चीनी कर्नल ने भारत को ललकारा.. जानिए चीन की सेना और इंडियन आर्मी में कौन कितना ताकतवर है?
भारत और चीन के बीच लगातार सीमा विवाद बढ़ता जा रहा है और युद्ध की संभावना से इनकार भी नहीं किया जा सकता है। वहीं, अब भारत को अमेरिका से सीमा पर टेक्नोलॉजिकल मदद मिलनी शुरू हो गई है।

Indian Army Vs Chinese Army: सिंगापुर में पिछले हफ्ते शांगरी-ला डायलॉग में बोलते हुए चीन के एक सीनियर कर्नल ने भारत की सैन्य क्षमता पर सवाल उठाने की कोशिश की और कहा, कि चूंकी भारत चीन की बराबरी नहीं कर सकता है, इसीलिए चीन को भारत से खतरा नहीं है।
चीनी सेना के कर्नल के बयान में ड्रैगन का घमंड झलकता है और एक तरह से चीन ने ये दिखाने की कोशिश की है, कि उसके लिए भारतीय सेना को हैंडल करना कोई बड़ी बात नहीं है।
चीनी कर्नल का कहना था, कि भारत के पास जो रक्षा उद्योग और हथियार प्रणाली है, वो चीन की बराबरी नहीं कर सकता है, इसीलिए चीन को भारत से कोई खतरा नहीं है। लिहाजा, आईये चीन और भारतीय सेना की तुलना करते हैं, कि कौन कितना ताकतवर है।
भारत से करीब तीन गुना बड़ा है चीन
क्षेत्रफल के लिहाज से चीन, भारत से तीन गुना ज्यादा बड़ा है, लिहाजा चीन को भारत से तीन गुना ज्यादा अपनी सीमा की सुरक्षा करनी पड़ती है। इसके साथ ही, भारत को मुख्य तौर पर हिमालयन क्षेत्र में ज्यादा खतरा है, क्योंकि वहां पर चीन और पाकिस्तान की सीमा लगती है।
वहीं, बात समुद्री क्षेत्र की करें, तो भारत को हिंद महासागर, बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में मुख्य तौर पर समु्द्री सुरक्षा पर ध्यान देना होता है।
वहीं, भारत के सिर्फ दो ही दुश्मन हैं, एक चीन और दूसरा पाकिस्तान। लेकिन, चीन की आक्रामकता ने उसके कई दुश्मन बना दिए हैं। जैसे भारत, ताइवान, जापान, फिलीपींस, ब्रूनेई, वियतनाम और लाओस, दक्षिण कोरिया ऐसे देश हैं, जिनके साथ चीन के गंभीर सीमा विवाद हैं और इनमें से ज्यादातर देशों के साथ सुपरपावर अमेरिका खड़ा है। चीन के 17 देशों के साथ सीमा विवाद है, लिहाजा 17 देशों से लगती सीमाओं के पास चीन को अपने सैनिकों को सुरक्षा के लिए तैनात करनी पड़ती है।
इसके अलावा चीन, समुद्र में भी कई देशों से उलझता रहता है। दक्षिण चीन सागर में चीन का विवाद कई देशों से चलता रहता है
फिलीपींस के साथ चीन का स्कारबोरो और स्प्रेटली आइलैंड द्वीप को लेकर गंभीर सीमा विवाद हैं और हाल ही में फिलीपींस ने अमेरिका से साथ सैन्य समझौता भी किया है। इसके अलावा, मलेशिया, वियतनाम, इंडोनेशिया, जापान, साउथ कोरिया, नॉर्थ कोरिया, सिंगापुर, ब्रूनेई के साथ समुद्री विवाद हैं।
लिहाजा, भारत और चीन की सेना के बीच जब तुलना होती है, तो इन सभी फैक्टर्स को ध्यान में रखना सबसे ज्यादा जरूरी होता है, क्योंकि आकार में चीन की सेना भले ही विशालकाय लगेगी, लेकिन चीन की सेना को इतने ज्यादा मोर्चों पर भी तैनात रहना होता है।
किस देश की सेना कितनी ताकतवर?
हमने Global Firepower 2023 की रिपोर्ट के आधार पर भारत और चीन की सेना की तुलना की है। भारत और चीन की सैन्य क्षमताओं की तुलना करके हम क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक सुरक्षा के लिए दोनों देशों की प्रतिद्वंद्विता के संभावित प्रभावों को बेहतर ढंग से समझ सकते हैं।
ग्लोबल फायर पावर इंडेक्स के मुताबिक, सैन्य ताकत के मामले में चीन का विश्व में तीसरा स्थान है, जबकि भारत चौथे नंबर पर है। पहले नंबर पर अमेरिका और दूसरे नंबर पर रूस है। हालांकि, यूक्रेन युद्ध के बाद जब सैन्य ताकत की लिस्ट अपडेट होगी, तो इसमें परिवर्तन आने की संभावना है, क्योंकि युद्ध में रूस की सेना को काफी नुकसान हुआ है।
- Global Firepower 2023 के मुताबिक, चीन के पास कुल 3,284 एयरक्राफ्ट हैं, जबकि भारत के पास कुल 2210 एयरक्राफ्ट हैं।
- चीन के पास 2,185,000 एक्टिव सेना के जवान हैं, भारत के पास 1,455,550 जवान हैं
- चीन के पास 8,000,000 रिजर्व फोर्स हैं, भारत के पास 1,155,000 रिजर्व फोर्स है
- चीन के पास 1119 फायटर जेट्स हैं, जबकि भारत के पास 577 फायटर जेट्स हैं
- चीन के पास 6 एरियल टैंकर हैं, जबकि भारत के पास 4 एरियल टैंकर हैं
- चीन के पास 913 हेलीकॉप्टर्स हैं, जबकि भारत के पास 807 हेलीकॉप्टर्स हैं
- चीन के पास 507 एयरपोर्ट्स हैं, भारत के पास 346 एयरपोर्ट्स हैं
- चीन के पास 4 हजार 950 टैंकों की क्षमता है, जबकि भारत के पास 4,614 टैंक हैं
- फ्लीट स्ट्रेंथ (नौसेना) - चीन के पास 730, भारत के पास 295
- एयरक्राफ्ट कैरियर- चीन के पास 3 एयरक्राफ्ट कैरियर हैं, भारत के पास 2 एयरक्राफ्ट कैरियर हैं
- हैलो कैरीज- चीन के पास 3 भारत के पास शून्य
- डिस्ट्रॉयर्स- चीन के पास 50, भारत के पास 11
- पोर्ट्स एंड टर्मिनल्स- चीन के पास 22, भारत के पास 13
भारत और चीन की सैन्य क्षमताएं महत्वपूर्ण हैं और क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा गतिशीलता को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की संभावना है। चीन और भारत, दोनों देशों ने अपने रक्षा क्षेत्रों में भारी निवेश किया है।
इसमें कोई शक नहीं, कि चीन के पास ज्यादा क्षमता है, लेकिन भारत से ज्यादा जगहों पर चीन उलझा हुआ भी है। वहीं, अब भारत ने मेक इन इंडिया के तहत हथियार बनाने की घरेलू क्षमता में भी विस्तार करना शुरू कर दिया है और उसके परिणाम अगले 10 से 15 सालों में दिखने शुरू हो जाएंगे, जिसमें 6 न्यूक्लियर पनडुब्बियों के निर्माण के साथ साथ जेट इंजन, ब्रह्मोस का अपग्रेडेशन भी शामिल हैं।
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लिहाजा, चीनी कर्नल ने बड़बोला बयान भले ही दिया है, लेकिन अब इतना तय है, कि चीन, भारत से सीधी जंग लड़ने की हिम्मत नहीं कर सकता है।












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