यूक्रेन में रूस को फंसा देख चीन ने भी पल्ला झाड़ा? पांच इतिहासकारों ने कहा, पुतिन ने हमें बेवकूफ बनाया
चीनी इतिहासकार जू गुओकी ने अपने ही देश के डिप्लोमेट्स की यूक्रेन युद्ध पर दी जा रही प्रतिक्रियाओं पर हैरानी जताई है और चीनी सोशल मीडिया पर उन्होंने यूक्रेन युद्ध पर तीखी प्रतिक्रिया दी हैॉ।
बीजिंग/कीव/मॉस्को, फरवरी 28: चीन के एक इतिहासकार जू गुओकी ने रूसी आक्रमण की जमकर निंदा करते हुए कहा है कि, रूसी राष्ट्रपति पुतिन की 'करतूत' पर चीनी सरकार की खामोशी चिंताजनक है। चीनी इतिहासकार ने यूक्रेन युद्ध को लेकर कहा है कि, सौ साल तक जंग लड़ने के बाद यूरोप शांत हो गया है, लेकिन दो विश्वयुद्ध का चीन पर काफी गहरा असर पड़ा है और दुनिया एक बार फिर से युद्घ की दिशा में वापस लौट रहा है, जो काफी चिंताजनक है।

पुतिन पर बरसे चीनी इतिहासकार
चीनी इतिहासकार जू गुओकी ने अपने ही देश के डिप्लोमेट्स की यूक्रेन युद्ध पर दी जा रही प्रतिक्रियाओं पर हैरानी जताई है और चीनी सोशल मीडिया पर उन्होंने यूक्रेन युद्ध पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि, "मुझे डर है कि... ऐसा लगता है कि हमने अभी भी पिछली त्रासदियों से सबक नहीं सीखा है। एक इतिहासकार के तौर पर मैं बहुत निराश हूं।" शनिवार को चीन के पांच प्रसिद्ध इतिहासकारों ने चीनी शासन को एक चिट्ठी लिखकर यूक्रेन युद्ध पर बीजिंग के रूख पर हैरानी जताई है रूसी कार्रवाई की निंदा करने और शांति का आह्वान किया है। चीनी इतिहासकारों ने यूक्रेन युद्ध पर चीन की सरकार ने अपना रूख साफ करने की मांग की है और कहा है कि, रूस जो कर रहा है, वो गलत है और चीन को इस बात को जोर से कहना चाहिए।

इतिहासकारों ने पूछा शासन से सवाल
चीन के पांच इतिहासकारों ने यूक्रेन युद्ध के मकसद पर सवाल उठाते हुए पूछा है, कि क्या आखिर "इस युद्ध से क्या होगा? क्या इससे बड़े पैमाने पर विश्व युद्ध होगा?" इतिहासकारों ने पूछा है कि, "इतिहास में बड़ी तबाही अक्सर स्थानीय संघर्षों से शुरू होती है। हमने यूक्रेन के खिलाफ रूस के युद्ध का कड़ा विरोध किया। रूस द्वारा एक संप्रभु राज्य पर बल द्वारा आक्रमण... संयुक्त राष्ट्र चार्टर पर आधारित अंतर्राष्ट्रीय संबंधों के मानदंडों का उल्लंघन है और मौजूदा अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा प्रणाली का उल्लंघन है।"

‘’चीन को करना चाहिए विरोध’’
चीनी इतिहासकारों ने चीन की सरकार को लिखी चिट्ठी में मांग की है, कि रूस की कार्रवाईयों की आलोचना की जाए और रूस को रोकने की कोशिश की जाए। उन्होंने लिखा है कि, ''सार्वजनिक रूप से, चीन क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन करने वाले किसी भी कार्य का विरोध करता है।'' हालांकि, चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने शुक्रवार को अपने मंत्रालय की वेबसाइट पर देर रात प्रकाशित एक पोस्ट में इस स्थिति को फिर से सरकार का रूख स्पष्ट किया है और चीन भी यूक्रेन युद्ध पर खामोश बना हुआ है। चीन की तरफ से यूक्रेन में रूस द्वारा किए गये हमले को लेकर अमेरिका और नाटो को ही जिम्मेदार ठहराया गया है।

‘विश्वसनीयता कमजोर कर रहा चीन’
चीनी सरकार को लिखी गई सार्वजनिक चिट्ठी में चीनी इतिहासकारो ने सवाल उठाते हुए पूछा है कि, "क्या वे वास्तव में उस पर (युद्ध) विश्वास करते हैं? क्या चीन के लिए यह उचित है कि वह अनिश्चितकालीन बचाव के लिए अपनी विश्वसनीयता को कमजोर करे? मुझे डर है कि उन्हें पुतिन द्वारा मूर्ख बनाया गया है," इतिहासकार जू ने इस बात पर जोर देते हुए कहा कि, उन्होंने और उनके सहयोगियों ने यह पत्र इसलिए लिखा है क्योंकि वे देश से प्यार करते हैं, और वे चीन के भविष्य को 'रोकने' के लिए संभावित विश्वव्यापी त्रासदी की कामना नहीं करते हैं।'' उन्होंने कहा कि, "यह केवल एक काला और सफेद मामला है और यह एक आक्रमण है। जैसा कि चीनी कहावत है, आप हिरण को घोड़ा नहीं कह सकते। चीनी इतिहासकारों के रूप में हम नहीं चाहते कि, चीन को किसी ऐसी चीज में घसीटा जाए जो मौजूदा विश्व व्यवस्था को मौलिक रूप से नुकसान पहुंचाए। मानव जाति के प्रेम, विश्व शांति और विकास के लिए हमें यह स्पष्ट करना चाहिए।"

सोशल मीडिया से हटाई गई चिट्ठी
चीन के पांच प्रसिद्ध इतिहासकारों ने शी जिनपिंग शासन को संबोधित करते हुए चीन की सोशल मीडिया पर चिट्ठी जरूर डाली थी, लेकिन कुछ ही देर बाद चीन की सरकार ने ओपन लेटर को इंटरनेट से हटा दिया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, इस ओपन लेटर को इंटरनेट सेंसर द्वारा दो घंटे 40 मिनट बाद इंटरनेट से फौरन हटा दिया गया है। वहीं, चीनी सोशल मीडिया पर पांचों इतिहासकारों को जमकर ट्रोल किया जा रहा है और उनकी निंदा की जा रही है। बताया जा रहा है कि, शी जिनपिंग के समर्थकों ने ओपन लेटर को सोशल मीडिया पर डालने के बाद उन्हें ट्रोल करना शुरू कर दिया। चीनी ट्रोलर्स ने इन इतिहासकारों को "शर्मनाक" और "देशद्रोही" कहना शुरू कर दिया है। इतिहासकारों से पूछा जा रहा है, कि "आपने इराक में पश्चिम के आक्रमण के दौरान कुछ क्यों नहीं कहा" ऐसे कई सवाल उनसे पूछे जा रहे हैं।

क्या बीजिंग अपनी सोच बदल रहा है?
चीन में जनता की राय को आंकना मुश्किल है, लेकिन पिछले कुछ दिनों में, बीजिंग के राजनयिक एक यूक्रेन युद्ध पर किसी आखिरी नतीजे तक पहुंचने के लिए 'संघर्ष' कर रहे हैं। हालांकि, चीन की सोशल मीडिया पर यूक्रेन पर हमला करने के लिए रूसी राष्ट्रपति पुतिन की काफी तारीफ की जा रही है। कुछ ने रूसी नेता को "इस सदी का सबसे महान रणनीतिकार" कहा है। तो अब चीनी सोशल मीडिया पर चीन की सरकार से मांग की जा रही है कि, वो इस स्थिति का फायदा उठाते हुए "ताइवान को वापस लेने" की कोशिश शुरू कर देनी चाहिए। आपको बता दें कि, चीन में सोशल मीडिया पर यूक्रेन युद्ध पर काफी चर्चा की जा रही है और ज्यादातर सोशल मीडिया यूजर्स रूस और रूसी राष्ट्रपति पुतिन के समर्थन में पोस्ट लिख रहे हैं।
रूसी कार्रवाई के विरोधी भी एक्टिव
ऐसा भी नहीं है कि, चीन के सभी सोशल मीडिया यूजर्स रूस की तारीफ ही कर रहे हों, चीनी सोशल मीडिया पर रूस के खिलाफ भी आवाज उठाई जा रही है, लेकिन चीन में ऐसे लोगों को बुरी तरह से ट्रोल करते हुए उन्हें "कमजोर" और "भोला-भाला" कहा जा रहा है। चीनी सोशल मीडिया वी-चैट पर एक सोशल मीडिया यूजने ने जब पूछा कि "अगर रूस को नाटो के साथ समस्या है, तो उसे नाटो से निपटना चाहिए, उसने यूक्रेन पर आक्रमण क्यों किया?" इस वीडियो को कुछ ही घंटों में 23 हजार से ज्यादा लोगों ने शेयर किया है।

पुतिन की कार्रवाई का विरोध
हालांकि, जैसे-जैसे युद्ध तेज होता है, ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि, बीजिंग अपनी सोच बदल सकता है। शुक्रवार को चीन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के मतदान के अंत में रूसी आक्रमण की निंदा करते हुए भाग लिया। पश्चिमी राजनयिकों ने इसे एक संकेत के रूप में देखा कि, पुतिन की कार्रवाई का बचाव करने के रूप में देखे जाने पर बीजिंग तेजी से असहज हो रहा है, जिसकी दुनिया भर में निंदा हुई है। रविवार को कीव में चीनी दूत फैन जियानरोंग ने एक वीडियो संबोधन में जोर देकर कहा कि, चीन यूक्रेन की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करता है। उन्होंने यूक्रेन की स्थित को देखते हुए चीनी नागरिकों से भी आग्रह किया, कि वे अपनी पहचान प्रकट न करें या अपनी राष्ट्रीयता के किसी भी संकेत को प्रदर्शित न करें और चीन ने अपने इस आदेश को बदल दिया है, जिसमें कहा गया था कि, यूक्रेन में रहने वाले लोग अपने घरों और कारों पर चीनी झंडा लगा लें, उससे उन्हें कम खतरा होगा।












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