मिस्र में मिले फिरौन के मंदिर के रहस्यमयी शिलालेख, सूर्य मंदिर के अवशेष देख चकराए वैज्ञानिक
मिस्र में पुरातत्वविदों ने 2400 साल पुराने फिरौन के मंदिर की खोज की है, जिसमें सूर्य की भी मंदिर स्थापित है।
काहिरा, नवंबर 13: मिस्र को पिरामिडों का देश कहा जाता है और अकसर ऐसे दुर्लभ खोज होते रहते हैं, जिसे देख पुरातत्वविद चकराकर रह जाते हैं। इस बार वैज्ञानिकों के हाथ राजा फराओ के भव्य मंदिर के अवशेष हाथ लगे हैं, लेकिन इस खोज ने वैज्ञानिकों को चकराकर रख दिया है। फिरौन के मंदिर की खोज मिस्र और जर्मन विशेषज्ञों की एक टीम ने हेलियोपोलिस में मटेरिया पुरातात्विक स्थल पर की है।

फिरौन के मंदिर की खोज
मिस्र और जर्मनी के पुरातत्वविदों ने इस खोज को अंजाम दिया है। पुरातत्वविदों के मुताबिक, प्राचीन समय में मातराय प्राचीन हेलियोपोलिस का हिस्सा था, जो निचले मिस्र की राजधानी और एक प्रमुख धार्मिक केंद्र था। पुरातत्वविदों ने जब अवशेष को गंभीरता से खंगाला और उसका परीक्षण किया, तो पता चला कि उस वक्त ब्लॉक और टुकड़े बेसाल्ट से बने होते थे और माना जाता है कि ये अवशेष उस वक्त के राजा राजा नेकटेनबो-1 के मंदिर के पश्चिमी और उत्तरी मोर्चे से संबंधित हैं।

कुछ हफ्ते पहले हुई है खोज
मिस्र के स्थानीय मीडिया की रिपोर्टों के अनुसार, मंदिर के मध्य क्षेत्र में खुदाई कार्य के दौरान कुछ हफ्ते पहले यह खोज की गई है। अहराम ऑनलाइन की एक रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि, टीम द्वारा खोजे गए ब्लॉक और टुकड़े बेसाल्ट से बने हैं और मंदिर के पश्चिमी और उत्तरी हिस्से से संबंधित हैं। यह अनुमान लगाया जा रहा है कि इसका उत्तरी विस्तार अभयारण्य को सीमा के मुख्य अक्ष से जोड़ता है और यह मंदिर सूर्य देवता को समर्पित था, जिन्हें मिस्र में हेलिओस भी कहा जाता है। मंदिर के पश्चिमी और उत्तरी ढांचे का बेसाल्ट ब्लॉक नील नदी के पूर्व में ग्रेटर काहिरा के उत्तरी क्षेत्र में स्थित जिले में मिले हैं और उत्तरी तरफ से मंदिर के विस्तार में पाए गए हैं।

राजा नेक्टानेबो-1 से संबंधित मंदिर
पुरातत्वविदों को छानबीन में पता चला है कि राजा नेक्टानेबो प्रथम से संबंधित यह मंदिर है। आपको बता दें कि, राजा नेक्टानेबो प्रथम ने प्राचीन मिस्र में चौथी शताब्दी ईसापूर्व में अंतिम राजवंश की स्थापना की थी और इसी इलाके में पूर्व दिशा की तरफ नील नदी बहती है। पुरातत्वविदों का कहना है कि ये नक्काशीदार पत्थर राजा नेक्टानेबो प्रथम के शासनकाल के दौरान 13वें और 14वें वर्ष में बनाए गये थे।

मृत्यु के बाद रूका काम
पुरातत्वविदों ने अहराम ऑनलाइन को बताया कि, हमेशा के लिए ब्लॉक भी अधूरे थे और ऐसा लगता है कि 363 ईसा पूर्व में नेकटेनबो-प्रथम की मृत्यु के बाद कोई और सजावट का काम शुरू नहीं किया गया था। उन्होंने कहा कि अन्य वास्तुशिल्प तत्व रामेसेस-द्वितीय (1279-1213), मेरेनप्टा (1213-1201 ईसा पूर्व) और एप्रीज (589-570 ईसा पूर्व) के समय में बनवाए गये।

लंगूर की मूर्ति भी मिली
पुरातत्वविदों की टीम ने मध्य साम्राज्य के फिरौन ओसोर्कोन (925-890 ईसा पूर्व) के शासनकाल से एक बबून प्रतिमा, कुरसी और एक क्वार्टजाइट ओबिलिस्क का हिस्सा भी खोजा है। 595 से 589 ई.पू. तक शासन करने वाले राजा सांमटिक द्वितीय द्वारा नियुक्त देवता शू और देवी टेफनट का एक मंदिर भी खोजा गया है। इसके साथ ही पुरातत्वविदों के हाथ लंगूर की भी एक मूर्ति मिली है। वहीं, सबसे पुरानी खोज 15 वीं शताब्दी ईसा पूर्व फिरौन टुथमोसिस-तृतीय को भेंट की गई एक तालिका की खोज की है। 332 ईसा पूर्व में सिकंदर महान के कब्जे में आने से पहले ये साम्राज्य फारसियों के नियंत्रण में आ गया था।

जंग में बिताए ज्यादातर वक्त
पुरातत्वलिदों ने कहा कि, राजा पसामतिक द्वितीय ने 595 से 589 ईसापूर्व शासन किया था, जबकि राजा नेक्टानेबो-प्रथम ने अपने शासनकाल में ज्यादातर समय लड़ाई में निकाल दिए। राजा नेक्टानेबो-प्रथम ज्यादातर वक्त उस समय के एक और शक्तिशाली अचाइमेनिड साम्राज्य से लड़ाई लड़ी थी।

मिस्र पर करना चाहते थे कब्जा
इतिहासकारों के मुताबिक, अचाइमेनिड साम्राज्य के शासक फारस के रहने वाले थे और वो किसी भी हाल में मिस्र पर कब्जा करना चाहते थे। इतिहासकारों के मुताबिक, राजा नेक्टानेबो-प्रथम ने अपने शासनकाल के दौरान मिस्र में कई मंदिरों का निर्माण करवाया, जिसमें अस्वान के पास स्थिति आइसिस का मंदिर भी शामिल है।
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