'इतिहास के कचरे के डिब्बे में फेंक देंगे', अब चीन ने इस छोटे से यूरोपीय देश को धमकाया

ताइवान को विश्व के सिर्फ 15 देशों ने ही मान्यता दी हुई है और विश्व के करीब करीब सभी देश चीन के डर से ताइवान को 'चीनी ताइपे' कहकर अंतर्राष्ट्रीय मंच पर संबोधित करते हैं।

बीजिंग, दिसंबर 27: छोटे देशों के खिलाफ दादागीरी दिखाने का सिलसिला जारी है। ताइवान, इंडोनेशिया और वियतनाम जैसे देशों को बर्बाद करने की धमकी देने वाले ड्रैगन ने इस बार यूरोपीयन देश लिथुआनिया को इतिहास के कचरे के डिब्बे में फेंक देने की धमकी दी है। ताइवान को प्रतिनिधि ऑफिस खोलने की इजाजत देने के बाद लिथुआनिया के ऊपर ड्रैगन भड़क गया है और इस छोटे से यूरोपीयन देश को बर्बाद करने की धमकी दे रहा है।

लिथुआनिया को धमकी

लिथुआनिया को धमकी

चीन ने छोटे से यूरोपीय देश लिथुआनिया को "इतिहास के कचरे के डिब्बे" में डालने की धमकी दी है। ड्रैगन लिथुआनिया के उस कदम पर आगबबूला हो गया है, जिसके लिथुआनिया ने ताइवान को अपनी राजधानी विनियस में एक प्रतिनिधि कार्यालय खोलने की इजाजत देकर चीन के 'वन चीन पॉलिसी' को खारिज कर दिया है। दुनिया की सबसे ज्यादा आबादी वाला कम्युनिस्टों द्वारा शासित देश चीन ने दुनिया के सबसे छोटे देशों में शुमार और सिर्फ 30 लाख की आबादी वाले देश लिथुआनिया को धमकी देने में एक मिनट का वक्त भी नहीं लगाया। लेकिन, लिथुआनिया ने भी चीन की धमकी को दरकिनार करते हुए ताइवान को औपचारिक रूप से मान्यता देकर अपने यूरोपीय पड़ोसियों से अलग हो गया, जो एक स्व-शासित द्वीप ताइवान पर चीन के दावे का या तो समर्थन करता है, या फिर खामोश रहता है।

ताइवान को औपचारिक मान्यता

ताइवान को औपचारिक मान्यता

ताइवान खुद को एक अलग देश मानता है, जबकि चीन ताइवान को अखंड चीन का हिस्सा मानता है, वहीं दुनिया के ज्यादातर देश ताइवान को लेकर चुप ही रहते हैं। वहीं, इसी साल अगस्त में लिथुआनिया ने कहा था कि, वह ताइवान को अपने नाम पर अपने देश में एक कार्यालय खोलने की अनुमति देगा, जिसके बाद बीजिंग गुस्से में आग-बबूला हो गया और उसने जवाब में लिथुआनिया से अपने राजदूत को वापस बुला लिया। जिसके बाद चीन और लिथुआनिया के साथ राजनयिक संबंध और भी ज्यादा खराब हो गये।

ताइवान पर काफी आक्रामक चीन

ताइवान पर काफी आक्रामक चीन

हाल के वर्षों में ताइवान पर चीन काफी ज्यादा आक्रामक होता जा रहा है और चीन के युद्धक जहाज हर दूसरे दिन ताइवान के हवाई क्षेत्र में घुसपैठ करते रहते हैं और इस बात की संभावना भी काफी ज्यादा बढ़ गई है, कि ताइवान चीन पर आक्रमण कर सकता है, लिहाजा ताइवान को लेकर चीन का अमेरिका के साथ साथ ब्रिटेन, साउथ कोरिया, जापान और ऑस्ट्रेलिया के संबंध भी काफी बिगड़ गये हैं। वहीं, चीनी सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि, चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियन ने इस सप्ताह संवाददाताओं से कहा कि "लिथुआनिया सार्वभौमिक सिद्धांतों के विपरीत पक्ष में खड़ा है, जिसका कभी सुखद अंत नहीं होगा।"

''कूड़ेदान में बह जाएगा लिथुआनिया''

''कूड़ेदान में बह जाएगा लिथुआनिया''

चीन विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियन ने चेतावनी देते हुए कहा कि, "जो लोग ताइवान की अलगाववादी ताकतों के साथ मिलीभगत से काम करने पर जोर दे रहे हैं, उन्हें इतिहास के कूड़ेदान में फेंक दिया जाएगा।" बावजूद इसके लिथुआनिया ने चीन की धमकी पर कोई ध्यान नहीं दिया है। वहीं, ताइवान ने नवंबर में राजधानी विनियस में प्रतिनिधित्व कार्यालय खोल लिया और लिथुआनिया की रजामंदी के बाद पहली बार चीनी ताइपे की जगह ताइवान कार्यालय लिखा गया है। आपको बता दें कि, चीन की नाराजगी मोल लेने से बचने के लिए कई देश अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर ताइवान का नाम तक नहीं लेते हैं और उसे 'चीनी ताइपे' के नाम से पुकारते हैं।

ताइवान को लेकर सख्त रहता है चीन

ताइवान को लेकर सख्त रहता है चीन

चीन उन देशों को राजनयिक मान्यता देने से इनकार कर देता है, जो ताइवान को एक स्वतंत्र देश बताते हैं। चीन के इस दबाव के परिणामस्वरूप दुनिया के सिर्फ 15 देश ही ताइवान को एक स्वतंत्र और संप्रभु देश मानते हैं और इन देशों में ताइवान को राजनीतिक मान्यता दे रखी है और सिर्फ 15 देशों के साथ ही ताइवान का राजनीतिक गठबंधन है। वहीं, ताइवान को अब औपचारिक मान्यता देने की वजह से लिथुआनिया को भारी आर्थिक कीमत चुकानी पड़ सकती है। वहीं, समाचार एजेंसी रॉयटर्स की खबर के मुताबिक, चीन की धमकी के बाद ज्यादातर मल्टीनेशनल कंपनियां लिथुआनिया के साथ अपने संबंधों को खत्म करने के लिए तैयार हो गई है और अब इस बात की पूरी संभावना है, कि आने वाले वक्त में लिथुआनिया का कॉर्पोरेट बहिष्कार कर दिया जाएगा।

लिथुआनिया का पलटवार

ग्लोबल टाइम्स की रिपोर्ट में कहा गया है कि, हाल के वर्षों में लिथुआनिया आर्थिक रूप से चीन पर काफी ज्यादा निर्भर हो गया है और ग्लोबल टाइम्स ने धमकाते हुए कहा कि, लिथुआनिया के इस फैसले के बाद भविष्य में दोनों देशों के बीच व्यापार में कमी आएगी। वहीं, लिथुआनिया के सांसदों के प्रतिनिधि ने चीन के 'कचरे के डिब्बे' वाले बयान पर पलटवार किया है। मातस मालदेइकिस ने कहा कि, 'चीन ने हमें इतिहास के कचरे के डिब्बे में फेंकने की बात कही है, जबकि कम्युनिज्म पहले से ही कचरे के डिब्बे में पड़ा हुआ है।' इसके साथ ही लिथुआनिया के सांसद ने हैशटग ताइवान के साथ होने की भी घोषणा कर दी।

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