बहुत बड़े झूठे निकले इमरान खान, जिस US अधिकारी पर लगाया सरकार गिराने का आरोप, उससे मांगी माफी

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा कि, डोनाल्ड लू के साथ पीटीआई नेता की मुलाकात और अमेरिकी सरकार से माफी मांगने के सबूत हैं।

इस्लामाबाद, जुलाई 04: पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान अपने बड़बोलेपन और घमंड के लिए जाने जाते हैं, लेकिन इमरान खान अपनी जनता के सामने चिल्ला-चिल्लाकर झूठ बोलेंगे और फिर जिस अधिकारी पर आरोप लगाएंगे, उसी से माफी मांग लेंगे, इमरान खान के कट्टर समर्थकों को भी इसका अंदाजा नहीं था। लेकिन, पाकिस्तानी मीडिया के मुताबिक, रिकॉर्ड्स में खुलासा हुआ है, कि इमरान खान ने उस अमेरिकी अधिकारी से माफी मांग ली है, जिसपर उन्होंने अपने सरकार गिराने की साजिश रचने का आरोप लगाया था।

इमरान खान ने माफी मांगी

इमरान खान ने माफी मांगी

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा है कि, इमरान खान ने अमेरिका के असिस्टेंस फॉरेन सेक्रेटरी डोनाल्ड लू से गुपचुप तरीके से माफी मांगी है और पाकिस्तान सरकार के सरकारी दस्तावेज में इस बात के सबूत मिले हैं। ख्वाजा आसिफ ने कहा है कि, पाकिस्तान सरकार को इस बात के पुख्ता रिकॉर्ड मिले हैं, कि तहरीक-ए-इंसाफ ने अमेरिकी सहायक विदेश मंत्री डोनाल्ड लू से माफी मांगी है, जिनके बारे में इमरान खान ने दावा किया था, कि वह उनकी सरकार को उखाड़ फेंकने के लिए एक "विदेशी साजिश" में शामिल थे और उसने धमकी भरा संदेश भेजा था। पाकिस्तानी रक्षा मंत्री का ये दावा सनसनीखेज है, क्योंकि इमरान खान लगातार अमेरिका पर अपनी सरकार गिराने की साजिश रचने का आरोप लगाते रहे हैं।

‘फूट गया इमरान खान का गुब्बारा’

‘फूट गया इमरान खान का गुब्बारा’

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा कि, डोनाल्ड लू के साथ पीटीआई नेता की मुलाकात और अमेरिकी सरकार से माफी मांगने के सबूत हैं। उन्होंने कहा कि, 'इमरान खान का गुब्बारा फूट गया है और वह अब डोनाल्ड लू से माफी मांग रहे हैं। एक शख्स जो अमेरिका के खिलाफ नारे लगा रहा था, अब उससे माफी की भीख मांग रहा है'। पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ने कहा कि, 'इमरान खान ने अमेरिका को संदेश भेजा था, कि उन्होंने गलती की है और इसके साथ चीजों को ठीक करना चाहते हैं और संबंध वहीं से शुरू होने चाहिए जहां से वे टूटे थे'।

इमरान खान की पार्टी की प्रतिक्रिया

इमरान खान की पार्टी की प्रतिक्रिया

वहीं, ख्वाजा आसिफ के दावे पर प्रतिक्रिया देते हुए पीटीआई के वरिष्ठ उपाध्यक्ष फवाद चौधरी ने कहा कि, ख्वाजा आसिफ अपनी आदतन झूठी और विकृत बातों से भ्रम पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। पीटीआई मीडिया प्रकोष्ठ द्वारा जारी एक बयान में उन्होंने कहा कि, उनके विचारों को गंभीरता से लेना गंभीरता का गंभीर अपमान है। फवाद चौधरी ने कहा कि, 'डोनाल्ड लू का हाथ पत्र में स्पष्ट था लेकिन आयातित सरकार इससे इनकार करती है, जबकि इमरान खान ने राष्ट्रीय सुरक्षा समिति की बैठक में अपनी भूमिका का खुलासा किया था और अपराध मंत्री ने भी इसे सत्यापित किया था। विदेशी ताकतों के इशारे पर चुनी हुई सरकार के खिलाफ साजिश रचने वाले लोग अब भी अमेरिकी समर्थन हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं'।

इमरान की पार्टी बोल रही है झूठ?

इमरान की पार्टी बोल रही है झूठ?

इमरान खान के खिलाफ पाकिस्तान सरकार के पास माफी मांगने के दस्तावेज हैं, लेकिन अब मुंह छिपाने के लिए उनकी पार्टी दनादन झूठ बोले जा रही है। इमरान खान के करीबी और पूर्व सूचना प्रसारण मंत्री फवाद चौधरी ने कहा कि, 'इमरान खान ने हमेशा अमेरिकी एजेंडे को खारिज करके राष्ट्रीय हित के लिए काम किया है। इमरान खान ने ड्रोन हमलों का विरोध किया, अमेरिका को सैन्य ठिकाना नहीं दिया, बातचीत के जरिए अफगानिस्तान में शांति का मार्ग प्रशस्त किया, जबकि अमेरिका और अन्य विदेशी ताकतों से भीख मांगना शरीफों के दरबारियों की विशेषता है। वे अफवाहों के जरिए अपने खोए हुए सम्मान को दोबारा नहीं पा सकते हैं'।

कौन हैं अमेरिकी अधिकारी डोनाल्ड लू?

कौन हैं अमेरिकी अधिकारी डोनाल्ड लू?

आपको बता दें कि, डोनाल्ड लू 15 सितंबर 2021 को दक्षिण और मध्य एशियाई मामलों के ब्यूरो के लिए अमेरिका के सहायक विदेश मंत्री बने। इस असाइनमेंट से पहले, डोनाल्ड लू ने 2018 से 2021 तक किर्गिज़ गणराज्य में अमेरिकी राजदूत के तौर पर और 2015-2018 के बीच अल्बानिया में अमेरिकी राजदूत के तौर पर काम किया था। अल्बानिया में अपनी पोस्टिंग से पहले, डोनाल्ड लू ने पश्चिम अफ्रीका में इबोला संकट पर अमेरिका की तरफ से इबोला रिस्पांस टीम के डिप्टी कॉर्डिनेटर के तौर पर काय किया था। डोनाल्ड लू एक विदेश सेवा अधिकारी हैं, जिनके पास अमेरिकी सरकार में काम करने का 30 सालों से ज्यादा का अनुभव है। उन्होंने भारत में मिशन के उप प्रमुख (डीसीएम) (2010-2013), चार्जे डी'अफेयर्स (2009-2010) और अजरबैजान में डीसीएम (2007-2009) और किर्गिस्तान में डीसीएम (2003-2006) के रूप में काम किया है।

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