रूसी कोयले पर प्रतिबंध लगाने के लिए यूरोपीय संघ तैयार, भारत ने डबल कर दी खरीददारी
एक बार रूसी कोयले पर प्रतिबंध लागू होने के बाद, यह मास्को के ऊर्जा उद्योग को प्रमुख रूप से लक्षित करने वाला ब्लॉक का पहला प्रतिबंध पैकेज होगा।
ब्रसेल्स, अप्रैल 08: रूस पर प्रतिबंधों के नये फेहरिस्त को लेकर यूरोपीय संघ तैयार हो गया है और इस बार रूसी कोयले को निशाना बनाया गया है। यूक्रेन पर हमला करने और भीषण तबाही मचाने के लए यूरोपीय संघ रूसी कोयले के आयात पर प्रतिबंध लगाने के लिए तैयार हो गया है। और डीडब्ल्यू न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, यूरोपीय ब्लॉक द्वारा उपायों को मंजूरी देने के बाद शुक्रवार को प्रतिबंधों को औपचारिक रूप से लागू किया जाएगा।

रूसी कोयले पर प्रतिबंध
यूरोपीय परिषद के वर्तमान फ्रांसीसी अध्यक्ष वॉन डेर लेयेन ने गुरुवार देर रात कहा कि यूरोपीय संध ने रूसी कोयले के आयात पर लेटेस्ट प्रतिबंध लगाने की राजनीतिक मंजूरी दे दी है। डीडब्ल्यू न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, कोरपर के नाम से जाने जाने वाले प्रत्येक सदस्य के यूरोपीय संघ के प्रतिनिधियों से युक्त मुख्य तैयारी निकाय ने रूस से कोयले के आयात पर रोक सहित प्रतिबंधों का पांचवां यूरोपीय संघ का पैकेज मंजूर किया। यूरोपीय संघ की आधिकारिक पत्रिका में प्रकाशित होने के बाद पैकेज को लागू किया जाएगा, जो शुक्रवार को होने की उम्मीद है। रूसी कोयले के आयात पर यूरोपीय संघ के प्रतिबंध के अलावा, प्रतिबंधों में रूसी लकड़ी और वोदका पर आयात प्रतिबंध शामिल है।

रूस को लगेगा बड़ा झटका
एक बार रूसी कोयले पर प्रतिबंध लागू होने के बाद, यह मास्को के ऊर्जा उद्योग को प्रमुख रूप से लक्षित करने वाला ब्लॉक का पहला प्रतिबंध पैकेज होगा। डीडब्ल्यू न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, रूसी जीवाश्म ईंधन के आयात पर पूर्ण प्रतिबंध के सभी उपाय कम हैं, लेकिन यूरोपीय संघ के अधिकारियों ने कहा कि अगर मास्को अपना हमला जारी रखता है तो इसका पालन किया जा सकता है। हालांकि, जर्मन चांसलर ओलाफ स्कोल्ज़ ने कहा कि, कोयला प्रतिबंध को लागू करने के लिए पूरे 120 दिनों की अवधि की आवश्यकता होगी। स्कोल्ज़ ने कहा कि, रूसी कोयले पर प्रतिबंध लागू करने के लिए देश को पूरे टांजिशन पीरियड का इस्तेमाल करने की आवश्यकता होगी।

120 दिनों में वैकल्पिक व्यवस्था
यूरोपीय संघ के नेताओं ने सहमति व्यक्त की है कि, प्रतिबंधों के पांचवें पैकेज में कोयले पर प्रतिबंध शामिल होना चाहिए और 120 दिनों के अंदर वैकल्पिप व्यवस्था तलाशना होगा। यूरोपीय संघ ने रूसी कोयले पर प्रतिबंध लगाने पर सहमति उस वक्त जताई है, जब यूनाइटेड नेशंस ने वोटिंग के बाद रूस को मानवाधिकर परिषद से सस्पेंड कर दिया है। यूनाइटेड नेशंस में वोटिंग के दौरान रूस को सस्पेंड करने के समर्थन में 93 देशों ने वोट डाला तो प्रतिबंध के खिलाफ 24 देशों ने वोट डाला, जबकि 58 देश वोटिंग की प्रक्रिया से गैर-हाजिर रहे। भारत भी वोटिंग से गैर-हाजिर रहा।

भारत ने कोयला खरीदना किया दोगुना
यूरोपीय संघ ने रूसी कोयले पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है, तो भारत ने रूस से कोयला उत्पाद दोगुना कर दिया है। भारत भारत सरकार ने साफ कर दिया है, कि वो पश्चिमी देशों के प्रभाव में आए बगैर देश का हित पहले देखेगी और जिस देश से उसे फायदा होगा, उस देश के साथ कारोबार करेगी। मोदी कैबिनेट ने रूस से दोगुना कोयला खरीदने को मंजूरी दे दी है, जिसके बाद माना जा रहा है, कि अमेरिका और पश्चिमी देश भारत पर और भी ज्यादा भड़केंगे। भारत के इस्पात मंत्री ने कहा है कि, भारत रूस से कोयला खरीदेगा।

रूसी कोयले की क्वालिटी अच्छी, डिमांड ज्यादा
आपको बता दें कि, भारत और चीन खुद भी कोयले का भारी मात्रा में उत्पादन करते हैं, लेकिन भारत और चीन में जिस कोयले का उत्पादन होता है, उसकी क्वालिटी अच्छी नहीं होती है, और रूसी कोयले में काफी कार्बन होता है, जो स्टील उद्योग के लिए काफी फायदेमंद होता है। चूंकी, भारत में स्टील उद्योग का बाजार विशालकाय है, लिहाजा रूसी कोयले की डिमांड ज्यादा होती है। रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल महीने मे ही जहाजों से करीब 10.6 लाख टन कोकिंक कोयला स्टील बनाने और थर्मल पॉवर स्टेशन के लिए रूस से मंगवा चुका है। और रिपोर्ट में कहा गया है कि, जनवरी 2020 के बाद भारत ने पहली बार रूस से कोयले के आयात में इतना भारी इजाफा किया है। आपको बता दें कि, भारत वस्तुओं से लेकर हथियारों तक रूसी सामानों का प्रमुख खरीदार है। और भारत ने 24 फरवरी को यूक्रेन पर हमले के बाद रूस की अभी तक निंदा नहीं की है और यूनाइटेड नेशंस में भी भारत ने वोट करने से परहेज किया है।












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