जानिए, ट्रंप ने क्यों कहा- अमेरिका में सबसे ज्यादा कोरोना संक्रमित मिलना सम्मान की बात
नई दिल्ली। कोरोना वायरस इस समय दुनिया के लगभग हर देश में पहुंच चुका है। चीन के वुहान शहर से निकली यह महामारी अब तक करीब 50 लाख लोगों को अपनी चपेट में ले चुकी है और लगभर 2.50 लाख से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं। कोरोना वायरस का सबसे बुरा प्रभाव अमेरिका में देखने को मिला है जहां, 15 लाख 70 हजार से ज्यादा मामले सामने आए हैं और 93 हजार से ज्यादा मौतें हुई हैं। महामारी से चलते इनती मौतों के बाद भी अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कुछ ऐसा अजीबो-गरीब बयान दिया जो अब चर्चा का विषय बना हुआ है।

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दिया ये तर्क
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने एक बयान में कहा है कि अमेरिका में कोरोना वायरस संक्रमण दुनिया में सबसे ज्यादा होना सम्मान की बात है। लेकिन उन्होंने ऐसा क्यों कहा? इस बात को लेकर कई लोग जवाब तलाश रहे हैं। आइए पहले जान लेते हैं राष्ट्रपति ट्रंप ने क्या कहा? व्हाइट हाउस से मंगलवार को उन्होंन कहा, जब आप कहते हैं कि हम संक्रमण के मामलों में आगे हैं तो मैं इसे बुरा नहीं मानता, इसका मतलब है कि हमने किसी और देश के मुकाबले बड़े स्तर पर टेस्टिंग की है।

हमारी टेस्टिंग दूसरों से बेहतर: ट्रंप
ट्रंप ने आगे कहा, इससे पता चलता है कि कोरोना वायरस को लेकर की जा रही हमारी टेस्टिंग दूसरों से बेहतर है, मैं इसे सम्मान के तमगे की तरह देखता हूं। दरअसल, अपने बयान से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप यह साबित करना चाहते हैं कि उन्होंने कोरोना के खिलाफ जंग में बड़ी कार्रवाई करते हुए टेस्टिंग को बड़े स्तर तक ले गए जो कि एक सम्मान की बात है। हालांकि ट्रंप यह तर्क विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी को सही नहीं लगा और उन्होंने राष्ट्रपति के बयान की आलोचना की है।

विपक्ष ने साधा निशाना
मोक्रेटिक पार्टी की नेशनल कमेटी ने कहा, अमेरिका में कोरोना वायरस महामारी के 10 लाख से ज्यादा मामलों की पुष्टि हमारे देश के नेतृत्व की नाकामी को दर्शाता है। इससे पहले भी सीनेट की एक बैठक में सत्ताधारी रिपब्लिकन पार्टी के नेताओं ने भी ने अमेरिकी सरकार पर कम टेस्टिंग करने पर सवाल खड़ा किया था। सांसद मिट रोमनी ने कहा मीटिंग में कहा था कि देश में कोविड-19 का टेस्टिंग रिकॉर्ड अच्छा नहीं है। यहां फरवरी से ही मामले आने शुरू हो गए थे लेकिन उससे आज की तुलना करें तो अब तक पर्याप्त टेस्टिंग नहीं हुई है।
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