Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

Must Read: भारत की नाक के नीचे लंगड़ डालने वाली है चीन की नौसेना, मदद के बाद भी बांग्लादेश बना नमकहराम?

China's Navy in Bangladesh: चीनी पनडुब्बियां और युद्धपोत बहुत जल्द भारत की नाक के नीचे अपना लंगड़ डालने वाली हैं। बांग्लादेश की नौसेना को पनडुब्बियों की सप्लाई करने वाली चीन की नेवी, बांग्लादेश के कॉक्स बाजार में एक बंदरगाह का निर्माण कर रही है, जिसका उद्घाटन इस साल की शुरुआत में किया गया था और अब ऐसी रिपोर्ट है, की चीन की नौसेना की यहां पर हमेशा के लिए मौजूदगी हो सकती है।

दरअसल, चीन ने बांग्लादेश को दो पनडुब्बियां बेची हैं और इनके जरिए चीन, बंगाल की खाड़ी में पहुंच चुका है।

सैटेलाइट तस्वीरों से पता चलता है, कि चीन ने बांग्लादेश में नौसेना बेस पर महत्वपूर्ण प्रगति की है, और बेस का आकार बताता है कि पीएलए-नौसेना जल्द ही बांग्लादेश के बनने वाले बंदरगाह तक "लॉजिस्टिक पहुंच" हासिल कर लेगी।

China’s Navy in Bangladesh

दूसरे शब्दों में कहें, तो चीनी पनडुब्बियां, सर्विसिंग के लिए बांग्लादेश बंदरगाह पर आएंगी और डॉक करेंगी। विशेषज्ञ इसे चीन की ''पनडुब्बी कूटनीति'' बता रहे हैं, जो निश्चित तौर पर भारत के लिए खतरनाक साबित होने वाला है और हिंद महासागर के साथ साथ बंगाल की खाड़ी में भारत को घेरने की चीन की पॉलिसी को बड़ा बूस्ट मिलने वाला है।

बांग्लादेश में नौसैनिक अड्डे के निर्माण को लेकर सैटेलाइट तस्वीरों के हालिया विश्लेषण के मुताबिक, "बंगाल की खाड़ी में पैर जमाने से, चीनी नौसेना की चीन के तटों से काफी दूर तक काम करने की क्षमता काफी बढ़ जाएगी और भारत के साथ-साथ संयुक्त राज्य अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए नई चुनौतियां पैदा होंगी।"

बंगाल की खाड़ी में चीन की नौसेना

बांग्लादेश ने फोर्सेज गोल-2030 के तहत अपने सैन्य आधुनिकीकरण के एक हिस्से के रूप में 2013 में चीन से अपनी पहली दो पनडुब्बियों का ऑर्डर सिर्फ 203 मिलियन अमेरिकी डॉलर की मामूली कीमत पर तय कर लिया था। जाहिर तौर पर, चीन ने काफी कम कीमत पर बांग्लादेश को सिर्फ इसलिए पनडुब्बियां बेचीं, ताकि वो भारत के खिलाफ इसका फायदा उठा सके।

ये पनडुब्बियां टाइप 035G डीजल-इलेक्ट्रिक अटैक पनडुब्बियां हैं, एक मिंग-क्लास वैरिएंट, जिसे 1990 में पीएलए नौसेना (पीएलएएन) में पहली बार कमीशन किया गया था।

चीन ने 2016 में बांग्लादेश को सौंपने से पहले, दोनों पनडुब्बियों को परिष्कृत और एडवांस किया था, लेकिन उनकी क्षमताएं अभी भी किसी भी आधुनिक हमलावर पनडुब्बी से कम हैं। पनडुब्बियों की डिलीवरी के एक साल बाद, चीनी राज्य के स्वामित्व वाली रक्षा ठेकेदार पॉली टेक्नोलॉजीज ने देश के दक्षिण-पूर्वी तट पर एक नई पनडुब्बी सहायता सुविधा बनाने के लिए बांग्लादेश के साथ 1.2 बिलियन अमेरिकी डॉलर का अनुबंध हासिल किया।

कैसा है बांग्लादेश में बनने वाला सैन्य बंदरगाह?

बांग्लादेश की वर्तमान प्रधान मंत्री शेख हसीना के नाम पर, बांग्लादेश में बीएनएस शेख हसीना नौसेना बेस का नामकरण किया गया। यह बेस 1.75 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है और इसका निर्माण 2020 में शुरू हुआ था। इस बेस का उद्घाटन मार्च 2023 में प्रधानमंत्री शेख हसीना ने किया था और इसे "अति-आधुनिक" करार दिया था।

समारोह में कम से कम दो वरिष्ठ पीएलए-एन अधिकारियों सहित कई चीनी अधिकारियों ने भाग लिया था।

पनडुब्बी कूटनीति- बंगाल की खाड़ी के साथ चीन के प्रभाव का एक स्नैपशॉट" शीर्षक वाली एक रिपोर्ट में कहा गया है, कि "जुलाई 2023 की सैटेलाइट इमेजरी से पता चलता है, कि बंदरगाह का निर्माण तेजी से जारी है। चल रहे काम के बावजूद, बांग्लादेश ने पहले से ही अपनी चीनी निर्मित पनडुब्बियों को वहां तैनात कर दिया है। एक बार काम पूरा होने पर, यह बेस छह पनडुब्बियों और आठ युद्धपोतों को एक साथ डॉक करने में सक्षम होगा।"

China’s Navy in Bangladesh

कितना महत्वपूर्ण है बंगाल की खाड़ी?

बंगाल की खाड़ी समुद्री कम्युनिकेशन और समुद्र मार्गों के शीर्ष पर स्थित है जो चीन, जापान और कोरिया को मध्य पूर्व और अफ्रीका से जोड़ती है, और इन मार्गों से दुनिया का आधा व्यापार गुजरता है, लिहाजा बंगाल की खाड़ी की अहमियत को समझा जा सकता है।

बंगाल की खाड़ी, दुनिया में सबसे बड़ी है, जो पूर्व में भारत और पश्चिम में इंडोनेशिया के बीच स्थित है, जबकि बांग्लादेश, श्रीलंका और म्यांमार तटीय देश हैं। क्षेत्र का आर्थिक, कूटनीतिक और सुरक्षा महत्व, पूर्व और पश्चिम (चीन, जापान, भारत, अमेरिका और यहां तक कि रूस) में महत्वपूर्ण शक्तियों को आकर्षित करता है।

रिपोर्ट में कहा गया है, कि "आर्मी टू आर्मी आदान-प्रदान भी चीन के रणनीतिक उद्देश्यों का समर्थन करता है। घनिष्ठ रक्षा संबंधों से पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) को क्षेत्र में, भविष्य के नौसैनिक अभियानों को बनाए रखने के लिए आवश्यक रसद सुविधाओं तक सुरक्षित पहुंच में मदद मिल सकती है।"

यानि, बांग्लादेश को पनडुब्बियों की आपूर्ति करने के बाद चीन की नौसेना, उन पनडुब्बियों की मरम्मत के नाम पर हमेशा वहां लंगड़ डाले रह सकती है, जाहिर तौर पर, ये भारत की सुरक्षा का गंभीर उल्लंघन होगा।

इसके अलावा, अमेरिकी रक्षा विभाग ने बांग्लादेश और म्यांमार दोनों को उन स्थानों की सूची में शामिल किया है, जहां बीजिंग संभवतः विदेशी सैन्य सुविधाएं स्थापित करने का प्रयास कर रहा है।

बांग्लादेश में मौजूद हैं चीनी सैन्य अधिकारी

बांग्लादेश के अधिकारियों ने पुष्टि की है, कि चीनी कर्मी अपने पनडुब्बी चालकों को पनडुब्बियों और नए बेस को संचालित करने के प्रशिक्षण में भी शामिल हैं। प्रधान मंत्री हसीना ने यह भी कहा है, कि इस सुविधा का उपयोग "बंगाल की खाड़ी में नौकायन करने वाले जहाजों के लिए एक सर्विस प्वाइंट" के रूप में किया जा सकता है, जो एक संभावित संकेत है, कि पीएलए-एन किसी भी दिन वहां बंदरगाह पर कॉल कर सकता है।

चीन ने, अपनी तरफ से, परियोजना के विवरण को गुप्त रखा है, क्योंकि वह भारत को नाराज नहीं करना चाहेगा, जिसने बार-बार चीन की बढ़ती सैन्य उपस्थिति के मामले को उठाया है और अपने प्रभुत्व वाले क्षेत्र में सैन्य बुनियादी ढांचे की स्थापना की है।

विशेषज्ञों ने कहा, "बीजिंग भी संयुक्त राज्य अमेरिका और उसके सहयोगियों के बीच अतिरिक्त बेचैनी पैदा करने से बचना चाहता है, क्योंकि यह सीधे तौर पर स्वतंत्र और खुले इंडो-पैसिफिक क्षेत्र का उल्लंघन करता है।"

चीन का 'मौत का त्रिकोण'

यूरेशियन टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सोसाइटी फॉर पॉलिसी स्टडीज के निदेशक, कमोडोर (सेवानिवृत्त) उदय सी. भास्कर ने कहा, कि "भारत के लिए, बंगाल की खाड़ी में चीन निर्मित पनडुब्बियों की मौजूदगी, एक तरह से इसे पानी के नीचे की गतिविधियों के मामले में बहुत भीड़भाड़ वाला जल निकाय बनाती है। और यह कई तरीकों से चीनी उपस्थिति को वैध भी बनाता है।" उन्होंने कहा, कि "यह भारत के लिए पानी के नीचे की तस्वीर को जटिल बनाता है।"

हालांकि, बांग्लादेश की नौसेना की दो पनडुब्बियां भारत के लिए कोई महत्वपूर्ण खतरा नहीं हैं, क्योकि एशियाई दिग्गज, जो बांग्लादेश को तीन तरफ से घेरता है और बंगाल की खाड़ी में उसका पर्याप्त रणनीतिक हित है। लेकिन दोनों पनडुब्बियां बांग्लादेश के चालक दल को प्रशिक्षित करने और जहाजों से परिचित कराने के लिए चीनी अधिकारियों के साथ आई हैं, और वो भारत के लिए चिंता की बात है।

इसके साथ ही, पनडुब्बी बेस को चीनी कर्मियों से रखरखाव और ऑपरेशनल मदद की आवश्यकता होगी। भारत की पूर्वी नौसेना कमान से इसकी नजदीकी, जहां भारत की स्वदेशी परमाणु पनडुब्बी निर्माणाधीन है, वो चिंता का कारण है।

कमोडोर भास्कर ने कहा, कि "चीन लंबे समय से अपने सीमित और प्रतिकूल समुद्री भूगोल, खासकर पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र के कारण बंगाल की खाड़ी और अरब सागर तक पहुंचने की कोशिश कर रहा है। चीन के लिए बंगाल की खाड़ी में प्रवेश को पहले म्यांमार और अब बांग्लादेश द्वारा काफी सुविधा प्रदान की जा रही है।"

भारत को कैसे घेर रहा है चीन?

चीन भारत के करीब तीन बंदरगाहों का संचालन कर रहा है। एक बांग्लादेश में चटगांव, दूसरा श्रीलंका में हंबनटोटा और तीसरा पाकिस्तान में ग्वादर, जिसने भारत को घेरते हुए एक "मौत का त्रिकोण" बना लिया है। वे नई दिल्ली की अपने बैकयार्ड में रणनीतिक प्रभुत्व बनाए रखने की रणनीति के लिए हानिकारक साबित हो सकते हैं।

श्रीलंका की एक स्वतंत्र राजनीतिक और ऊर्जा विश्लेषक अरुणा कुलतुंगा ने साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट को बताया, कि भारत श्रीलंका, बांग्लादेश और पाकिस्तान को "वास्तव में चीन के सैटेलाइट राज्यों" के रूप में देखता है, क्योंकि उन्होंने चीन को जमीन पट्टे पर दी है।

श्रीलंकाई विश्लेषक का कहना है, कि ये देश "मौत का त्रिकोण" बनाते हैं। उन्होंने कहा, ''(भारत के लिए) यह गला घोंटने जैसा है।'' उन्होंने कहा, कि इसीलि नई दिल्ली को महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों की सुरक्षा के लिए और अधिक संसाधन लगाने की जरूरत है।

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+