F-35: भारत आएगा दुनिया का सबसे शक्तिशाली लड़ाकू विमान! क्या अमेरिका देगा इंडियन एयरफोर्स को कॉम्बो ऑफर?
F-35 In Tarang Shakti: साल 2004 में भारतीय वायुसेना (Indian Air Force) ने मेगा वॉरगेम्स के साथ अपनी ताकत का प्रदर्शन किया था और उसके बाद से लगातार कई हवाई अभ्यास किए गये हैं। एक बार फिर से वायुसेना 'तरंग शक्ति' के साथ युद्धाभ्यास करने जा रही है।
ऐसी रिपोर्ट है, कि भारत में होने वाले मल्टीनेशनल एयर एक्सरसाइज में अमेरिका अपना फिफ्थ जेनरेशन फाइटर जेट f-35 भेज सकता है और भारत, जिसने अभी पांचवी पीढ़ी के लड़ाकू विमान बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया ही है, उसके बेड़े में पांचवी पीढ़ी का विमान ना होना, बड़ी कमी को दर्शाता है।

तरंग शक्ति युद्धाभ्यास में F-35 लड़ाकू विमान?
अगर F-35A भारत में होने वाले तरंग शक्ति में भाग लेता है, तो यह दूसरी बार होगा, जब लाइटनिंग II भारतीय आसमान में उड़ान भरेगा। F-35A लाइटनिंग II भारत में पहली बार एयरो-इंडिया 2023 में भाग लेने पहुंचा था।
अमेरिका भी भारत को अपना सर्वश्रेष्ठ एफ-16 फाइटिंग फाल्कन, एफ-21 बेचने के लिए प्रचार कर रहा है। अमेरिका ने F-21 को F-35 लड़ाकू विमान भारत को बेचने की दिशा में पहला कदम बताया है। लेकिन सवाल यह है, कि क्या भारत अमेरिकी फाइटर जेट खरीदने की दिशा में विचार कर रहा है?
ऐसा इसलिए, क्योंकि भारत सरकार ने पिछले महीने ही एडवांस मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) बनाने के लिए उसके डिजाइन और निर्माण को हरी झंडी दी है। AMCA प्रोजेक्ट का लक्ष्य ही भारतीय वायुसेना के लिए पांचवी पीढ़ी का लड़ाकू विमान बनाना है।
भारतीय प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में सुरक्षा पर कैबिनेट समिति ने प्रोटोटाइप के डिजाइन के लिए 15,000 करोड़ रुपये (2 अरब डॉलर) आवंटित किए हैं, जिसमें 110 kN की क्षमता वाला स्वदेशी जेट इंजन लगाया जाएगा।

भारत के पास कम हुई स्क्वाड्रन क्षमता
दिक्कत ये है, कि भारतीय वायुसेना, जिसे लड़ाकू जेट विमानों के 42 स्क्वाड्रन की जरूरतक है, उसके पास फिलहाल जरूरत से काफी कम, सिर्फ 31 स्क्वाड्रन ही बचे हैं। लिहाजा, इंडियन एयरफोर्स ने तत्काल फाइटर जेट्स की जरूरत से सरकार को बार बार वाकिफ करवाया है। हालांकि, भारत सरकार ने 114 मीडियम मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (MRFA) के लिए टेंडर भी जारी कर दिया है, लेकिन फाइल अभी भी साउथ ब्लॉक में बैठे भारतीय रक्षा मंत्रालय से 'आवश्यकता की स्वीकृति' का इंतजार कर रहा है।
अगर इजाजत मिल जाती है, तो इंडियन एयरफोर्स को फाइटर जेट बनाने वाली अमेरिकी कंपनी लॉकहीड मार्टिन के साथ साथ भारत के लिए स्पेशल डिजाइन किए गये F-21, F-15E, स्वीडिश ग्रिपेन-ई और रूसी Su-35 का भी ऑफर मिल सकता है, जो MRFA विमान हैं।
दुनिया की सबसे बड़ी डिफेंस मैन्युफैक्चर कंपनी लॉकहीड मार्टिन ने भारत में F-21 के निर्माण के लिए भारत के प्रमुख औद्योगिक घराने, टाटा के साथ साझेदारी की है। इस कदम का उद्देश्य, भारत सरकार की आवश्यकताओं को पूरा करना है, जो भारतीय एयरोस्पेस उद्योग को मजबूत करना चाहती है।
क्या भारत में होगा F-16 लड़ाकू विमान का निर्माण?
डिफेंस एक्सपर्ट्स के मुताबिक, चुनाव के बाद रक्षा मंत्रालय से विमानों की खरीद को मंजूरी मिल सकती है और मंजूरी मिलने के बाद इंडियन एयरफोर्स को लड़ाकू विमान मिलने में कम से कम 6 से 8 साल लग जाएंगे। दूसरी तरफ, भारतीय एयरोस्पेस निर्माताओं का दावा है, कि तेजस MK-2 को भी एयरफोर्स के बेड़े में शामिल होने के लिए तैयार होने में इतना ही समय लगेगा।
यूरेशियन टाइम्स की एक रिपोर्ट में भारतीय वायुसेना के पूर्व उप प्रमुख एयर मार्शल अनिल खोसला ने कहा है, कि स्वदेशी तेजस बनाना आसान है, लेकिन संतुलित ताकत बनाए रखने के लिए नई पीढ़ी के मल्टीपर्पस विमानों की जरूरत है, जब तक की तेजस MK-1 और AMCA लड़ाकू विमान तैयार नहीं हो जाते हैं।
उन्होंने कहा, कि "MRFA लड़ाकू विमान खरीदने की जरूरत है (शायद डिफेंस खर्च की अगली किस्त में)। इन्हें चरणों में खरीदा जाना चाहिए (शायद एक समय में 2 या 3 स्क्वाड्रन)। इससे खर्च बंट जाएगा और बाद में हमें बेहतरीन टेक्नोलॉजी और सुविधाएं मिलेंगी।"
F-21, F-16 ब्लॉक 70 का एक वेरिएंट है, और जब ये एयरो-इंडिया 2023 में पहुंचा था, तो इसे भारतीय वायुसेना की परिस्थितियों के हिसाब से ढालकर भेजा गया था। इसे बेचने के लिए जो ऑफर दिया गया था, उसमें एक एडवांस APG-83 सक्रिय इलेक्ट्रॉनिक स्कैन्ड ऐरे (AESA) रडार लगाने का वादा किया गया था, जिसमें स्कैन करने की क्षमता, पिछले रडार के मुकाबले दोगुनी है। इसके अलावा, उसमें ज्यादा से ज्यादा लक्ष्यों का पता लगाने और एकसाथ हमला करने की भी क्षमता थी।
इसके अलावा, F-21 में ट्रिपल मिसाइल लॉन्चर एडेप्टर (TMLAs) होंगे, जो इसे पिछले F-16 डिजाइनों की तुलना में 40 प्रतिशत ज्यादा हवा से हवा में मार करने वाले हथियार ले जाने के काबिल बनाते हैं।
एयर मार्शल खोसला के मुताबिक, " F-21 एक एडवांस, सिंगल-इंजन, बहु-भूमिका वाला लड़ाकू विमान है, जिसका लाइफ साइकिल काफी बढ़िया है। इसकी हवाई जीवन 12 हजार उड़ान घंटे है और एफ-21 दुनिया का एकमात्र लड़ाकू विमान है जो प्रोब/ड्रॉग (दुनिया में सबसे अधिक इस्तेमाल किया जाने वाला) और बूम (यूएसएएफ मानक) हवाई ईंधन भरने की क्षमताओं से लैस है।
इसके अलावा, इसका सबसे बड़ा फायदा ये है, कि टाटा लॉकहीड मार्टिन एयरोस्ट्रक्चर लिमिटेड में समझौता हुआ है, जिसे एफ-16 लड़ाकू विमानों के लिए पार्ट्स का निर्माण करना है और अगर इसे MRFA कॉन्ट्रैक्ट मिलता है, तो वो भारत में भी इसका निर्माण करेगा।
क्या भारत को F-35 Lightning में दिलचस्पी है?
F-35A अमेरिकी वायु सेना का लेटेस्ट, अत्यधिक एडवांस मल्टी पर्पस, सुपरसोनिक, स्टील्थ पांचवीं पीढ़ी का लड़ाकू विमान है। दुनिया में एफ-35 से बेहतर अभी कोई लड़ाकू विमान नहीं है और ये हर तरह के हवाई हमले से संबंधित मिशनों को अंजाम दे सकता है, और कोई भी रडार इसे ट्रैक नहीं कर सकता है। इसके अलावा, ये इलेक्ट्रॉनिक युद्ध, खुफिया काम और सर्विलांस करने में भी माहिर है।
ना सिर्फ ये सवाल, कि क्या अमेरिका एफ-35 लड़ाकू विमान को भारत को बेचना चाहता है, इससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण सवाल ये है, कि क्या एफ-35 भारत की रणनीतिक हिसाब-किताब में फिट बैठता है? एक्सपर्ट्स का मानना है, कि यह हथियारों की खरीद में आत्मनिर्भर होने की भारतीय योजना के मुताबिक नहीं है।

तुर्की के रूस से एस-400 मिसाइल खरीदने के बाद अमेरिका ने एफ-35 के प्रोजेक्ट से उसे बाहर कर दिया, और भारत ने हाल ही में रूसी वायु रक्षा प्रणाली को भी शामिल किया है। लिहाजा, क्या यह अमेरिका के लिए डील ब्रेकर साबित होगा?
इसके अलावा, दूसरी स्थिति ये है, कि भारत के दोनों दुश्मन, चीन और पाकिस्तान पांचवी पीढ़ी के लड़ाकू विमान हासिल कर चुके हैं। पाकिस्तान ने इसी साल जनवरी में घोषणा की थी, कि वो चीन से FC-31 फाइटर जेट खरीद रहा है। लिहाजा, भारत के लिए ये एक बड़ी चिंता की बात है।
इसके अलावा, चीन से मुकाबला करने की स्थिति में आने के लिए भारतीय वायुसेना को अभी काफी ज्यादा संख्या में लड़ाकू विमानों की जरूरत होगी। लेकिन, इंडियन एयरफोर्स को अभी भी मौजूदा भारत सरकार को यह समझाने की ज़रूरत है, कि केवल इतनी बड़ी संख्या में आयातित विमान ही जरूरत को पूरा कर सकते हैं।
घटती लड़ाकू जेट, स्क्वाड्रन बल के लिए चिंता का विषय रही है। भारतीय वायुसेना के एक प्रतिनिधि ने 2023 में रक्षा पर एक संसदीय स्थायी समिति को बताया था, कि एयरफोर्स के पास 42 की स्वीकृत ताकत के मुकाबले सिर्फ 31 लड़ाकू जेट स्क्वाड्रन हैं, लिहाजा भारत को जल्द किसी नतीजे पर पहुंचना होगा।












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