ज्वालामुखी, जिसने पूरे शहर को राख कर दिया था, वो फिर से हो गया है एक्टिव, इस बार क्या होगा?
1985 में पहली बार इस ज्वालामुखी में विस्फोट हुआ था, जिसमें पूरा शहर जल गया था और 25 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी।
कोलंबिया, नवंबर 05: वो ज्वालामुखी विस्फोट, जिसमें एक पूरे शहर को तबाह कर दिया था और पूरे शहर को जलाकर राख कर दिया था, वो ज्वालामुखी फिर से एक्टिव हो चुका है। 25 हजार से ज्यादा लोगों को जलाकर राख कर देने वाला ज्वालामुखी फिर से जिंदा हो चुका है और उसने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। कोलंबिया शहर को एक विस्फोट में उड़ा देने वाले ज्वालामुखी के एक्टिव होने के बाद वैज्ञानिकों ने गंभीर चेतावनी जारी की है।
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जिंदा हो गया ज्वालामुखी
कोलंबियाई भूवैज्ञानिक सेवा ने कहा कि नेवाडो डेल रुइज ज्वालामुखी फिर से एक्टिव हो रहा है और इसमें फिर से गतिविधियां दिखाई दे रही हैं। पश्चिमी कोलंबिया में नेवाडो डेल रुइज ज्वालामुखी को रिंग ऑफ फायर भी कहा जाता है, जो इस तरह की कई ज्वालामुखियों में से एक है। ये ज्वालामुखी प्रशांत बेसिन के चारों ओर बने एक पथ के अंदर है, जो सक्रिय ज्वालामुखियों और लगातार आने वाले भूकंपों की वजह से प्रसिद्ध रहा है। वैज्ञानिकों का कहना है कि 1985 में इस ज्वालामुखी में विस्फोट हुआ था और फिर उसके बाद ये ज्वालामुखी निष्क्रीय हो गया था, लेकिन एक बार फिर से इस ज्वालामुखी के अंदर से गड़गड़ाहट शुरू हो गई है और इस ज्वालामुखी में कभी भी बड़ा विस्फोट हो सकता है।

1985 में फटा था ज्वालामुखी
रिपोर्ट के मुताबिक, 13 नवंबर 1985 को इस ज्वालामुखी से आग का लावा निकलना शुरू हुआ था और ये ज्वालामुखी फट गया था। इस ज्वालामुखी ने पहाड़ को स्थायी रूप से ढकने वाली बर्फ को पिघला दिया दिया था, जिसकी वजह से अर्मेरो शहर में सिर्फ आग ही आग फैल गई थी और 25 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी। कोलंबिया में उस भीषण ज्वालामुखी विस्फोट में मृतकों को श्रद्धांजलि देने के लिए 13 साल के लड़के ओमायरा सांचेज का प्रतिमा बनाया गया था, जो ज्वालामुखी विस्फोट के बाद आग के लावे के बीच फंस गया था। वो अपने नष्ट हुए घर के मलबे के बीच फंसा हुआ था, जबकि चारों और आग की नदी बह रही थी। रिपोर्ट के मुताबिक, तीन दिनों तक मलबे में फंसे रहने के बाद उसकी मौत हो गई थी।

सबसे खतरनाक विस्फोट
1985 में कोलंबिया में पहाड़ पर हुए विस्फोट को इंसानी इतिहास में सबसे खतरनाक प्राकृतिक आपदाओं में से एक माना जाता है और 20 वीं शताब्दी के सबसे घातक ज्वालामुखी विस्फोटों में से एक माना जाता था। अब एक बार फिर से वैज्ञानिकों ने कहा है कि, ये ज्वालामुखी जिंदा हो गया है और इसमें से कभी भी विस्फोट हो सकता है।












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