Iran Oil Game: Trump-Netanyahu की आंख में धूल झौंककर, ईरान कैसे होर्मुज पर छाप रहा पैसा? भारत-चीन का क्या रोल?
Iran Oil Game: लगभग आधी सदी तक मिडिल ईस्ट के देशों ने खुद को सस्ते और भरोसेमंद तेल सप्लायर के रूप में पेश किया है, लेकिन अब चल रहे तीसरे खाड़ी युद्ध के पांचवें हफ्ते में ये सीरीज पूरी तरह टूट गई है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बड़े पैमाने पर बंद होने से दुनिया का लगभग 15% तेल अपने ग्राहकों तक नहीं पहुंच पा रहा है। लिहाजा सभी खाड़ी देशों ने उत्पादन घटा दिया है, जब माल बिक नहीं रहा तो नया माल बनाएं क्यों।
ईरान छोड़कर सबकी गिरी कमाई
इजरायल और अमेरिका ईरान पर नकेल कसने के सपने भी देख रहे थे लेकिन साथ में उनके पार्टनर भी पिस गए। इस युद्ध में ईरान को छोड़कर बाकी खाड़ी देशों की कमाई बुरी तरह गिरी है जबकि ईरान ने बता दिया कि युद्ध जितना लंबा खिंचेगा वह उतना ज्यादा पैसा पीट देगा।

जो खेल आता नहीं था वो नहीं खेला
दरअसल जब इजरायल और अमेरिका ने ईरान पर साझा हमले किए तो उन्हें लगा कि वह ईरान को तोड़ देंगे और ईरान की मिसाइलें उन तक पहुंचेंगी नहीं। लेकिन ईरानी तो ईरानी हैं, उनका IQ दुनिया में सातवें नंबर पर है जो अमेरिका और इजरायल दोनों से काफी ऊपर है। लिहाजा उन्होंने काम भी वैसा ही किया। उन्होंने वो खेल खेला ही नहीं जो उन्हें आता नहीं था। उन्होंने अमेरिका पर एक भी डायरेक्ट हमला नहीं किया बल्कि उसके उन सैन्य अड्डों को निशाना बनाया जो खाड़ी देशों में हैं, साथ ही इन सभी खाड़ी देशों को तेल और गैस फैसिलिटीज पर भी कहर बरपाया।
सीधे गर्दन पर वार
ईरान की स्ट्रेटजी देखकर पता लगता है कि उसे पहले दिन से पता था कि क्या करना है। उसने किया भी वही, सीधा गर्दन दबोची। ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मूज पर हर उस जहाज को टारगेट पर ले लिया जो बिना उसकी मर्जी के जा रहा था या जा रहा है। अब ईरान इन मुश्किल हालातों के बावजूद एक अपवाद बनकर उभरा है। खाड़ी का वह अकेला देश है जिसके टैंकर लगातार स्ट्रेट ऑफ होर्मूज से गुजर रहे हैं और तेल भी सप्लाई कर रहे हैं।
रोजाना दोगुना पैसा कमा रहा ईरान
ईरान अब तेल बेचकर रोजाना लगभग दोगुना कमा रहा है। यानी कि 28 फरवरी के पहले वह 100 रुपए प्रतिदिन कमा रहा था तो अब 200 रुपए प्रतिदिन कमा रहा है। मजे की बात देखिए कि युद्ध में भले ही वह दबाव में हो, लेकिन एनर्जी वॉर में वह आगे दिख रहा है। ईरान कितने बैरल तेल एक्सपोर्ट कर रहा है, इसका सटीक डेटा निकालना मुश्किल हो गया है। उसके टैंकर अब ज्यादा गुप्त तरीके से चलते हैं। सैटेलाइट इमेजरी कम हो गई है और इलेक्ट्रॉनिक इंटरफेरेंस के कारण ट्रैकिंग भी कठिन हो गई है।
एक विश्वसनीय सोर्स के मुताबिक, ईरान फिलहाल रोजाना 2.4 से 2.8 मिलियन बैरल तेल और पेट्रोलियम उत्पाद निर्यात कर रहा है। इसमें 1.5 से 1.8 मिलियन बैरल कच्चा तेल है। जो कि पिछले साल के औसत के बराबर या उससे ज्यादा है, और खास बात यह कि अब यह तेल ज्यादा कीमत पर बिक रहा है। इसलिए तेल एक्सपोर्ट की मात्रा में भले ही थोड़ी सी बढ़ोतरी हुई पर तेल महंगा बिकने के से तिजोरी दोगुनी रफ्तार से भर रही है।
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डॉलर के मुकाबले युआन में किया व्यापार
ईरान ये व्यापार ईरानी करंसी या डॉलर में नहीं बल्कि चाइनीज करंसी युआन में कर रहा है जिससे ट्रंप की और सुलग रही है। ईरान की तेल से होने वाली कमाई का बड़ा हिस्सा IRGC के पास जा रहा है। IRGC के पास ही सत्ता की असली कमान इस वक्त में कही जा सकती है। वहीं China इस पैसे के फ्लो को बनाए रखने में मदद कर रहा है, और ईरान का "वॉर फंड" एशिया में सुरक्षित रखा गया है। ईरान का तेल व्यापार तीन चीजों पर चलता है: सेल्स नेटवर्क, शिपिंग सिस्टम और शैडो बैंकिंग। जिसमें सरकारी कंपनी National Iranian Oil Company (NIOC) नाम के लिए एक्सपोर्ट संभालती है, लेकिन असल में कई सरकारी और गैर-सरकारी समूह तेल बेचते हैं।
पूरे सिस्टम को कर दिया डिसिंक्रोनाइज
ईरान में करीब 20 ताकतवर लोग तेल के इस पूरे नेटवर्क को कंट्रोल करते हैं। जिसमें अलग-अलग सरकारी विभागों से लेकर धार्मिक संस्थानों को तेल दिया जाता है और ये सभी ग्रुप अपने-अपने नेटवर्क के जरिए बेचते हैं। मतलब तेल बेचना भी डिसिंक्रोनाइज कर दिया है। कोई ग्रुप टूटेगा भी तो उसका असर तेल के एक्सपोर्ट पर नहीं पड़ेगा।इस नेटवर्क में Ali Shamkhani जैसे बड़े नाम शामिल रहे हैं। उनके बेटे हुसैन शिपिंग और ट्रेडिंग बिजनेस संभालते हैं।
कार्गो की सुरक्षा के लिए क्या किया?
Mojtaba Khamenei से जुड़े समूह भी तेल व्यापार में जबरदस्त एक्टिव हैं। IRGC ने शिपिंग सिस्टम पर भी मजबूत पकड़ बना ली है। यह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और खाड़ी के बड़े हिस्से में ट्रांसपोर्ट और कम्युनिकेशन कंट्रोल कर रहा है। कई कंपनियां जैसे सहंद, सहारा थंडर और पासरगार्ड भी इसी नेटवर्क का हिस्सा हैं। ईरानी टैंकरों में 150 से 200 मिलियन डॉलर तक का कार्गो होता है। इसलिए उन्हें सुरक्षित रखने के लिए खास इंतजाम किए जाते हैं।
बीच समुंदर में नहीं, किनारे से जाते हैं टैंकर
खार्ग आईलैंड से निकलने वाले जहाज अब इमरजेंसी सिस्टम के साथ चलते हैं ताकि हमले की स्थिति में तुरंत निकल सकें। दूसरी तरफ अमेरिका ने खार्ग द्वीप पर हमले किए हैं और कब्जे की धमकी दी है। इससे निपटने के लिए ईरान ने जास्क, लावान और सिरी जैसे टर्मिनलों को सक्रिय कर दिया है, जो मिलकर कुल निर्यात का 25% संभाल सकते हैं।
सप्लाई कैसे हो रही है, वो भी समझ लीजिए। दरअसल हर जहाज को IRGC से पासकोड लेना पड़ता है। इसके बाद होर्मूज के पास पहुंचने पर यह कोड रेडियो के जरिए वेरिफाई किया जाता है और तब जाकर IRGC की नावें जहाजों को एस्कॉर्ट करती हैं। एक और चीज, पहले टैंकर बीच रास्ते से गुजरते थे लेकिन अब किनारे के करीब से गुजरते हैं, जहां ज्यादा निगरानी होती है।
चीन खरीद रहा 90% तेल
कुछ मामलों में टैंकरों से लाखों डॉलर का टोल भी लिया जाता है और वे चुपचाप दे भी रहे हैं। ईरान अपने तेल की पहचान छुपाने के लिए कई तरीके अपनाता है जैसे जहाजों की पहचान बदलना, दस्तावेजों में हेरफेर और लोकेशन छुपाना। कई बार खुले समुद्र में तेल दूसरे जहाजों में ट्रांसफर किया जाता है। अब आते हैं कि खरीददार कौन कौन हैं ।
मुनाफा घटना लेकिन सप्लाई जारी
ईरान का 90% से ज्यादा तेल China खरीदता है। खासकर शेडोंग की छोटी "टीपॉट" रिफाइनरियां इस तेल को प्रोसेस करती हैं। पहले ईरान का तेल ब्रेंट से $18-24 सस्ता मिलता था, लेकिन अब यह अंतर घटकर $7-12 रह गया है। कुछ मामलों में ईरानी तेल ब्रेंट से भी महंगा हो गया है। चीन में कीमतों पर सरकारी कंट्रोल होने के कारण रिफाइनरियों का मुनाफा घट गया है। लेकिन सप्लाई जारी रहने की खुशी है।
पेमेंट लेने का सिस्टम बनाया गजब
ईरान ने पेमेंट लेने का सिस्टम भी गजब बना रखा है। पैसे "ट्रस्ट अकाउंट्स" के जरिए छोटे बैंकों में ट्रांसफर होते हैं और इनके खाते शैल कंपनियों के नाम पर होते हैं जिससे पता नहीं चल पाता। इसके बाद ईरान का तेल से कमाया गया पैसा चीन, भारत, तुर्की और अन्य देशों में ट्रांसफर किया जाता है। जबकि कुछ पैसा चीन में ही रखा जाता है ताकि आयात के लिए इस्तेमाल हो सके। यह पूरा नेटवर्क इतना उलझा हुआ है कि इसे ट्रैक करना बेहद मुश्किल है।
कई अकाउंट्स से रोटेट हो रहा पैसा, पकड़ना नामुमकिन
हजारों अकाउंट्स के जरिए पैसा इधर-उधर किया जाता है, जिससे यह सिस्टम युद्ध के झटकों को झेल पाता है। पहले यूएई भी इसमें एक हिस्सेदार था लेकिन युद्ध के बाद ईरान ने उससे वास्ता खत्म कर लिया। अब लेन-देन और ज्यादा गुप्त तरीके से हो रहे हैं, जिसमें कई लेयर की फर्जी कंपनियां शामिल हैं। कुछ अकाउंट्स से अरबों डॉलर निकालकर दूसरी जगह शिफ्ट किए जा रहे हैं।
यूरोप तक फैले बैंक अकाउंट
ईरान के बैंक अकाउंट्स अब पूर्वी एशिया, ब्रिटेन, जर्मनी, जॉर्जिया, इटली और रोमानिया तक फैले हुए हैं। यह नेटवर्क इतना बड़ा है कि इसे रोकना लगभग नामुमकिन है। इतनी उलझी हुई व्यवस्था के चलते ईरान का तेल कारोबार बंद करना बेहद मुश्किल है। जब तक उसके पूरे ऊर्जा ढांचे पर हमला नहीं होता, तब तक यह सिस्टम चलता रहेगा भले ही युद्ध कितना भी लंबा क्यों न हो। तो जब सब खो रहे हैं तब ईरान पैसा छाप रहा है।
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