नेपाली अधिकारियों को घूस खिलाकर नागरिकता ले रहे चीनी.. जासूसों को भारत में सरकारी नौकरी दिलाने की साजिश?

China-Neapal News: चीन लगातार भारत के सदियों से दोस्त रहे नेपाल को अपनी जाल में फंसा रहा है और अब ताजा खुलासा हुआ है, कि चीन के लोग, नेपाली अधिकारियों को भारी-भरकम घूस खिलाकर नेपाली नागरिकता हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं।

नेपाल में एक ऐसा मामला सामने आया है, जहां एक स्थानीय सेक्शन अधिकारी रिश्वत के बदले चीनी नागरिकों को नेपाली नागरिकता देने की कोशिश कर रहा था।

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भारत जैसे देश में, जहां नेपाल के नागरिक सरकारी नौकरियां हासिल कर सकते हैं, इस खबर ने कुछ लोगों की भौंहें चढ़ा दी हैं। कि क्या नेपाली नागरिकों के भेष में चीनी जासूस, भारतीय सरकारी पदों पर घुसपैठ करना चाहते हैं? क्या यह एक नापाक योजना है या फिर मामला सिर्फ नागरिकता हासिल करने तक ही सीमित है?

नेपाल का अधिकारी किया गया गिरफ्तार

रिपोर्ट के मुकाबिक, सेक्शन ऑफिसर के पद पर तैनात एक नेपाली अधिकारी को दो चीनी नागरिकों को नेपाल की नागरिकता देने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है, जिन्हें वर्तमान में पुलिस ने सोने की तस्करी की गतिविधियों में शामिल होने के लिए हिरासत में लिया है।

बागमती प्रांत विधानसभा सचिवालय में छठे स्तर के अधिकारी के रूप में कार्यरत राम चंद्र आर्यल को बुधवार को हेटौडा में गिरफ्तार किया गया है। आर्यल को पहले काठमांडू के थुलो भरयांग स्थित परिवहन प्रबंधन कार्यालय से बागमती प्रांत विधानसभा सचिवालय में ट्रांसफर किया गया था।

आर्यल पर जिला प्रशासन कार्यालय, कावरे में नायब सुब्बा के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान चीनी नागरिकों को नेपाली नागरिकता देने की प्रक्रिया में मदद करने का आरोप है। नेपाल पुलिस की केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीआईबी) इस मामले में आगे की जांच कर रहा है।

पता चला है, कि जनवरी 2018 में, तिब्बती वंश के बेल्जियम के नागरिक दावा त्शिरिंग और एक चीनी नागरिक दावा जिन वांग को वंश के आधार पर नेपाली नागरिकता प्रदान की गई है। जांच से पता चला है, कि आर्यल ने इन नामों को कंप्यूटर सिस्टम में अवैध तरीके से डाल दिया था। जिसके बाद चीनी नागरिक दावा जिन वांग ने नये नाम नीमा तमांग के तहत नेपाल की नागरिकता हासिल कर ली, जबकि वांग ने छद्म नाम पासांग तमांग का उपयोग करके नागरिकता ले ली।

आर्यल को 5 दिन पहले उस अपराध के लिए गिरफ्तार किया गया है, जो उसने 5 साल पहले किया था। पिछले 5 सालों में ऐसे कितने मामले हुए हैं, फिलहाल किसी को इसकी जानकारी नहीं है, जिससे माना जा रहा है, कि ये एक बहुत बड़ी साजिश हो सकती है और हो सकता है, कि चीन, अपने कई जासूसों को आधिकारिक तौर पर नेपाली नागरिक बना चुका हो, ताकि वो भारत में सरकारी नौकरियों में शामिल हो सके।

इस बीच भारतीय और नेपाली अधिकारियों की बैठक हुई। नेपाल-भारत सीमा समन्वय बैठक बुधवार को महेंद्रनगर में संपन्न हुई, जिसमें भारत में आगामी लोकसभा चुनावों को देखते हुए सुरक्षा उपायों को बढ़ाने पर सहमति बनी। सत्र के दौरान, दोनों देशों के सुरक्षा अधिकारी नेपाल-भारत सीमा क्षेत्र में आपराधिक गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए सहयोग करने पर भी सहमत हुए हैं।

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