्यकाल पूरा नहीं किया है। स्थापना के बाद से ही पाकिस्तान के ऊपर, या तो स्थापित राजवंशों ने या फिर सैन्य तानाशाहों ने शासन किया है।
विश्लेषकों का कहना है कि दशकों के कथित भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद ने इसकी आबादी के एक बड़े हिस्से को मताधिकार से वंचित कर दिया है, जो पाकिस्तान की जनता, अपने काले अतीत से पीछा छुड़ाने के लिए एक ऐसे नेता की तलाश कर रहे थे, जो उन्हें भ्रष्ट शासन व्यवस्था से मुक्ति दिलाएगा।
1952 में लाहौर के एक संपन्न परिवार में जन्मे इमरान खान, जिन्होंने ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से दर्शनशास्त्र, राजनीति और अर्थशास्त्र में प्रतिष्ठित शिक्षा और डिग्री प्राप्त की थी, उन्हें देश में एक स्वच्छ और राष्ट्रवादी सरकार की स्थापना करने वाले एक नायक के रूप में देखा गया।
उन्होंने पाकिस्तान की राष्ट्रीय टीम के दुर्जेय कप्तान के रूप में क्रिकेट पिच पर अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त की, जिससे देश को 1992 में एकमात्र विश्व कप जीत मिली। दो साल बाद, इमरान खान ने अपनी मां की याद में एक कैंसर अस्पताल और रिसर्च केंद्र खोला, जिनकी मृत्यु 1985 में हो गई थी, लिहाज इमरान खान का राजनीतिक प्रोफाइल और ऊंचा हो गया।
जब उन्होंने ब्रिटिश पत्रकार जेमिमा गोल्डस्मिथ से शादी की, तो उनके करिश्माई आकर्षण और प्लेबॉय जीवनशैली ने उन्हें अखबारों का हेडलाइंस बना दिया, हालांकि बाद में दोनों का तलाक हो गया।
जैसे-जैसे देश में उनका प्रभाव बढ़ता गया, इमरान खान की नज़रें राजनीति पर टिकने लगी।
1992 में वर्ल्ड कप में जीत हासिल करने के 4 सालों के बाद उन्होंने 1996 में पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई), की स्थापना की और 2002 के संसदीय चुनाव में उनकी पार्टी ने एक सीट पर जीत हासिल की।
इमरान खान अब राजनीति में पैर जमाने लगे थे और अपनी प्ले-बॉय छवि से पीछा छुड़ाते हुए, अब धार्मिक व्यक्ति बन गये। उनकी रैलियों में अब राजनीति के साथ साथ इस्लाम की बातें होने लगीं और 2014 में उनकी राजनीतिक लोकप्रियता ऊंचाऊ तक पहुंच गई, जब उन्होंने नवाज शरीफ की पीएमएल-एन पार्टी पर चुनाव में धांधली का आरोप लगाते हुए विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व किया।
आखिरकार, करीब दो दशकों तक राजनीतिक हाशिए पर रहने के बाद, इमरान खान 2018 में प्रधान मंत्री चुने गए।
गरीबी और भ्रष्टाचार मिटाने की कसम खाते हुए उन्होंने देश के लाखों लोगों से "नया पाकिस्तान" बनाने का वादा किया।

उतार-चढ़ाव भरा कार्यकाल
एक बार पद पर आसीन होने के बाद इमरान खान को नेता के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान कई बाधाओं का सामना करना पड़ा। बढ़ती महंगाई से लेकर वैश्विक महामारी तक, उनकी सरकार विदेशी मुद्रा में रिकॉर्ड गिरावट से जूझ रही थी, जिससे देश आर्थिक पतन के कगार पर पहुंच गया।
पाकिस्तान और पड़ोसी भारत के बीच बढ़ती शत्रुता के कारण 2019 में दोनों परमाणु सशस्त्र राज्यों के बीच युद्ध की नौबत तक आ गई, लेकिन भारत के साथ गतिरोध इमरान खान के कार्यकाल के आखिर तक चला, जबकि सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा चाहते थे, कि इमरान खान भारत से बात करे और इमरान खान, भारत से रिश्ते सुधारे।
वहीं, तालिबान के प्रति उदारता बरतने के लिए उनकी पूरी दुनिया में आलोचना की गई। उन्होंने अफगानिस्तान की समस्या के लिए अमेरिका को दोषी ठहराया और तालिबान शासन को मान्यता और मदद देने की सैकड़ों बार वैश्विक समुदाय से अपील की।
धीरे धीरे इमरान खान की अपने सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा से रिश्ता बिगड़ने लगा और पिछले साल अप्रैल में उन्हें अविश्वास प्रस्ताव के जरिए सत्ता से बाहर कर दिया गया।
सत्ता से हटने से पहले और बाद में, उन्होंने दर्जनों बार दावा किया, कि उन्हें अमेरिका के इशारे पर हटाया गया और धीरे धीरे उनके रिश्ते सेना और सरकार के साथ काफी ज्यादा खराब गये। मई महीने की 9 तारीख को पाकिस्तान उस वक्त गृहयुद्ध के कगार पर पहुंच गया, जब इमरान खान को भ्रष्टाचार के मामले में गिरफ्तार कर लिया गया।
पाकिस्तान के प्रधान मंत्री शहबाज शरीफ ने इमरान खान के समर्थकों को "आतंकवादी" कहा, और कड़ी सजा दिलाने की कसम खाई। सेना ने असहमति पर कार्रवाई करते हुए सैकड़ों प्रदर्शनकारियों और इमरान खान के राजनीतिक दल के नेताओं को गिरफ्तार कर लिया। इमरान खान के खिलाफ भी आतंकवादी धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया।
इमरान के साथ आगे क्या होगा?
शनिवार को आया ये फैसला, इमरान खान के दो दशक पुराने राजनीति के अंत की तरफ इशारा करता है, हालांकि उन्होंने अपनी लड़ाई जारी रखने की कसम खाई है।
अपनी गिरफ्तारी से पहले रिकॉर्ड किए गए एक वीडियो में, इमरान खान ने समर्थकों से अपनी "स्वतंत्रता और मानवाधिकारों" को सुनिश्चित करने के लिए शांतिपूर्वक विरोध करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, कि वह "पाकिस्तान के बच्चों के भविष्य" के लिए इस "संघर्ष" से गुजर रहे हैं।
लेकिन, इस बार उनके समर्थक घर से बाहर नहीं निकले।
इमरान खान के चुनाव लड़ने पर पांच सालों के लिए प्रतिबंध लगा दिया गया और उनकी पार्टी के तमाम बड़े नेता, अब उनका साथ छोड़ चुके हैं।
हालांकि, विश्लेषकों का मानना है, कि इमरान खान को गलत सजा मिली है और जज ने उन्हें अधिकतम सजा सुनाई है। संवैधानिक वकील सालार खान ने कहा, कि इमरान खान को "अधिकतम सजा दी गई है।" उन्होंने कहा, कि उनकी टीम को अपना बचाव तैयार करने के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया गया।
लेकिन पाकिस्तान सरकार ने कहा है, कि उनकी गिरफ्तारी "राजनीतिक उत्पीड़न का मुद्दा नहीं है" और अदालत ने "निर्धारित कानूनी कार्यवाही के बाद" अपना फैसला सुनाया है।
उनकी गिरफ्तारी के बाद शहबाज सरकार ने ऐलान किया है, कि अगले साल मार्च तक देश में चुनाव होंगे, जबकि अक्टूबर में चुनाव हो जाने चाहिए थी।
हालांकि खान इस साल चुनाव नहीं लड़ पाएंगे, लेकिन विश्लेषकों का कहना है कि इमरान खान की वापसी से इनकार करना नासमझी होगी।
पाकिस्तान के राजनीतिक विश्लेषक नूर ने पिछले मामलों की ओर इशारा करते हुए कहा, "राजनीति में इमरान खान की कहानी पाकिस्तान में किसी भी राजनेता का प्रतीक है। जहां लोकतांत्रिक रूप से चुने गए नेताओं को सत्ता से बाहर कर दिया जाता है। हालांकि, इतिहास गवाह है कि बाहर किए जाने के बाद वे "और अधिक लोकप्रिय होकर लौटते हैं।"
नूर ने कहा, कि "लोगों का समर्थन पाने वाले सभी राजनेता पाकिस्तान में वापसी करते हैं और फिलहाल, इमरान खान का अंत हो गया है, ये कहना नासमझी होगी।"












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