कोरोना के दलदल में चीन ने ही दुनिया को धकेला! तीन रिसर्चर नवंबर 2019 में हुए थे कोरोना वायरस से संक्रमित

वाल स्ट्रीट जर्नल ने तमाम सबूतों के आधार पर दावा किया है कि जिस वक्त चीन में कोरोना वायरस की उत्पप्ति हो गई थी और तीनों रिसर्च करने वालों का एक साथ ही अस्पताल में जाना ये साबित करता है कि वो कोरोना वायरस से संक्रमित थे।

बीजिंग/वॉशिंगटन, मई 24: कोरोना वायरस को चीन ने ही बनाया है और इस महामारी के दलदल में दुनिया को चीन ने ही धकेला है, इस बात का शक और अब ज्यादा गहरा होने लगा है। खुलासा हुआ है कि नवंबर 2019 में चीन के वुहान शहर में स्थिति वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी के तीन रिसर्चर बीमार पड़े थे और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इस सनसनीखेज रिपोर्ट का खुलासा किया है अमेरिका के प्रतिष्ठित अखबरा वाल स्ट्रीट जर्नल ने। रिपोर्ट के मुताबिक चीन ने कोरोना वायरस को लेकर दुनिया को अंधेरे में रखा, जबकि उसे पता चल गया था कि एक जानलेवा वायरस उसकी लैब से बाहर आ चुका है। (डब्ल्यूएचओ की जांच टीम के सदस्य)

तीन चीनी रिसर्चर पड़े थे बीमार

तीन चीनी रिसर्चर पड़े थे बीमार

वाल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी के तीन रिसर्चर नवंबर 2019 में कोरोना वायरस से संक्रमित हो गये थे और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था। वाल स्ट्रीट जर्नल ने तमाम सबूतों के आधार पर दावा किया है कि जिस वक्त चीन में कोरोना वायरस की उत्पप्ति हो गई थी और तीनों रिसर्च करने वालों का एक साथ ही अस्पताल में जाना ये साबित करता है कि वो कोरोना वायरस से संक्रमित थे और चीन ने ही कोरोना वायरस को बनाया है। ना सिर्फ बनाया है बल्कि चीन ने ही कोरोना वायरस को दुनियाभर में फैलाया भी है। वाल स्ट्रीट जर्नल ने ये खुलासा उस वक्त किया है जब डब्ल्यूएचओ की डिसिजन मेकिंग बॉडी फिर से कोविड-19 की जांच को लेकर बैठक करने वाली है, जिसमें जांच के अगले चरण को लेकर फैसला होना है।

अमेरिका की प्रतिक्रिया

अमेरिका की प्रतिक्रिया

वहीं, वाल स्ट्रीट जर्नल के इस खुलासे पर अमेरिका के नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने कहा है कि 'जो बाइडेन की टीम को कोरोना वायरस की उत्पति और शुरूआती दिनों को लेकर गहरी चिंता है।' अमेरिका की नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल की प्रवक्ता ने कहा कि 'अमेरिका की सरकार डब्ल्यूएचओ के साथ लगाता संपर्क में है और साथ मिलकर काम कर रही है, जिसमें कई और देश शामिल है और हम बिना किसी राजनीतिक भेदभाव या राजनीतिक मकसद के कोरोना वायरस की उत्पत्ति को लेकर पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं।' उन्होंने कहा कि 'हम जांच रिपोर्ट के सामने आने तक या जांच खत्म होने तक इसको लेकर कोई प्रतिक्रिया नहीं देना चाहते हैं, जिससे ये पूरा घटनाक्रम पूर्व नियोजित लगे या फिर ऐसा लगे कि हम किसी नतीजे पर पहुंच चुके हैं। लेकिन हम इस बात को सुनिश्चित करना चाहते हैं कि चीन के लैब से वायरस निकला है, इस थ्योरी को लेकर निष्पक्ष और ठोस जांच हो'

विश्व के कई देशों को है चीन पर शक

विश्व के कई देशों को है चीन पर शक

अमेरिका, नॉर्वे, कनाडा, ब्रिटेन समेत विश्व के कई देशों ने इस साल मार्च में डब्ल्यूएचओ की उस रिपोर्ट पर चिंता जताई थी, जिसमें डब्ल्यूएचओ की टीम ने चीन जाकर कोरोना वायरस के जन्म को लेकर जांच की थी। इन देशों ने आगे और जांच की मांग की थी और मांग की थी कि चीन को हर वो जानकारी देनी चाहिए, जो इसकी जांच के लिए जरूरी हो। जिसमें शुरूआती समय में बीमार पड़े मरीजों के नाम, जानवरों के नाम और शुरआती दौर के आंकड़े देने की भी मांग की गई थी। वहीं, सूत्रों का कहना है कि अमेरिका चाहता है कि कोरोना वायरस की जांच को लेकर चीन पूरी तरह से सहयोग करे और पारदर्शिता दिखाए। वहीं, अमेरिका स्थिति चीनी दूतावास ने वाल स्ट्रीट जर्नल के इस खुलासे पर प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया है।

चीन क्या कहता है?

चीन क्या कहता है?

चीन ने वाल स्ट्रीट जर्नल के इस खुलासे पर भले ही अभी तक कोई प्रतिक्रिया ना दिया हो लेकिन रविवार को चीनी विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा था कि 'डब्ल्यूएचओ की जांच टीम ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि चीन के लैब से कोरोना वायरस की उत्पत्ति की संभावना काफी ज्यादा कम है, लेकिन जांच रिपोर्ट के बाद भी अमेरिका लैब थ्योरी को हवा दे रहा है'। इससे पहले अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप खुलकर कह चुके हैं कि कोरोना वायरस को चीन ने बनाया है और डोनाल्ड ट्रंप की टीम ने शंका जताई थी कि कोरोना वायरस चीन की प्रयोगशाला से ही निकला हुआ है जानलेवा वायरस है। हालांकि, चीन ने तमाम आरोपों को खारिज कर दिया था। डोनााल्ड ट्रंप के कार्यकाल खत्म होने के बाद उनके विदेश मंत्रालय ने जो रिपोर्ट सौंपी थी, उसमें कहा गया था कि 'अमेरिका की सरकार के पास ऐसी कई जानकारियां हैं, जो ये विश्वास करने के लिए काफी है कि चीन की प्रयोगशाला से ही वायरस निकला है। 2019 के आखिरी महीनों में वुहान प्रयोगशाला में कई रिसर्च करने वाले संक्रमण का शिकार हुए थे। अमेरिका के कई शोधकर्ता उस समय बीमार हुए थे जब तक चीन ने आधिकारिक तौर पर कोरोना वायरस संक्रमण की बात को स्वीकार भी नहीं किया था और चीन में भी कोरोना वायरस का पहला मामला सामने नहीं आया था।'

डॉ. एंथनी फाउची को भी शक

डॉ. एंथनी फाउची को भी शक

रविवार को अमेरिका में महामारी विशेषज्ञ डॉ. एंथनी फाउची ने कहा था कि 'वो इस बात को मानने के लिए सहमत नहीं हो पा रहे हैं कि कोविड 19 एक प्राकृतिक वायरस है और ये अपने आप विकसित होकर फैला है।' डॉ. एंथनी फाउची ने भी कोरोना वायरस की उत्पत्ति को लेकर गहनता से जांच की मांग की है। वहीं, उन्होंने भी चीन के ऊपर शक जताया है और चीन से इस वायरस को संबंधित तमाम जानकारियां पारदर्शी तरीके से दुनिया के सामने रखने की मांग की है। डॉ. एंथनी फाउची ने कहा था कि 'मुझे लगता है कि कोरोना वायरस की उत्पत्ति को लेकर और जांच होने की जरूरत है और हमें ये जानने की जरूरत है कि आखिर चीन में उस वक्त क्या हुआ था और क्या हो रहा था और हमें तमाम जांच के बाद ही आखिरी नतीजे पर पहुंचना चाहिए।'

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