Coronavirus: जापान की Shift from China नीति से डरे चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, कर रहे मीटिंग पर मीटिंग
बीजिंग। कोरोना वायरस महामारी ने अगर दुनिया की अर्थव्यवस्था को तोड़ दिया है तो वहीं चीन भी कुछ कम नहीं घबराया हुआ है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग पिछले दिनों जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे की तरफ से हुए एक ऐलान की वजह से खासे परेशान और डरे हुए हैं। जापानी पीएम आबे ने एक ऐसी अर्थव्यवस्था को तैयार करने का प्रस्ताव रखा है जो चीन पर कम से कम निर्भर हो। आबे चाहते हैं कि अगर कोई संकट आए तो सप्लाई चेन पर किसी तरह का असर नहीं पड़ना चाहिए। जापानी पीएम के ऐलान ने चीन के राजनीतिक हल्कों में भूचाल ला दिया है।

37 प्रतिशत कंपनियों ने चीन से काटी कन्नी
निक्केई एशियन रिव्यू की एक रिपोर्ट के मुताबिक पिछले दिनों सेंट्रल बीजिंग के झोंगनानहाई जहां पर चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के नेता और सरकार के कई ऑफिसेज हैं, वहां के माहौल में काफी हलचल देखी जा सकती है। चीन की अर्थव्यवस्था से जुड़े करीबी सूत्रों के हवाले से निक्केई ने लिखा है, 'विदेशी कंपनियां अब चीन को छोड़कर जाना चाहती हैं और इस बात को लेकर सभी काफी चिंतित हैं।' सूत्रों की मानें तो जापान के पीएम की तरफ से जो पैकेज चीन छोड़ने पर इंडस्ट्रीज को देने का फैसला किया गया है, उसने सरकार की और राष्ट्रपति जिनपिंग की नीदें उड़ा दी है। फरवरी में हुए एक सर्वे के मुताबिक कोरोना वायरस संकट की वजह ये जापान की 37 प्रतिशत यानी 2600 कंपनियों ने माल की खरीद के लिए चीन की जगह दूसरे देशों पर निर्भरता दिखाई थी।

पांच मार्च को आबे ने की अहम मीटिंग
जिनपिंग, जापान के दौरे पर जाने वाले थे मगर महामारी ने इस दौरे में खलल डाल दिया। यह जिनपिंग की पहली जापान यात्रा थी और इस दौरान चीनी राष्ट्रपति दोनों देशों के बीच रिश्तों की नई शुरुआत का ऐलान करने वाले थे। साल 2020 में जापान में ओलंपिक्स का आयोजन होना था और जिनपिंग की योजना आबे का उत्साहवर्धन करने की भी थी। अब जिनपिंग का दौरा और ओलंपिक्स दोनों ही कैंसिल हो गए हैं। साथ ही जापान और चीन के रिश्तों में भी खराश आनी शुरू हो गई है। पांच मार्च को आबे ने जापान के टॉप बिजनेस लीडर्स से मुलाकात की थी और इसी मुलाकात में 'शिफ्ट फ्रॉम चाइना' नीति को तैयार किया गया था।

आठ अप्रैल को जिनपिंग ने बुलाई मीटिंग
सात अप्रैल को जापान ने आपातकालीन इकोनॉमिक पैकेज का ऐलान किया जिसमें 2.2 बिलियन डॉलर का फंड इंडस्ट्री के लिए तय किया गया। घबराए जिनपिंग ने इसके अगले दिन यानी आठ अप्रैल को पोलितब्यूरो स्टैंडिंग कमेटी की एक मीटिंग बुलाई। निक्केई की रिपोर्ट में लिखा है कि बीजिंग में हुई इस मीटिंग में जिनपिंग काफी परेशान थे। उन्होंने यहां पर कहा, 'जिस तरह से महामारी दुनियाभर में फैल रही है, दुनिया की अर्थव्यवस्था एक खतरे की तरफ बढ़ रही है।'

जिनपिंग बोले बुरे के लिए तैयार रहो
जिनपिंग ने आगे कहा, 'अस्थिर और अनिश्चित कारक भी बढ़ते जा रहे हैं।' शी, कम्युनिस्ट पार्टी के मुखिया भी हैं। उन्होंने सभी को साफ कह दिया कि बुरे दौर के लिए तैयार रहें। जिनपिंग ने यह बात भी कहीं कि दिमाग से तैयार रहें और आने वाले समय में होने वाले बदलाव के साथ आगे बढ़ें। सात सदस्यों वाले पोलित ब्यूरो स्टैंडिग कमेटी आमतौर पर हफ्ते में एक बार ही मिलती है। मगर इस तरह की मीटिंग असाधारण हैं।












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