‘चीनी कंपनियों संग भेदभाव न करे भारत’, Vivo मनी लॉन्ड्रिंग केस में दो अफसरों की गिरफ्तारी पर नाराज हुआ बीजिंग
चीनी विदेश मंत्रालय ने भारतीय अधिकारियों से चीनी कंपनियों संग भेदभाव न करने की अपील की है। इसके साथ ही चीन ने वीवो के दो अफसरों को कॉन्स्यूलर प्रोटेक्शन और कानूनी मदद देने का फैसला किया है।
चीन विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने सोमवार को कहा कि चीन, भारत में गिरफ्तार किए गए स्मार्टफोन निर्माता वीवो के दो चीनी कर्मचारियों को कांसुलर सुरक्षा और सहायता प्रदान करेगा। इन्हें हाल ही में मनी लॉन्ड्रिंग जांच के सिलसिले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गिरफ्तार किया था।

चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने कहा कि वे इस मामले पर बारीकी से नजर रख रही हैं। चीनी सरकार चीनी कंपनियों को उनके वैध अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए दृढ़ता से समर्थन करती है।
2 दिन पहले ईडी ने वीवो इंडिया के 3 बड़े अधिकारियों को गिरफ्तार किया था। इसमें वीवो इंडिया के अंतरिम CEO होंग ज़ुक्वान, वीवो के मुख्य वित्तीय अधिकारी (CFO) हरिंदर दहिया और सलाहकार हेमंत मुंजाल थे। तीनों को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत गिरफ्तार किया गया था।
इससे पहले अक्टूबर में ED ने मनी लॉन्ड्रिंग केस में चीनी नागरिक गुआंगवेन क्यांग उर्फ एंड्रयू कुआंग, लावा इंटरनेशनल के MD हरिओम राय के अलावा चार्टर्ड अकाउंटेंट राजन मलिक और नितिन गर्ग को गिरफ्तार किया था। यानी कि ईडी ने अब तक 2 चीनी अधिकारियों सहित कुल 7 लोगों की गिरफ्तार किया है।
इन गिरफ्तारियों को लेकर कंपनी ने एक बयान जारी किया था और कहा था कि वे 'अधिकारियों के खिलाफ मौजूदा कार्रवाई से बेहद चिंतित है।' वीवो के प्रवक्ता ने कहा, 'हाल की गिरफ्तारियां निरंतर उत्पीड़न को दर्शाती हैं और इस तरह व्यापक उद्योग परिदृश्य में अनिश्चितता का माहौल पैदा करती हैं। हम इन आरोपों का मुकाबला करने और चुनौती देने के लिए सभी कानूनी रास्तों का उपयोग करने के लिए दृढ़ हैं।'












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