Ukraine Crisis: क्या है Nuclear Deterrent Force, जिसे पुतिन ने किया एक्टिव, सच में दबाएंगे परमाणु बटन?

यूक्रेन युद्ध लगातार पांचवें दिन भी जारी है और रूस काफी तेजी के साथ यूक्रेन को नेस्तनाबूत करने में लगा हुआ है। लाखों लोग इस युद्ध में प्रभावित हुए हैं और अभी तक कितनी हजार जानें गईं हैं, इसका कोई आंकड़ां भी नहीं हुए हैं।

कीव/मॉस्को, फरवरी 28: यूक्रेन युद्ध के बीच दुनिया काफी तेजी के साथ तीसरे विश्वयुद्ध की तरफ बढ़ती दिखाई दे रही है और अगर युद्ध की आग अभी भी नहीं बुझाई गई, तो हो सकता है, दुनिया को जंग की आग में झुलसाने वाले ये 'पागल' हो चुके ये नेता, दुनिया में परमाणु धमाकों के हवाले कर दे और देखते ही देखते हमारी दुनिया 'हिरोशिमा और नाकाशाकी' की तरफ जल जाए।

पुतिन की धमकी के मायने

पुतिन की धमकी के मायने

यूक्रेन युद्ध लगातार पांचवें दिन भी जारी है और रूस काफी तेजी के साथ यूक्रेन को नेस्तनाबूत करने में लगा हुआ है। लाखों लोग इस युद्ध में प्रभावित हुए हैं और अभी तक कितनी हजार जानें गईं हैं, इसका कोई आंकड़ां भी नहीं हुए हैं। वहीं, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने रविवार को अपने परमाणु हमले की आशंका को ये कहकर बढ़ा दिया है, जब उन्होंने अमेरिक और पश्चिमी देशों के द्वारा लगाए जा रहे प्रतिबंधों से चिढ़कर ‘न्यूक्लियर डिटरेंस फोर्स' को एक्टिव करने का आदेश दे दिया है। रूसी राष्ट्रपति के इस आदेश के बाद दुनिया में परमाणु युद्ध छिड़ने की आशंका काफी ज्यादा बढ़ चुकी है और अमेरिका भी नाटो देशों के साथ आपातकालीन बैठक कर रहा है। लेकिन, पुतिन के इस फैसले के मायने क्या हैं और क्या वो वाकई परमाणु बम भी फोड़ेंगे? इसको लेकर आशंका काफी ज्यादा बढ़ चुकी है।

पुतिन ने ऐसा आदेश क्यों दिया?

पुतिन ने ऐसा आदेश क्यों दिया?

24 फरवरी को यूक्रेन पर हमला करने का आदेश देने वाले पुतिन की सोच थी, कि एक से दो दिनों के अंदर वो कीव में सत्ता परिवर्तन कर देंगे और लड़ाई खत्म हो जाएगी। पुतिन किसी भी हाल में लड़ाई को लंबा खींचने का इरादा नहीं रखते थे, लेकिन यूक्रेन की सेना ने जिस तरह से प्रतिरोध किया है, उसने रूसी राष्ट्रपति को चौंका दिया है। इस बीच अमेरिका और पश्चिमी देशों ने रूस के खिलाफ इतने प्रतिबंध लगा दिए हैं, कि रूसी अर्थव्यवस्था का पोलियोग्रस्त होना तय माना जा रहा है। अब अगर रूस ये लड़ाई बंद भी कर देता है, तो रूस की अर्थव्यवस्था का धूल में मिलना और रूस में बदहाली की सुनामी आनी तय है और इन सबके बीच लड़ाई जारी है और अब रूस के लोग भी अपने राष्ट्रपति से पूछने लगे हैं, कि इस लड़ाई के क्या मायने हैं? अगर राष्ट्रपति पुतिन कीव पर कब्जा करने में नाकामयाब रहते हैं, तो फिर वो अपनी जनता के सामने क्या मुंह लेकर जाएंगे और एक्सपर्ट्स का मानना है कि, इन सवालो ने पुतिन को बौखलाहट से भर दिया है और उन्होंने ‘न्यूक्लियर डिटरेंस फोर्स' को एक्टिव करने का आदेश दे दिया।

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    क्या वाकई परमाणु बम फोड़ देंगे पुतिन?

    क्या वाकई परमाणु बम फोड़ देंगे पुतिन?

    क्या पुतिन वास्तव में ऐसे गैर-जिम्मेदार नेता साबित होंगे, जो परमाणु बम फोड़ देंगे? इस सवाल के जवाब पर कई डिफेंस एक्सपर्ट मौन हो जा रहे हैं। डिफेंस एक्सपर्ट्स का मानना है कि, पुतिन की पिछले एक हफ्ते में जितनी जग-हंसाई और आलोचना हुई है, उसे बर्दाश्त वो कैसे कर पाएंगे? एक्सपर्ट्स का कहना है कि, ये दूसरा मौका है, जब पुतिन ने यूक्रेन पर हमला किया है और इस बार उनकी सेना मिसाइल अटैक और रॉकेट हमले कर रही है। राजधानी कीव समेत यूक्रेन के कई हिस्से, एयरपोर्ट्स, ऊर्जा संयंत्र और सैन्य ठिकाने पूरी तरह से बर्बाद हो चुके हैं। नोबेल शांति पुरस्कार विजेता और नोबाया गजेटा अखबार के मुख्य संपादक दिमित्री मुरातोव का मानना है कि, ‘पुतिन का ऐलान दुनिया के लिए सीधी तौर पर एक धमकी है और पुतिन जिस अंदाज में बात कर रहे थे, उससे लग रहा था कि, वो एक नेता नहीं, बल्कि पृथ्वी के मालिक की तरह बात कर रहे हैं'।

    ‘उंगली में घुमा रहे थे परमाणु बटन’

    ‘उंगली में घुमा रहे थे परमाणु बटन’

    दिमित्री मुरातोव ने बीबीसी से कहा कि, ‘जिस तरह से एक कार ड्राइवर अपनी उंगलियों में कार की चाबी का छल्ला घुमाता है, उसी तरह से व्लादिमी पुतिन परमाणु बटन घुमा रहे थे और उन्होंने कई बार कहा, कि अगर रूस नहीं रहा, तो फिर हमें इस ग्रह की क्या जरूरत है?' उन्होंने कहा कि, ‘पुतिन की बातों पर किसी ने ध्यान नहीं दिया, लेकिन जिस तरह से उन्होंने धमकी दी है, उससे साफ पता चलता है कि, अगर रूस के साथ वैसा बर्ताव नहीं किया गया, जैसा पुतिन चाहते हैं, तो फिर वो सबकुछ बर्बाद कर देंगे।' रूसी राष्ट्रपति ने अपने रक्षा मंत्री और अपनी सेना के जनरल स्टाफ को ‘न्यूक्लियर डिटरेंस फोर्स' को एक्टिवेट करने के आदेश दे दिए हैं और ये विनाशकारी धमकी है।

    क्या है ‘न्यूक्लियर डिटरेंस फोर्स’?

    क्या है ‘न्यूक्लियर डिटरेंस फोर्स’?

    ‘न्यूक्लियर डिटरेंस फोर्स' शब्द अमेरिका और रूस के बीच हुई शीत युद्ध के बीच आया था और ‘न्यूक्लियर डिटरेंस फोर्स' परमाणु हमले करने और परमाणु हमलों से बचाने वाले स्पेशल फोर्स को कहा जाता है। जिस वक्त रूस और अमेरिका के बीच शीत युद्ध चल रही थी, उस वक्त अमेरिका ने ‘न्यूक्लियर डिटरेंस फोर्स' शब्द का इस्तेमाल किया था और अमेरिका के इस शब्द का मतलब ये था कि, अगर कोई देश या खुद रूस ही, अमेरिका के ऊपर परमाणु हमला करने की कोशिश करता है, तो ये स्पेशल फोर्स उस हमले को रोकने की कोशिश कर सके। अब इस वक्त जब रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध चल रहा है, तो रूस ने अमेरिका की ही नीति को कॉपी कर लिया है और साफ कर दिया है कि, अगर रूस पर ऐसे प्रतिबंध लगाए जाते हैं, या फिर नाटो देश यूक्रेन की मदद के लिए आते हैं, तो फिर रूस परमाणु हमला करने से पीछे नहीं रहेगा।

    रूस के पास सबसे ज्यादा परमाणु बम

    रूस के पास सबसे ज्यादा परमाणु बम

    फेडरेशन ऑफ अमेरिकन साइंटिस्ट यानि एफएएस की रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया में इस वक्त रूस के पास सबसे ज्यादा परमाणु बम मौजूद हैं। परमाणु बम को लेकर एफएएस की लिस्ट के मुताबिक रूस के पास इस वक्त 6257 परमाणु बम हैं, जिनमें से 1600 परमाणु बम को रूस ने तैनात करके रखा हुआ है जबकि 4497 परमाणु बम को रूस ने रिजर्व करके रखा हुआ है। वहीं, रूस ने 1700 परमाणु बमों को रिटायर्ड कर दिया है। वहीं, एफएएस की रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका के पास इस वक्त कुल 5550 परमाणु बम हैं, जिनमें से अमेरिका ने इस वक्त 1800 परमाणु बमों को तैनात करके रखा है। वहीं, अमेरिका ने 3800 परमाणु बमों को रिजर्व करके रखा है, जबकि साढ़े 1700 परमाणु बम को अमेरिका रिटायर्ड कर चुका है। वहीं, एक्टिव परमाणु बमों की अगर बात की जाए तो तीसरे नंबर पर फ्रांस और चौथे नंबर पर ब्रिटेन शामिल हैं।

    किसके पास कितने परमाणु हथियार

    किसके पास कितने परमाणु हथियार

    एफएएस रिपोर्ट के मुताबिक, चीन के पास इस वक्त 350 परमाणु बम मौजूद हैं। वहीं चौथे नंबर पर फ्रांस का स्थान है, जिसके पास 290 परमाणु बम हैं वहीं पांचवें नंबर पर 195 परमाणु बमों के साथ ब्रिटेन मौजूद है। ब्रिटेन के बाद नंबर है पाकिस्तान का, जिसके पास 165 परमाणु बम मौजूद हैं, वहीं पाकिस्तान के बाद भारत 160 परमाणु बम के साथ सातवें नंबर पर मौजूद है। हालांकि, एफएएस की रिपोर्ट में चीन के परमाणु बमों की संख्या पर शक जताई गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन के ने चोरी-छिपे भी परमाणु बम और हथियार इकट्ठा कर रखे होंगे। रिपोर्ट के मुताबिक, शीत युद्ध के बाद परमाणु हथियारों की संख्या में इसलिए कमी आ रही है क्योंकि रूस और अमेरिका अपने रिटायर्ड परमाणु बमों को खत्म कर रहे हैं।

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