एयरपोर्ट बनाकर नेपाल का खून चूस रहा चीन, 2% बोलकर 36 फीसदी वसूल रहा ब्याज, पोल खोलने वाले पत्रकार को धमकाया
Chinese Airport in Nepal: छोटे देशों को चीन कर्ज के जाल में कैसे फंसाता है, कैसे उनसे झूठे वादे करता है, कैसे उन्हें परेशान करता है, इसका सबसे बेहतरीन उदाहरण नेपाल है। शायद इस मामले का खुलासा नहीं होता, अगर नेपाल में चीन के राजदूत ने नेपाली पत्रकार को धमकाया नहीं होता।
दरअसल, चीन ने 215.96 मिलियन डॉलर की लागत से नेपाल में पोखरा एयरपोर्ट का निर्माण करवाया था, लेकिन ये एयरपोर्ट नेपाल के लिए सफेद हाथी बन गया है। ये एयरपोर्ट पूरी तरह से खाली है और इसका कोई इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है, जिसकी वजह से अब नेपाल इस एयरपोर्ट का खर्च तक निकाल नहीं पा रहा है।

सबसे हैरानी की बात ये है, कि इस एयरपोर्ट पर सवाल उठाने वाले नेपाली पत्रकार को चीन ने धमकाने की कोशिश की है और नेपाली पत्रकार को फौरन माफी मांगने के लिए कहा है। लेकिन, नेपाली पत्रकार ने चीन की 'वुल्फ वॉरियर डिप्लोमेसी' के सामने झुकने से इनकार कर दिया है।
एयरपोर्ट बनवाकर कैसे फंसा नेपाल?
दरअसल, चीन ने जिस पोखरा इंटरनेशन एयरपोर्ट का निर्माण करवाया था, सार्वजनिक तौर पर इसके बारे में जानकारी ये थी, कि चीन ने नेपाल को 215.96 मिलियन अमेरिकी डॉलर का कर्ज 2 प्रतिशत के ब्याज पर दिया है। इस एयरपोर्ट का निर्माण भी चीनी कंपनियों ने ही किया है।
लेकिन, एक वरिष्ठ नेपाली पत्रकार गजेंद्र बुधाथोकी ने दस्तावेजों को सार्वजनिक करते हुए कहा है, कि चीन ने असल में नेपाल के साथ 5 प्रतिशत ब्याज पर नेपाल को कर्ज दिया है। और अगर इसमें विनियम दर को जोड़ दिया जाए, तो फिर ये 36 प्रतिशत हो जाता है।
नेपाली पत्रकार गजेंद्र बुधाथोकी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बकायदा उन दस्तावेजों को सार्वजनिक किया है, जिसपर नेपाल सरकार और चीन की सरकार ने दस्तखत किए हैं। जिसके बाद नेपाल में तैनात चीन के राजदूत चेन सोंग ने नेपाली पत्रकार को धमकाना शुरू कर दिया।
पत्रकार बुधाथोकी ने एक्स पर एक सोशल मीडिया पोस्ट में नेपाल में चीनी राजदूत चेन सोंग से स्पष्टीकरण मांगी थी। जिसके बाद दोनों के बीच तीखी बहसबाजी होने लगी। चीनी राजदूत ने नेपाली पत्रकार से माफी मांगने को कहा। लेकिन, नेपाली पत्रकार ने कहा, कि वो माफी नहीं मांगेगे और वो चीन को एक्सपोज कर देंगे।
नेपाली पत्रकार ने आधिकारिक दस्तावेज को एक्स पर पोस्ट किया है, जिसमें दिखाया गया है, कि वास्तविक ब्याज दर 5% है।
लेकिन, जैसे ही चीन की चालबाजी दुनिया के सामने आने लगी, चीनी राजदूत ने नेपाली पत्रकार को धमकाना शुरू कर दिया। चीनी दूत सोंग ने एक्स पर अपने पोस्ट में कहा, कि "मैंने अब तक का सबसे बुरा झूठ देखा है। यह जानकारी पहले से ही सार्वजनिक है, फिर भी आप इसके बारे में झूठ बोलने की हिम्मत करते हैं।"
वहीं, एक अन्य पोस्ट में, उन्होंने तक्सर पत्रिका के मुख्य संपादक बुधाथोकी को तत्काल माफी मांगने को कहा। लेकिन, पत्रकार बुधाथोकी ने चीनी राजदूत को साफ शब्दों में कहा, कि 'आप हमें धमका नहीं सकते हैं।'
I will publish with proof
— Gajendra Budhathoki ♿ (@gbudhathoki) May 29, 2024
एयरपोर्ट पर क्यों मचा नेपाल में बवाल
नेपाल के दूसरे सबसे बड़े पोखरा एयरपोर्ट का उद्घाटन जनवरी 2023 में बहुत धूमधाम से किया गया था, जिसे चीन ने फाइनेंस और निर्माण करवाया है। पहले बताया गया था, कि ऋण के लिए ब्याज दर 2 प्रतिशत होगी। लेकिन बुधाथोकी का दावा है, कि उनके पास ऋण समझौते के लिए हस्ताक्षरित दस्तावेज है, जिसमें दिखाया गया है, कि चीन के निर्यात-आयात बैंक ने 5 प्रतिशत पर ऋण नेपाल को दिया है।
इकोनॉमिक टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में कहा है, कि जिस तरह से चीनी राजदूत ने नेपाल के वरिष्ठ पत्रकार को धमकाया है, वो चीन के 'वुल्फ वॉरियर डिप्लोमेसी' का हिस्सा है, जिसके तहत चीन किसी देश या फिर किसी पत्रकार और डिप्लोमेट्स को धमकाने की कोशिश करता है।
लेकिन, जिस तरह से चीनी राजदूत ने नेपाली पत्रकार को धमकाया है, उसने नेपाल के पत्रकारों और नेपाल के पूर्व डिप्लोमेट्स को नाराज कर दिया है।
चीन के वरिष्ठ डिप्लोमेटिक पत्रकार मधु रमन आचार्य ने अपनी पोस्ट में कहा है, कि "कोई विदेशी राजदूत अगर किसी मेजबान देश के पत्रकार को माफी मांगने के लिए कहता है, तो ये काफी असमानाय है। वो इस खबर का खंडन कर सकते थे, या फिर सरकार से स्पष्टीकरण मांग सकते थे, लिहाजा नेपाली विदेश मंत्रालय को चीनी राजदूत को 'सार्वजनिक कूटनीति' की सीमाओं और सीधे जुड़ाव के जोखिमों की याद दिलानी चाहिए।"

पालतू में बनाया गया है एयरपोर्ट
करीब एक दशक पहले चीन ने एयरपोर्ट बनाने के लिए लोन देने पर सहमति जताई थी। चीन की सरकारी स्वामित्व वाली निर्माण कंपनी CAMC इंजीनियरिंग ने एयरपोर्ट का निर्माण किया है। हालांकि, एयरपोर्ट पर जो चंद फ्लाइट आती हैं, वो चीनी फ्लाइटें ही होती हैं। इसके अलावा, ये एयरपोर्ट खाली रहता है, लिहाजा नेपाल सरकार इस एयरपोर्ट से कोई कमाई नहीं कर पाती है।
इससे यह सवाल उठने लगा है, कि एयरपोर्ट को लेकर नेपाल ने जो चीनी लोन लिया है, भला वो कैसे चुकाएगा?
काठमांडू बीजिंग से देश पर वित्तीय बोझ कम करने के लिए लोन की शर्तों में बदलाव करने की मांग कर रहा है, लेकिन चीन ने अभी तक इस पर कोई नरमी नहीं दिखाई है। नवंबर 2023 में, द न्यूयॉर्क टाइम्स ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी, कि चीनी निर्माण फर्म ने परियोजना की लागत बढ़ा दी थी और नेपाल सरकार एयरपोर्ट में जिस तरह का क्वालिटी चाह रही थी, उसे भी खराब कर दिया गया था, ताकि चीनी कंपनी को बार बार एयरपोर्ट के मरम्मत के लिए आना पड़े।
रिपोर्ट में कहा गया था, कि नेपाल के नागरिक उड्डयन प्राधिकरण ने बीजिंग में नाराजगी जताने के बजाए चीनी कंपनी के गलत कामों को नजरअंदाज कर दिया था।
It is unusual for a foreign ambassador to demand apology from a host country journalist for a social media post. He could refute or ask the government to clarify.
The foreign ministry should remind the ambassador the limits of “public diplomacy” and risks of direct engagement.
— Madhu Raman Acharya (@MadhuRamanACH) May 29, 2024
चीन का कर्ज कैसे है जहरीला प्याला?
कहा जाता है, कि दुनिया भर के वे देश, जिन्होंने बुनियादी ढांचे की परियोजनाओं के लिए बड़े पैमाने पर ऋण लिया है, वे ऋण के जाल में फंसते जा रहे हैं। श्रीलंका में दो साल पहले आई आर्थिक तबाही इसका बेजोड़ उदाहरण है। चीन आर्थिक परियोजनाओं के लिए देशों के साथ जो सौदा करता है, उसकी शर्तें गुप्त रखी जाती हैं और तमाम रिपोर्ट्स में कहा गया है, कि ऋण की शर्तें काफी सख्त और ब्याज दरें जो बताई जाती है, उससे ज्यादा होती है।
इसके अलावा, जो प्रोजेक्ट का ठेका भी चीनी कंपनियों को ही दिया जाता है। और उन प्रोजेक्ट्स में काम करने वाले ज्यादतर इंजीनियर भी चीन के ही होते हैं। यानि, कर्ज का वो पैसा भी वापस चीन ही चला जाता है।
चीन अपने ऋण का जाल जियो-पॉलिटिकल फायदा उठाने के लिए इस्तेमाल तकता है और 2021 की एक रिपोर्ट में कहा गया है, कि चीन ने दुनिया के करीब 100 देशों के साथ आर्थिक समझौते किए हैं। सबसे बड़ी शर्त ये होती है, कि उधार लेने वाले देश पूर्ण गोपनीयता से बंधे होते हैं और चीनी दबाव इतना होता है, कि वो किसी भी कीमत पर शर्तों का उल्लंघन नहीं कर सकते हैं।
नेपाल के लिए भी चीन के ऋण जाल से निकलना काफी मुश्किल है, लेकिन नेपाल की जनता को अपनी सरकार से सवाल करना चाहिए, कि आखिर इस प्रोजेक्ट से चीन को छोड़कर किन लोगों को लाभ पहुंचा है? जो ये सौदा किया गया।












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