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84 करोड़ के इनामी आतंकवादी से मिले ट्रंप, क्या थी ऐसी मजबूरी जो टेररिस्ट के आगे झुके अमेरिकी राष्ट्रपति

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प (US President Donald Trump)ने हाल ही में सऊदी अरब (Saudi Arabia)के रियाद में सीरियाई राष्ट्रपति अहमद अल-शरा (Al Sharaa) से मुलाकात की। यह पिछले 25 सालों में किसी अमेरिकी राष्ट्रपति और सीरियाई नेता के बीच पहली मुलाकात थी। 37 मिनट की चर्चा के दौरान ट्रम्प ने अल-शरा से इजरायल के साथ संबंधों को सामान्य बनाने और सीरिया से विदेशी आतंकवादियों को बाहर निकालने को कहा। अल-शरा ने ट्रम्प की प्रशंसा की और मध्य पूर्व में शांति लाने की उनकी क्षमता पर विश्वास व्यक्त किया।

कौन है अल शरा? जिस पर था 84 करोड़ का इनाम?

कभी टॉप मोस्ट वांटेड आतंकी रह चुके अल-शरा अपने आतंक के लिए दुनियाभर में जाने जाते थे। एक जमाना ये भी था जब अहमद अल-शरा ने 2011 में सीरिया में कई आत्मघाती हमले कराए थे। इन हमलों के चलते अमेरिका ने उस पर 10 मिलियन डॉलर (करीब 84 करोड़ रुपए) का इनाम रखा हुआ था, जिसे 5 महीने पहले दिसंबर 2024 में हटा दिया गया था। ये ट्रंप के चुनाव जीतने के बाद और सत्ता संभालने के ठीक पहले हुआ था।

Donald Trump

अल-शरा का सत्ता में उदय

अहमद अल-शरा को पहले अबू मोहम्मद अल-जुलानी के नाम से जाना जाता था, जो अमेरिका द्वारा वांछित एक पूर्व आतंकवादी था। उसने 2003 में मेडिकल की पढ़ाई छोड़ दी और आतंकी संगठन अल कायदा में शामिल हो गया। 2006 में अमेरिकी सेना द्वारा कैद किए जाने के बाद, उसने 2012 में जबात अल-नुसरा और बाद में 2016 में अल कायदा से अलग होने के बाद हयात तहरीर अल-शाम (HTS) की स्थापना की।

बशर अल-अलद के बाद संभाली सत्ता

दिसंबर 2024 में बशर अल-असद के पतन के बाद अल-शरा ने सत्ता संभाली। इस परिवर्तन के बाद उनका असली नाम दुनिया भर में जाना जाने लगा। चरमपंथी समूहों के साथ उनके पिछले जुड़ाव के बावजूद, उन्हें अब सीरिया के राष्ट्रपति के रूप में मान्यता दी गई है।

अमेरिका ने सीरिया से हटाए कई प्रतिबंध

सीरिया पर सभी अमेरिकी प्रतिबंधों को हटाने के ट्रम्प के फैसले ने वैश्विक चर्चाओं को जन्म दिया है। सीरियाई गृहयुद्ध के दौरान शुरू में लगाए गए प्रतिबंधों ने सीरिया की अर्थव्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित किया था। इन उपायों में वित्तीय लेनदेन, तेल और गैस निवेश, सैन्य सामान और बहुत कुछ पर प्रतिबंध शामिल थे। अमेरिका ने सीरिया पर हिजबुल्लाह जैसे समूहों का समर्थन करने और नागरिकों के खिलाफ रासायनिक हथियारों का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया था।

प्रतिबंधों का सीरिया पर असर

प्रतिबंधों के कारण सीरिया में आर्थिक मंदी आई है। विश्व बैंक के अनुसार, 2010 से 2022 तक देश की अर्थव्यवस्था में 84% की गिरावट आई है। प्रतिबंधों के कारण व्यापक गरीबी भी फैली है, जिसमें 90% सीरियाई गरीबी रेखा से नीचे रह रहे हैं। तेल और ऊर्जा संसाधनों पर सीमाओं के कारण बिजली की कमी आम हो गई है। इन प्रतिबंधों के कारण सीरिया के तेल उद्योग को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। 2010 में सीरिया प्रतिदिन लगभग 380,000 बैरल तेल निर्यात करता था। हालाँकि, यह आँकड़ा अब लगभग शून्य हो गया है। सीरिया के ऊर्जा मंत्रालय ने इन प्रतिबंधों के कारण 2022 तक 107 बिलियन डॉलर के नुकसान की सूचना दी है।

सीरिया के ड्रग व्यापार की चुनौतियाँ

युद्ध से त्रस्त इस देश को सरकारी नियंत्रण कमज़ोर होने के कारण तस्करी और नशीली दवाओं के व्यापार में वृद्धि की चुनौतियों का सामना करना पड़ा। सीरिया और लेबनान के पास कैप्टागन उत्पादन में वृद्धि हुई, जबकि सऊदी अरब जैसे देशों में फलों के अंदर छिपाकर नशीली दवाओं की तस्करी की गई। रिपोर्ट्स के अनुसार, कुछ सरकारी अधिकारी और सीरियाई सेना इस अवैध व्यापार में आय के साधन के रूप में शामिल हैं। हालाँकि, राष्ट्रपति अल-शरा ने कैप्टागन तस्करी के खिलाफ़ कड़े कदम उठाए हैं, इसे शरिया कानून के खिलाफ़ अपराध और सीरिया के भविष्य के लिए हानिकारक बताया है।

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