दिग्गज अंतरिक्ष यात्री ने की Aditya-L1 मिशन की तारीफ, कहा- स्पेस मार्केट में काफी आगे निकल चुका है भारत
चंद्रयान-3 की चांद पर सफल सॉफ्ट लैंडिंग के बाद भारत की अंतरिक्ष अनुसंधान एजेंसी इसरो ने अब सूर्य का अध्ययन करने के लिए सोलर मिशन 'आदित्य-एल1' को सफलतापूर्वक लॉन्च किया है। भारत ने इसके साथ ही सूर्य के अध्ययन की दिशा में एक अहम कदम बढ़ा दिया है।
भारत के स्पेस प्रोग्राम को नित दिन नई ऊंचाई छूते देख अब इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन के पूर्व कमांडर क्रिस हैडफील्ड ने भी इसरो की जमकर तारीफ की है। क्रिस हेडफील्ड ने भारत की तकनीकी कौशल की सराहना करते हुए कहा कि भारत ने स्पेस और इससे जुड़ी तकनीकों पर काम करते हुए खुद को एक मजबूत स्थिति में पहुंचा दिया है।

क्रिस हैडफील्ड ने कहा, "स्पेस कॉमर्स, GPS सैटेलाइट, मौसम उपग्रह, दूरसंचार, चंद्रमा पर खोज, सूर्य पर खोज, यह सब एक जीवनकाल से भी कम समय में हुआ है। इसलिए यह इतनी अधिक अंतरिक्ष प्रतिस्पर्धा नहीं है, क्योंकि यह हर किसी के लिए अंतरिक्ष में एक नया अवसर है।"
वैज्ञानिक हैडफील्ड ने आगे कहा,"हालांकि अब दौड़ वास्तव में इस बारे में है कि कौन टेक्नोलॉजी को आर्थिक रूप से आगे बढ़ाकर स्पेस बिजनेस को लाभदायक बना सकता है। भारत ऐसा करने के लिए वास्तव में बहुत मजबूत स्थिति में है। भारत सरकार स्पेस कारोबार को भी विकसित कर रही है और इसमें निजीकरण को भी बढ़ावा दे रही है, ताकि व्यवसायों और भारत के लोगों को इसका फायदा हो सके।"
क्रिस हैडफील्ड ने भारत के स्पेस मिशन की कामयाबी के लिए भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भी तारीफ की। उन्होंने कहा, 'ऐसा लगता है कि पीएम मोदी ने कई वर्षों से यह देखा है। वह इसरो से सीधे तौर पर जुड़े हुए हैं। अंतरिक्ष अभियान को बढ़ावा देना भारतीय नेतृत्व की ओर से एक बुद्धिमत्तापूर्ण कदम है।'
चंद्रयान-3 की तरह, 'आदित्य-एल1' ऊंचाई पर पृथ्वी की परिक्रमा करेगा और फिर यह अधिक तेजी से सूर्य की ओर उड़ान भरेगा। 'आदित्य-एल1' पृथ्वी से लगभग 15 लाख किलोमीटर की ऊंचाई तक पहुंचेगा। इतनी ऊंचाई पर पहुंचने के बाद ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि ये पृथ्वी और सूर्य के बीच गुरुत्वाकर्षण बल पर काबू पा लेगा।
इस दौरान ये एक बिंदु (लैगरेंज प्वाइंट) पर रुकेगा जिसे वैज्ञानिक भाषा में एल1 नाम दिया गया है। 'आदित्य-एल1' अंतरिक्ष यान यह दूरी करीब चार महीने में तय करेगा। यहां से वह सूर्य की विभिन्न गतिविधियों, आंतरिक और बाहरी वातावरण आदि का अध्ययन करेगा।
आपको बता दें कि भारत ने स्पेस लॉन्च के काम को प्राइवेट कंपनियों के लिए खोल दिया है और इस क्षेत्र में विदेशी निवेश की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। सरकार का लक्ष्य अगले दशक में ग्लोबल लॉन्च मार्केट में अपनी हिस्सेदारी पांच गुना तक बढ़ाने का है।












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