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ज्वालामुखी विस्फोट के बाद अब कोरोना से बचने के लिए टोंगा ने लगाया लॉकडाउन

Provided by Deutsche Welle

नुकू'आलोफ़ा, 02 फरवरी। टोंगा के अधिकारियों ने बताया है कि सुनामी प्रभावित द्वीप में बंदरगाह पर काम करने वाले श्रमिकों में से दो कोविड​​-19 से प्रभावित हुए हैं. इन बंदरगाहों का इस्तेमाल विदेशी नौसैनिक जहाजों द्वारा मदद पहुंचाने के लिए किया जा रहा है. यह द्वीप अब तक कोविड-19 के वायरस से बचा हुआ था. द्वीप ने संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए बुधवार से लॉकडाउन लगाने की घोषणा की है.

टोंगा के प्रधानमंत्री सियाओसी सोवलेनी ने बताया कि राजधानी नुकुआलोफा में इस हफ्ते दो लोग कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं और उन्हें अलग-थलग रखा गया है. उन्होंने कहा कि दोनों पुरुष शहर के बंदरगाह में काम कर रहे थे, जहां 15 जनवरी के ज्वालामुखी विस्फोट के बाद से दुनिया भर से मानवीय सहायता आ रही है.

सोवलेनी ने मंगलवार को राष्ट्र के नाम संबोधन में कहा, "इस समय सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा प्रसार को रोकना और उन्हें रोकना है जो प्रभावित हो गए हैं." उन्होंने आगे कहा, "यही हमारे राष्ट्रीय लॉकडाउन का कारण है...किसी भी नाव को एक द्वीप से दूसरे द्वीप पर जाने की अनुमति नहीं होगी, कोई और घरेलू उड़ान नहीं होगी."

सोवलेनी ने कहा कि हर 48 घंटे पर हालात की समीक्षा की जाएगी. टोंगा ने पहली बार 2020 की शुरुआत में अपनी सीमाओं को बंद कर दिया था जब कोरोना वायरस महामारी ने दुनिया भर में तबाही मचा दी थी.

उसके बाद से टोंगा की 1,00,000 लोगों की आबादी में सिर्फ एक व्यक्ति में कोविड-19 पाया गया था. वह पिछले साल अक्टूबर में न्यजीलैंड से लौटा था. उसके बाद से वह पूरी तरह से ठीक हो चुका है.

पिछले महीने सुनामी टोंगा के 'हुंगा टोंगा-हुंगा हापई' अंतर्जलीय ज्वालामुखी के फटने के बाद आई थी. इससे द्वीप को काफी नुकसान हुआ था और सुनामी की लहरों का कहर दूर-दूर तक महसूस किया गया था. इसकी वजह से पूरे प्रशांत महासागर इलाके में सुनामी आई जिसकी लहरें इतनी शक्तिशाली थीं कि 10,000 किलोमीटर से भी ज्यादा दूर पेरू में दो महिलाएं डूब गईं.

ज्वालामुखी में धमाके के बाद 15-15 मीटर ऊंची लहरें टोंगा के तटों से टकराईं. इससे कई घर तो तबाह हुए ही, तीन लोगों की मौत भी हो गई. इससे जो सुनामी आई, उसका खतरा अब पूरे प्रशांत महासागर पर मंडराने लगा है.

'हुंगा टोंगा-हुंगा हापई' तथाकथित 'आग के गोले' में स्थित है जहां सरकती हुई टेक्टॉनिक प्लेटों के बीच दरार आने से भूकम्पीय गतिविधियां बढ़ जाती हैं.

एए/सीके (एएफपी, रॉयटर्स)

Source: DW

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