France: 2026 में बच्चों के लिए बड़ा कानून ला रहे मैक्रों, सोशल मीडिया पर लगेगी लगाम, भारत में कब जागेगी सरकार?
France एक बार फिर 15 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर बैन लगाने की तैयारी कर रहा है। स्थानीय मीडिया और समाचार एजेंसियों के अनुसार, फ्रांसीसी सरकार 2026 तक इस बैन को लागू करने की कोशिश करेगी। इससे पहले भी फ्रांस ने स्कूलों में छोटे बच्चों के मोबाइल फोन इस्तेमाल पर रोक लगाई थी, लेकिन इस नियम को सख्ती से लागू नहीं किया जा सका था।
2023 में आया था कानून, क्यों हुआ फेल?
फ्रांस की सरकार ने साल 2023 में भी 15 साल की "डिजिटल कानूनी आयु" तय करने की कोशिश की थी। इसका मतलब था कि 15 साल से कम उम्र के बच्चे सोशल मीडिया का इस्तेमाल नहीं कर सकते। हालांकि, यह कानून यूरोपीय संघ (EU) के नियमों से टकरा गया, जिस वजह से इसे पूरी तरह लागू नहीं किया जा सका। कुछ लोगों का कहना था कि "यह इंटरनेट को पूरी तरह बंद करने जैसा नहीं है, बल्कि बच्चों की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम है।"

डिजिटल स्क्रीन से बच्चों को होने वाले खतरे
समाचार एजेंसी AFP ने दावा किया है कि उसने इस नए कानून का मसौदा देखा है, जिसे राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों का समर्थन हासिल है। इस मसौदे में कई अध्ययनों का हवाला दिया गया है, जिनमें बताया गया है कि ज्यादा स्क्रीन टाइम बच्चों और किशोरों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है। फ्रांसीसी मीडिया के मुताबिक, यह मसौदा कानून जनवरी की शुरुआत में कानूनी जांच के लिए भेजा जा सकता है और सितंबर 2026 तक इसके लागू होने की संभावना है।
मैक्रों कर सकते हैं बड़ा ऐलान
अखबार 'ला मोंडे' की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति मैक्रों बुधवार को अपने नए साल की पूर्व संध्या पर दिए जाने वाले लाइव संबोधन में इस योजना की घोषणा कर सकते हैं। मसौदा कानून में कहा गया है कि बिना किसी रोक-टोक के इंटरनेट इस्तेमाल बच्चों को अडल्ट कॉन्टेंट के संपर्क में लाता है और वे साइबरबुलिंग जैसे खतरों का भी शिकार हो सकते हैं।
15 साल से कम उम्र के लिए सेवाएं देना होगा अवैध
प्रस्तावित कानून के तहत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए 15 साल से कम उम्र के बच्चों को अपनी सेवाएं देना गैरकानूनी होगा। इसके साथ ही, स्कूलों में मोबाइल फोन पर पहले से लगे प्रतिबंध को अब हाई स्कूलों तक बढ़ाने की योजना भी शामिल है।
भारत में छिड़ी बहस
ऑस्ट्रेलिया के बाद फ्रांस नाबालिग बच्चों के कंटेंट बनाने और अडल्ट कंटेंट देखने के प्रति संवेदनशील हो रहा है। साथ ही मोबाइल के इस्तेमाल से होने वाले खतरों को समझ रहा है। लेकिन भारत में सरकार के अंदर इस तरह की कोई तैयारी नहीं दिख रही है। इसे लेकर अब भारत में सोशल मीडिया पर बड़ी बहस छिड़ गई है। लोगों का कहना है कि भारत सरकार को भी इस बारे में सोचना चाहिए।
2018 से शुरू हुआ मोबाइल बैन
साल 2018 में फ्रांस ने प्री-स्कूल और मिडिल स्कूलों (11 से 15 साल के बच्चों) में मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर रोक लगा दी थी। हालांकि, स्थानीय मीडिया के मुताबिक इस नियम का पालन हर जगह एक जैसा नहीं हो पाया और कई स्कूलों में इसे ढीले तौर पर लागू किया गया।
किशोरों के स्क्रीन टाइम पर लगाम
इस महीने की शुरुआत में फ्रांस के ऊपरी सदन, सीनेट ने एक नई पहल का समर्थन किया। इसके तहत 13 से 16 साल के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर रजिस्ट्रेशन से पहले माता-पिता की अनुमति अनिवार्य करने की बात कही गई है।
सर्वे में दिखी साफ राय
सितंबर में आए IPSOS सर्वे के मुताबिक, फ्रांस के चार में से पांच नागरिक चाहते हैं कि 14 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाया जाए। इससे साफ है कि आम लोग भी बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर गंभीर हैं।
न्यूनतम उम्र तय करने की मांग
यूरोपीय संघ में भी इस मुद्दे पर बहस तेज हो गई है। पिछले महीने यूरोपीय संसद ने ब्रुसेल्स से आग्रह किया कि सोशल मीडिया इस्तेमाल के लिए न्यूनतम उम्र तय की जाए, ताकि अत्यधिक ऑनलाइन मौजूदगी से किशोरों में बढ़ रही मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से निपटा जा सके।
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