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चीनी कंपनियों के साथ भारत ने ऐसा क्या किया है, जिनसे परेशान हैं शी जिनपिंग?

India-China News: अमेरिका, यूरोप और भारत.. मौजूदा वक्त में चीन की कंपनियों पर तीन तरफ से दबाव बनाया जा रहा है और इसका असर ये हुआ है, कि चीनी कंपनियों के बने चुके सामान बिक नहीं रहे हैं। हालात ये हैं, कि चीन में सामानों की कीमत इतनी कम हो गई है, कि चीन अफस्फीति का सामना कर रहा है, यानि महंगाई सबसे न्यूनतम स्तर तक पहुंच चुका है, जिससे चीन की अर्थव्यवस्था, आर्थिक मंदी से बस एक कदम दूर है।

दूसरी तरफ, जर्मनी ने घोषणा कर दी है, कि वो चीन पर अपनी निर्भरता कम कर रहा है। अमेरिका के साथ चीन का ट्रेड वार बढ़ता ही जा रहा है और भारत के साथ पहली बार चीन का द्विपक्षीय व्यापार घट गया है। आने वाले वक्त में भारत और चीन का व्यापार और भी कम होगा, क्योंकि भारत के साथ साथ अमेरिका और यूरोप भी सप्लाई चेन को लेकर तेजी से चीन के विकल्प की तलाश कर रहे हैं।

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भारत-चीन का द्विपक्षीय व्यापार घटा

भारत और चीन के बीच के व्यापार में 0.9 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है, और ऐसा पिछले कई सालों के बाद ऐसा हुआ है। हालांकि, ये आंकड़ा देखने में कम लग सकता है, लेकिन ये अहम इसलिए है, क्योंकि पिछले कई सालों से दोनों देशों के बीच का कारोबार काफी तेजी से आगे बढ़ रहा था और उस तेजी को अचानक से रोकना संभव नहीं था। लेकिन, ये कमी बताती है, कि उस रफ्तार को रोक दिया गया है।

भारत के साथ साथ अमेरिका और यूरोप ने भी चीनी सामानों की निर्यात कम करनी शुरू कर दी है, जिसका असर ये हुआ है, कि चीन के कुल विदेशी व्यापार में करीब 5 प्रतिशत से ज्यादा गिरावट आई है, और कोविड संकट के बाद उसकी अर्थव्यवस्था उबरने से संघर्ष कर रही है।

चायनीज कस्टम ने गुरुवार को जो आंकड़े जारी किए हैं, उसके मुताबिक पिछले साल की पहली छमाही में चीन ने भारत को 57.51 अरब डॉलर का सामान बेचा था, जबकि इस साल उसमें 0.9 प्रतिशत की कमी आई है, और ये कारोबार 56.53 अरब अमेरिकी डॉलर का हो गया है।

इसी अवधि के दौरान भारत ने चीन को पिछले वर्ष के 9.57 अरब अमेरिकी डॉलर की तुलना में कुल 9.49 अरब अमेरिकी डॉलर का सामान बेचा। यानि, भारत जो सामान चीन को बेचता है, उसमें भी कमी आई है।

2022 में कुल भारत-चीन व्यापार 8.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज करके एक साल पहले 125 अरब अमेरिकी डॉलर के आंकड़े को पार कर गया था, लेकिन अगर चीन को तीन तरफ से व्यापारिक नुकसान होता है, तो यकीनन उसकी अर्थव्यवस्था मुसीबत में फंस जाएगी।

चीन के टॉप डिप्लोमेट ने क्या कहा?

चीन के शीर्ष राजनयिक वांग यी ने शुक्रवार को भारतीय विदेश मंत्री सुब्रमण्यम जयशंकर से मुलाकात की है। इस दौरान वांग यी ने भारत से चीनी कंपनियों के लिए निष्पक्ष, पारदर्शी और गैर-भेदभावपूर्ण कारोबारी माहौल प्रदान करने का आग्रह किया है।

सिन्हुआ समाचार एजेंसी के अनुसार, चीन के केंद्रीय विदेश आयोग के कार्यालय के डायरेक्टर वांग यी ने आसियान विदेश मंत्रियों की बैठकों के मौके पर जयशंकर के साथ बातचीत के दौरान, चीनी कंपनियों के खिलाफ भारत के हालिया प्रतिबंधों पर चीन की चिंता व्यक्त की है।

चीनी कंपनियों पर सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि भारत के सहयोगी देश भी प्रतिबंध लगा रहे हैं, जिसने चीन की चिंताओं को काफी बढ़ा दिया है। इसके अलावा, चीन के अंदर काम करने वाली अमेरिकी और यूरोपीय कंपनियां भी चीन के बाहर के विकल्पों पर विचार करने लगी हैं।

वहीं, चीन के डिप्लोमेट वांग यी से बैठक के दौरान भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा, कि भारत-चीन संबंधों का सामान्यीकरण दोनों पक्षों के सामान्य हितों को पूरा करता है, उन्होंने कहा कि भारत खुले दिमाग से मतभेदों को ठीक से संभालने का इच्छुक है। लेकिन, भारत ने साफ तौर पर सीमा विवाद को पहले सामने रखा है।

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चीनी कंपनियों के साथ भारत क्या कर रहा है?

हाल के वर्षों में, भारत सरकार ने चीनी कंपनियों पर अपनी कार्रवाई तेज कर दी है, खासकर स्मार्टफोन क्षेत्र में भारत ने कुछ सख्त कदम उठाए हैं।

उदाहरण के लिए, भारत सरकार ने जून में विदेशों में धन के कथित अवैध हस्तांतरण का हवाला देते हुए Xiaomi के लगभग 4.8 अरब युआन (672 मिलियन डॉलर) मूल्य के फंड को फ्रीज कर दिया है।

इसके बाद पिछले महीने भारत सरकार ने यह आदेश दिया है, कि Xiaomi, OPPO और vivo जैसे चीनी स्मार्टफोन निर्माताओं को CEO, चीफ ऑपरेशंस ऑफिसर, चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर, चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर जैसे पदों पर स्थानीय प्रतिभाओं को नियुक्त करना होगा। यानि, इन पदों पर भारतीयों की नियुक्ति करनी होगी।

Xiaomi India कथित तौर पर महत्वपूर्ण छंटनी का दौर शुरू कर रहा है। हाल की मीडिया रिपोर्टों से पता चलता है, कि जिस कंपनी ने 2023 की शुरुआत में अनुमानतः 1,400 से 1,500 कर्मचारियों को रोजगार दिया था, उसने अपने कार्यस्थल को घटाकर लगभग 1,000 कर दिया है।

अपनी कंपनियों के खिलाफ भारत में लिए जा रहे एक्शन से चीन परेशान है।

ग्लोबल टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, शंघाई इंस्टीट्यूट फॉर इंटरनेशनल स्टडीज के चीन-दक्षिण एशिया सहयोग रिसर्च केंद्र के महासचिव लियू जोंगयी ने कहा, कि भारत ने पिछले कुछ वर्षों में चीनी कंपनियों के खिलाफ अपने अंकुश काफी तेज कर दिए हैं, खासकर जून 2020 में गलवान घाटी में चीन और भारत के बीच सीमा गतिरोध के बाद भारत ने कई सख्त कदम उठाए हैं।

लियू ने कहा, चीनी कंपनियों के प्रति ये भारतीय कार्रवाई अनुचित हैं।

चीन के विश्लेषकों का कहना है, कि चीनी कंपनियों के खिलाफ भारतीय अधिकारी निशाना बनाकर कार्रवाई कर रहे हैं, जिससे चीनी निवेशकों को काफी नुकसान हो रहा है।

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