प्रदूषण से परेशान दिल्ली ले चीन से सबक, जिसने लगाया दुनिया का सबसे बड़ा एयर प्यूरीफायर टॉवर
नई दिल्ली। बीजिंग और दिल्ली दुनिया के सबसे ज्यादा प्रदूषित शहरों में से हैं। चीन और भारत की ये दो राजधानियां वाहनों, कंस्ट्रक्शन और इंडस्ट्री से निकलने वाली जहरीली गैस और धुएं के चपेट में है। सर्दी के मौसम में दिल्ली-एनसीआर का हाल सबसे ज्यादा बुरा होता और हर बार की तरह इस बार भी पूरा क्षेत्र प्रदूषण से ढका हुआ है। दिल्ली एनसीआर में प्रदूषण से निपटने के राज्य और केंद्र सरकारें अब तक पूरी तरह से नाकाम रही है। पिछले करीब दो सप्ताह से धुएं की चादर में लिपटी राजधानी में सांस लेना दुभर हो रहा है और राज्य और केंद्र सरकार काम करने के बजाय एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप का गेम खेल रही है। दूसरी तरफ पड़ोसी मुल्क चीन है, जो प्रदुषण से लड़ने के लिए लगातार काम कर रहा है।

एयर प्यूरीफायर से हवा हो रही साफ
चीन ने पिछले साल एयर प्यूरीफायर का एक्सपेरिमेंट किया था, जो अब सफल हो चुका है। चीन के उत्तरी प्रांत में दुनिया का सबसे बड़ा एयर प्यूरीफायर टॉवर लगाया है, जिसकी 100 मीटर है। चीन के शांक्जी प्रांत के झियान में लगा यह टॉवर ना सिर्फ जहरीले धुएं से बल्कि कोहरे से भी निजात दिलाता है। इसी साल जनवरी में यह टॉवर चर्चा में आया था, जब इसे एक सफल एक्सपेरिमेंट के रूप में जाना गया। यह टॉवर पूरे शहर के 10 वर्ग किमी तक के क्षेत्र के मौसम को साफ रखता है और एक दिन में 10 मिलियन क्यूबिक मीटर साफ हवा पैदा करता है।

कोयले के पावर स्टेशन पर रोक
चीन की राजधानी बीजिंग में खराब हवा होने के बावजूद पिछले एक दशक से तेजी के साथ आबादी बढ़ रही है। यहां तक कि बीजिंग के लोग भी सवाल कर रहे हैं कि जब यहां इतना प्रदूषण है, तो लोगों बाहर से क्यों आ रहे हैं। हालांकि, प्रदूषण को लेकर चीन की सरकार भी उतनी ही चिंताजनक है, जितनी की आम जनता। पिछले दो सालों में चीन की सरकार ने अपने देश में प्रदूषण से लड़ने के लिए अभूतपूर्व कदम उठाते हुए कई लोगों को नियमों का उल्लंघन करने पर सख्त सजा भी दी है। चीन ने कोयले के पावर स्टेशन पर रोक या प्रतिबंध लगाकर प्रदूषण से लडने का अद्भूत काम किया है।

एनर्जी के लिए नेचुरल गैस की तरफ स्विच चीन
कोयले के पावर स्टेशन पर प्रतिबंध लगाने के बाद 2016 की तुलना में 2017 में 54 फीसदी तक प्रदुषण में कमी आयी है। कोयला से चलने वाली इंडस्ट्री को बंद कर उनकी जगह पर प्राकृतिक गैस की तरफ स्विच करने के बाद खासकर राजधानी बीजिंग में प्रदूषण में जबरदस्त कमी देखने को मिली है। अब चीन एनर्जी के लिए दूसरे संसाधनों पर निर्भर हो रहा है, भले ही कई जगहों पर एनर्जी पहुंचने में मुश्किले आ रही है, लेकिन वहां की सरकार ने लोगों की चिंताओं को देखते हुए प्रदूषण से लड़ने के लिए सही दिशा में कदम उठाए हैं।












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