'माफिया की तरह काम कर रहे Donald Trump', शशि थरूर के बेटे ने अमेरिकी राष्ट्रपति की उधेड़ी बखिया
World News: सोमवार को दावोस शिखर सम्मेलन के दौरान The Washington Post के पत्रकार और कांग्रेस नेता शशि थरूर (Shashi Tharoor) के बेटे ईशान थरूर (Ishaan Thraoor) ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (US President Donald Trump) को लेकर एक तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि ट्रंप के दूसरे कार्यकाल ने साफ कर दिया है कि वह वैश्विक राजनीति को किसी "माफिया बॉस" की तरह चलाते हैं।
एक साल पहले भी उठे थे सवाल
इंडिया टुडे से बातचीत में ईशान थरूर ने बताया कि ठीक एक साल पहले इसी मंच पर इस बात को लेकर बहस चल रही थी कि क्या ट्रंप दुनिया में कोई "सकारात्मक बदलाव" लाएंगे या फिर माफिया बॉस जैसा व्यवहार करेंगे। ईशान थरूर ने आगे कहा, "मुझे लगता है कि उन्होंने इस सवाल का जवाब पूरी तरह से 'और ज़्यादा माफिया बॉस की तरह' के पक्ष में दे दिया है।" उनके इस बयान ने दावोस में मौजूद कई विशेषज्ञों का ध्यान खींचा।

फाइनेंशियल टाइम्स के रचमैन भी सहमत
ईशान थरूर के साथ मंच पर मौजूद फाइनेंशियल टाइम्स के स्तंभकार गिडियन रचमैन ने भी उनकी बात से सहमति जताई। उन्होंने कहा, "माफिया परिवारों में भी कुछ समय तक शांति रहती है, लेकिन आखिर में वे एक-दूसरे पर गोली चलाना शुरू कर देते हैं।"
फिल्मों जैसा माफिया स्टाइल: रचमैन
रचमैन ने आगे कहा कि ट्रंप का पूरा तौर-तरीका बिल्कुल वैसा है, जैसा फिल्मों में माफिया बॉस को दिखाया जाता है। उनका "मोडस ऑपरेंडी" है डर, दबाव और सौदेबाज़ी के ज़रिए चीज़ें मनवाना। 'World in Trumpian Turmoil and What Happens Next?' नामक शो में ईशान थरूर ने कहा कि इस समय अमेरिका की विदेश नीति किसी सिस्टम से नहीं, बल्कि सीधे ट्रंप के व्यक्तित्व से संचालित हो रही है।
कांग्रेस की बेरुखी पर सवाल
ईशान थरूर ने कहा कि ट्रंप के फैसलों पर कोई वैधानिक रोक इसलिए नहीं लग पा रही, क्योंकि अमेरिकी कांग्रेस "वह काम नहीं कर रही जो उसे करना चाहिए।" उन्होंने यह भी कहा कि रिपब्लिकन पार्टी अब पूरी तरह डोनाल्ड ट्रंप के नियंत्रण में है, जिससे सत्ता पर संतुलन और जवाबदेही कमजोर हो गई है।
'टूट रहा है WW:II का वर्ल्ड ऑर्डर'
वैश्विक असर पर बात करते हुए ईशान थरूर ने कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद बना वर्ल्ड ऑर्डर अब कमजोर पड़ती जा रही है। उन्होंने बताया कि दुनिया अब एक "ए ला कार्टे विश्व व्यवस्था" की ओर बढ़ रही है-एक ऐसा सिस्टम जिसमें देश अपनी सुविधानुसार प्रतिबद्धताएं चुनते हैं। न्यूयॉर्क टाइम्स पहले भी इस अवधारणा का जिक्र कर चुका है।
ट्रंप के कदमों से चीन को मिला मौका
ईशान थरूर के मुताबिक, इस वैश्विक उथल-पुथल में ट्रंप के फैसलों ने अनजाने में चीन के लिए नए अवसर खोल दिए हैं। वॉशिंगटन ग्रीनलैंड को लेकर यूरोप से मतभेद में है। इसका असर कनाडा जैसे पश्चिमी सहयोगियों और हिंद महासागर क्षेत्र में भारत जैसे साझेदारों पर भी पड़ रहा है।
भारत के लिए खुल रही है नई जगह
गिडियन रचमैन ने कहा कि यह जटिल भू-राजनीतिक स्थिति भारत के लिए नई संभावनाएं खोलती है, हालांकि उन्होंने इसे "जटिल अवसर" बताया। रचमैन ने ट्रंप पर ज्यादा निर्भर रहने के खिलाफ चेतावनी देते हुए कहा- "मई में आपके साथ उनकी शानदार मुलाकात हो सकती है और जून में वही रिश्ता विनाशकारी हो सकता है। उनके साथ कुछ भी स्थायी नहीं होता।"
दुनिया का झुकाव भारत की ओर
जैसे-जैसे अमेरिकी सहयोगी देश वॉशिंगटन से दूरी बनाकर अपने व्यापार और रणनीतिक साझेदारों में विविधता ला रहे हैं, कई देश भारत को एक "केंद्रीय भागीदार" के रूप में देखने लगे हैं।
UK, EU, जापान और दक्षिण कोरिया की नजर भारत पर
रचमैन ने बताया कि यूके पहले ही भारत के साथ व्यापार समझौता कर चुका है। यूरोपीय संघ भी ऐसा करने को उत्सुक है। इसके अलावा जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देश भी अर्थव्यवस्था और सुरक्षा के क्षेत्र में भारत से रिश्ते मजबूत करना चाहते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भारत भले ही औपचारिक सैन्य गठबंधनों से दूरी बनाए रखे, लेकिन बदलती वैश्विक व्यवस्था नई दिल्ली को अपना प्रभाव और साझेदारियां बढ़ाने के कई मौके दे रही है।
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